Friday, April 17, 2026
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बच्चों को सुरक्षित माहौल प्रदान करना हम सबकी जिम्मेवारी :- मीना शर्मा सदस्य बाल कल्याण समिति पानीपत

By LALIT SHARMA , in SOCIAL , at December 31, 2025 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT : जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पानीपत सचिव वर्षा शर्मा के निर्देशानुसार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाटल और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कृष्णपुरा में विद्यार्थियों को पर्यावरण और बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। जिसमें बाल कल्याण समिति की सदस्या मीना शर्मा ने बच्चों को जागरूक करते हुए उनके अधिकारों से अवगत करवाया। मीना शर्मा ने बच्चों को पॉक्सो, बाल विवाह और बाल श्रम के बारे में बताया और कहा कि कोई भी बच्चा बाल कल्याण समिति और चाइल्डलाइन नंबर 1098 की मदद ले सकता है। बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षित माहौल प्रदान करना हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर आज हमारे बच्चे स्वस्थ और सुरक्षित होंगे, तभी हम एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग से राष्ट्रीय किशोर किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रम जिला काउंसलर अतुल ने छात्र छात्राओं को किशोरावस्था के दौरान होने वाले परिवर्तनों व प्रदूषण से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान और बचाव के तरीकों से अवगत कराया। प्रधानाचार्य प्रदीप कुमार राणा ने पर्यावरण और बाल अधिकारों के महत्व पर जोर डालते हुए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने और कचरे पर रोक लगाने की सीख दी।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन सहयोगी संस्था एमडीडी ऑफ इंडिया से जिला समन्वयक संजय कुमार ने कहा कि पानीपत में साल 2025 में बाल संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हजारों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक कर शपथ दिवाई गई और 700 से ज्यादा परिवारों से बाल विवाह शपथ पत्र भरवाए, 252 बच्चों को बाल श्रम और भिक्षावृत्ति के चंगुल से मुक्त कराया गया है। बाल सुरक्षा व संरक्षण की दिशा में पानीपत के लिए 2025 एक बेहतरीन साल रहा जहां जिला प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सामुदायिक नेताओं के साथ करीबी समन्वय से काम करते हुए नागरिक समाज संगठन एम् डी डी ऑफ़ इंडिया ने 252 बच्चों को बाल श्रम से बचाया।
एम् डी डी ऑफ़ इंडिया देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है। जेआरसी के 250 से भी ज्यादा सहयोगी संगठन बाल अधिकारों की सुरक्षा व बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम के लिए देश के 451 जिलों में काम कर रहे हैं। बचाव, सुरक्षा व अभियोजन की रणनीति पर अमल करते हुए इस नेटवर्क ने 1 जनवरी 2025 से अब तक देश भर में 1,98,628 बाल विवाह रोके हैं। इसके अलावा, इसी दौरान देश भर से कुल 55,146 बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया गया जिनमें 40,830 लड़के व 14,316 लड़कियां थीं। इसके अलावा बच्चों की ट्रैफिकिंग के 42,217 मामले दर्ज कराए गए।
इन समन्वित कार्रवाइयों के नतीजे व असर के बाबत एम डी डी ऑफ़ इंडिया के निदेशक सुरेन्द्र सिंह मान ने कहा, “बाल सुरक्षा की दिशा में यह एक ऐतिहासिक साल रहा। जिला प्रशासन, पुलिस, ग्राम पंचायतों और शिक्षकों के साथ मिलकर हमने जमीन पर जो किया है, उससे आए बदलाव और नतीजे देखे जा सकते हैं। बच्चे समाज के सबसे संवेदनशील अंग हैं और हमें ये याद रखना चाहिए कि ट्रैफिकिंग के पीड़ित बच्चों को मुक्त कराना सिर्फ पहला कदम है। अगर हमें गरीबी, बाल मजदूरी और बाल विवाह के दुष्चक्र को तोड़ना है तो इसके लिए पुनर्वास, बच्चों का वापस स्कूलों में दाखिला और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर आर्थिक दृष्टि से संवेदनशील परिवारों की सहायता आवश्यक है।”
देश भर में फैले जेआरसी के सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर एम डी डी ऑफ़ इंडिया 2030 तक भारत से बाल विवाह के खात्मे, बाल मजदूरी, बाल विवाह या बाल वेश्यावृत्ति के इरादे से दूसरे जिलों व राज्यों में ले जाए गए बच्चों की पहचान व उन्हें मुक्त कराने के लिए जमीन पर काम कर रहा है। यह नेटवर्क रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) सहित सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय से काम करता है और नेटवर्क का विस्तार व इसकी पहुंच बच्चों को मुक्त कराने के लिए समय रहते हस्तक्षेप को आसान बनाती है।
अगर सभी धर्मों का पुरोहित वर्ग बाल विवाह संपन्न कराना बंद कर दे तो यह कुप्रथा अपने आप बंद हो जाएगी। इसलिए सभी धर्मों के तीन लाख से ज्यादा धार्मिक नेताओं को इस अभियान से जोड़ा गया है जो लोगों तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि बाल विवाह गैरकानूनी है और कोई भी धर्म इसकी मंजूरी नहीं देता। जिले में तमाम धार्मिक स्थलों ने बोर्ड लगाए हैं कि इस धार्मिक परिसर में बाल विवाह की स्वीकृति नहीं है। ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के तहत केंद्र सरकार के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान में जिला प्रशासन के साथ समन्वय के साथ एम् डी डी ऑफ़ इंडिया विवाह समारोहों में सेवाएं देने वालों और इसकी रोकथाम में अहम कड़ी जैसे टेंट वालों, बैंड वालों, दर्जियों, सजावट करने वालों व कैटरर्स के साथ बैठकें कर उन्हें जागरूक कर रहे हैं कि बाल विवाह में किसी भी प्रकार का सहयोग कानूनन अपराध है।

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