Friday, April 17, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की यूथ रेड क्रॉस द्वारा विश्व स्वास्थ्य सप्ताह के अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at April 13, 2026 Tags: , , , , ,

एचआईवी और तपेदिक रोग के बारे में काउंसलरस को किया गया जागरुक    

एचआईवी-एड्स के रोग से नफरत करे, रोगी से नहीं: अंजू   

BOL PANIPAT , 13 अप्रैल.  एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व स्वास्थ्य सप्ताह के अवसर पर एड्स और तपेदिक रोग के बारे में वाईआरसी काउंसलरस को सेमिनार के माध्यम से जागरूक किया गया । सेमिनार कॉलेज वाईआरसी और रेड रिबन क्लब के संयक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया । इस अवसर पर अंजू काउंसलर और मनोचिकित्सक पीएसआई पानीपत ने दोनों बीमारियों के बारे में और इनसे बचने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की । सेमिनार का प्रारम्भ प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कॉलेज वाईआरसी काउंसलर डॉ राकेश गर्ग और एनएसएस अधिकारी डॉ संतोष कुमारी ने पौधा रोपित गमला भेंट करके किया । सेमिनार में डॉ एसके वर्मा और प्रो मनोज कुमार भी उपस्थित रहे । इस अवसर काउंसलरस ने एड्स और तपेदिक के बारे में और लोगों को जागरूक करने की शपथ उठाई । 

अंजू ने कहा कि एड्स बीमारी एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनो डेफिशिएंसी वायरस से फैलती है । यह वाइरस शरीर के इम्यून सिस्टम पर हमला करता है जिससे अन्य बीमारियाँ इंसान को जकड़ने लगती है । एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति बेशक अपनी स्थिति को बदल नहीं सकता है परन्तु हम अपना व्यवहार और रवैया जरुर बदल सकते है । हमें चाहिए की हम रोग से घृणा करें रोगी से नहीं । अब एड्स से ग्रसित लोगों की सरकार भी भरपूर मदद करती है ताकि वे अच्छे इलाज से वंचित न रह सके । एचआईवी एड्स बिमारी का आज भी कोई कारगर इलाज उपलब्ध नहीं है लेकिन इस बिमारी को फैलने से रोका अवश्य जा सकता है और एचआईवी संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक जिंदा रह सकता है । एड्स पर सेमिनार के माध्यम से युवाओं के ज्ञान में तो वृद्धि होती ही है साथ ही उन्हें एचआईवी-एड्स को समझने में तथा इस से जुड़ी भ्रांतियों और मिथकों को तोड़ने में मदद भी मिलती है । एड्स से बचने के उपायों पर बोलते हुए उन्होनें कहा कि हमें संयमित और अनुशासित जीवन जीना चाहिए । मादक औषधियों के अभ्यस्त व्‍यक्ति के द्वारा उपयोग में ली गई सिरिंज व सूई का प्रयोग नहीं करना चाहिए । एड्स पीडित महिलाओं को सोच-समझकर गर्भधारण करना चाहिए । रक्‍त की आवश्‍यकता होने पर हमें अनजान व्‍यक्ति का रक्‍त लेने से बचना चाहिए । अगर रक्त लेना अवश्यम्भावी हो तो पहले रक्त की एचआईवी के लिए जांच अवश्य करवानी चाहिए । दूसरे व्‍यक्ति द्वारा प्रयोग में लिया हुआ ब्‍लेड और पत्‍ती काम में नहीं लेनी चाहिए । तपेदिक (टीबी) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु से होने वाली एक संक्रामक, गंभीर बीमारी है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है । यह हवा के माध्यम से, संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलती है । यह रोग शरीर के अन्य अंगों (रीढ़, मस्तिष्क) में भी फैल सकता है और उचित इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकता है ।  टीबी दो प्रकार की होती है, ‘सक्रिय टीबी’ (लक्षण वाली) और ‘सुप्त टीबी’ (शरीर में बैक्टीरिया, पर लक्षण नहीं) । तीन  सप्ताह से अधिक खांसी, खांसी के साथ खून आना, सीने में दर्द, थकान, बुखार और रात में पसीना आना इसके मुख्य लक्षण हैं । यह रोग पूरी तरह से ठीक होने योग्य है बस इसके लिए 6 से 9 महीने तक एंटीबायोटिक दवाओं को लेना जरूरी है ।  बीसीजी का टीका लगवाना, पौष्टिक आहार लेना, और बीमार व्यक्ति से दूरी व साफ-सफाई रखना इससे बचाव के उपाय हैं । 

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि एड्स का खतरा नशीली दवाईयां और इन्‍जेकशन लेने वाले व्‍यक्ति, पिता एवं माता के एचआईवी संक्रमण के पश्‍चात पैदा होने वाले बच्‍चें और बिना जांच किया हुआ रक्‍त ग्रहण करने वाले व्यक्ति आदि में सबसे अधिक होता है । हमें ब्यूटी पार्लर और हजामत बनाते समय भी किसी और पर प्रयोग हुए ब्लेड का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए । एचआईवी-एड्स का बचाव ही इसका उपचार है । एचआईवी पोजिटिव व्‍यक्ति में 7 से 10 साल बाद विभिन्‍न बीमारिंयों के लक्षण पैदा हो जाते हैं जिनमें गले या बगल में सूजन भरी गिल्टियों का हो जाना, लगातार कई कई हफ्ते अतिसार घटते जाना, कई हफ्ते बुखार और खांसी का रहना, अकारण वजन का घटना, मूंह में घाव हो जाना और त्‍वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले ददोरे एवं चकते हो जाना इस बीमारी के कुछ लक्षण है । इस तरह के आयोजनों से छात्र-छात्राओं के मन तक अच्छे नैतिक सन्देश पहुँचते है और वे समाज की बेहतर सेवा कर पाते है ।

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