एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में हनुमान जन्मोत्सव श्रद्धा और आदर भाव के साथ मनाया गया
भव्य समारोह में सुन्दरकाण्ड और हनुमान चालीसा का किया गया पाठ
भगवान हनुमान की पूजा हमें बल, बुद्धि देने और संकट-मोचन में मददगार: नरेश कुमार गोयल
हनुमान जयंती हनुमान जी के प्रति भक्ति, नि:स्वार्थ सेवा और साहस को याद करने का दिन: दिनेश गोयल
BOL PANIPAT , 02 अप्रैल , एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में हनुमान जन्मोत्सव श्रद्धा और आदर भाव के साथ मनाया गया । कॉलेज में आयोजित भव्य समारोह में सुन्दरकाण्ड और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया । समारोह में अनूप कुमार प्रधान एसडी एजुकेशन सोसाइटी (रजि.) पानीपत, नरेश गोयल सचिव एसडी एजुकेशन सोसाइटी (रजि.) पानीपत, आकाश गर्ग चेयरमैन एसडी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, उप-प्रधान राजीव गर्ग, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के सदस्यों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और सच्चे ह्रदय से पूजा और भगवान हनुमान की स्तुति की । कॉलेज प्राचार्य ने बहुत ही मीठे और श्रद्धापूर्ण स्वरो में भजन, हनुमान चालीसा और सुन्दरकाण्ड का गायन कर सभी को भाव-विभोर कर दिया । अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया गया । विदित रहे कि हनुमान जन्मोत्सव एक हिन्दू पर्व है जो हिंदू देवता हनुमान के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है । यह भारत के विभिन्न भागों में परंपरानुसार अलग-अलग समय एवं तिथियों को मनाया जाता है । उत्तरी भारत के अधिकाँश क्षेत्रों में यह चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है । मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था ।

दिनेश गोयल कॉलेज प्रधान ने कहा कि भगवान हनुमान के गुरु इनकी माता, भगवान् शंकर, भगवान सूर्य और ऋषि मातंग थे । हनुमान जी अनेक नामों से प्रसिद्ध है जैसे बजरंग बली, मारुति, अञ्जनि सुत, पवनपुत्र, संकटमोचन, केसरीनन्दन, महावीर, कपीश, शङ्कर सुवन आदि । हनुमान को भगवान राम का परम भक्त माना जाता है और वे अपनी अटूट भक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं । उन्हें शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि हनुमान जन्मोत्सव के दिन लोग हनुमान मन्दिर में दर्शन हेतु जाते है । कुछ लोग व्रत भी धारण कर बड़ी उत्सुकता और ऊर्जा के साथ समर्पित होकर इनकी पूजा करते है । चूँकि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे अतः इन्हे जनेऊ भी पहनाई जाती है । हनुमान जी की मूर्तियों पर सिन्दूर और चाँदी का वर्क चढ़ाने की परम्परा है । कहा जाता है कि भगवान राम की लम्बी आयु के लिए एक बार हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर चढ़ा लिया था और इसी कारण उन्हें और उनके भक्तो को सिन्दूर चढ़ाना अच्छा लगता है जिसे भक्त चोला कहते है । संध्या के समय दक्षिण मुखी हनुमान मूर्ति के सामने शुद्ध होकर मन्त्र जाप करने को अत्यन्त महत्त्व दिया जाता है । हनुमान जन्मोत्सव पर रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड पाठ को पढना भी हनुमानजी को प्रसन्न करता है । सभी मन्दिरो में आज के दिन तुलसीदास कृत रामचरितमानस, बजरंग बाण एवं हनुमान चालीसा का पाठ होता है और स्थान-स्थान पर भण्डारे आयोजित किये जाते है । तमिलनाडु व केरल में हनुमान जन्मोत्सव मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को तथा उड़ीसा में वैशाख महीने के पहले दिन मनाई जाती है । वहीं कर्नाटक व आन्ध्र प्रदेश में चैत्र पूर्णिमा से लेकर वैशाख महीने के 10वें दिन तक यह त्योहार मनाया जाता है ।

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