Monday, June 1, 2026
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लिंग अनुकूल वातावरण का अभाव देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों का मुख्य कारण है: डॉ नीलम आर्य(वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, फॉरेंसिक विभाग, मधुबन)

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 22, 2024 Tags: , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर (नेशनल इंटीग्रेशन कैंप) का दूसरा दिन

नि:स्वार्थ भाव से मानव सेवा करना सबसे बड़ा दैवीय गुण: डॉ प्रेरणा डावर, प्रोफेसर और निदेशक प्रशिक्षण, गीता इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ पानीपत

BOL PANIPAT , 22 अक्टूबर,   एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर (नेशनल इंटीग्रेशन कैंप) के दूसरे दिन बतौर मुख्य वक्ता डॉ प्रेरणा डावर प्रोफेसर और निदेशक प्रशिक्षण गीता इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ पानीपत और डॉ नीलम आर्य वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी फॉरेंसिक विभाग मधुबन (करनाल) ने शिरकत की और 17 राज्यों से आये स्वयंसेवकों को अपने ज्ञान और अनुभव का लाभ दिया । डॉ प्रेरणा डावर ने अपना व्याख्यान ‘व्यक्तित्व निर्माण और लक्ष्य निर्धारण’ और डॉ नीलम आर्य ने ‘फॉरेंसिक साइंस और साइबर फ्रॉड’ विषय पर दिया । कैंप समन्वयक डॉ आनंद कुमार कुरुक्षेत्र विश्वविधालय दोनों सत्रों का हिस्सा बने । मेहमानों का स्वागत प्रधान दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ तेनजिन नोर्जोम भूटिया, डॉ राम कुमार, डॉ शशीकला कुमारी, डॉ एन मंजू भार्गवी, डॉ प्रद्यानंद घनश्याम मते और डॉ परमिंदर कौर ने पौधा-रोपित गमला भेंट करके किया । मंच संचालन डॉ संतोष कुमारी ने किया । सात दिवसीय कैंप में के दूसरे दिन सभी स्वयंसेवकों ने प्रातः काल में योग और ध्यानशाळा में हिस्सा लिया और फिर नाश्ते के पश्चात कॉलेज प्रांगण की साफ़-सफाई की । 

सांयकालीन सत्र की सांस्कृतिक गतिविधियों में राजस्थान के घुमर, जम्मू और कश्मीर के दुमहल और गुजरात के गरबा नृत्य ने धूम मचा दी जिसे इन राज्यों से आयें एनएसएस स्वयंसेवको ने पेश किया । इसके साथ ही एनएसएस स्वयंसेवकों को ग्रुप्स में बांटा गया जिसमे प्रत्येक राज्य का एक स्वयंसेवक अवश्य था । भाषण और काव्य पाठ प्रतियोगिता में भी स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया ।     

डॉ नीलम आर्य वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, फॉरेंसिक विभाग मधुबन करनाल ने कहा कि लिंग अनुकूल वातावरण का अभाव ही देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों का मुख्य कारण है । फॉरेंसिक साइंस अपराध से जुड़ा विज्ञान है और इसमें अपराध का पता लगाने के लिए शरीर के तरल पदार्थो की जांच की जाती है । फॉरेंसिक रिपोर्ट को अदालत भी अहम साक्ष्य मानती है । देश-विदेश में बढ रही आतंकी घटनाओ और अपराधों ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग बढा दी है । आपराधिक वारदातों के सूत्रधारों की धर-पकड के लिए प्रशिक्षित सुरक्षा बलों की जरूरत आज समाज और समय की मांग है । इस साइंस का जानकार अपराध से जुडे लोगों को पकडवाने में काफी मददगार होता है । आतंकवादी गुत्थियां हों या रहस्यमय मौत, इसे सुलझाने में फॉरेंसिक साइंस की अहम भूमिका होती है । फॉरेंसिक साइंस अब विदेश में ही नहीं देश में भी लोकप्रिय होती जा रही है । इस क्षेत्र में बढती नौकरियों ने विद्यार्थियों को फॉरेंसिक साइंस का कोर्स करने के लिए प्रेरित किया है । इसकी पढाई करने वालों के लिए नौकरियों के कई विकल्प हैं. इसमें डिप्लोमा कोर्स से लेकर पीएचडी करने वालों के लिए हर स्तर पर नौकरी के अवसर है । एक अच्छे फॉरेंसिक एक्सपर्ट का स्वभा  जिज्ञासु, उसकी कानून-व्यवस्था पर आस्था, उसमे सटीकता का गुण, तार्किक, व्यावहारिक, व्यवस्थित दृष्टिकोण तथा उसमे वैज्ञानिक विश्लेषण की क्षमता होनी चाहिए । फॉरेंसिक साइंस में प्राप्त शिक्षा के आधार पर हम अध्यापक, फॉरेंसिक इंजीनियर, जेनेटिक एक्सपर्ट, फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट, फॉरेंसिक साइंटिस्ट, फॉरेंसिक इंवेस्टिगेटर, सिक्योरिटी एक्सपर्ट, फॉरेंसिक कंसलटेंट, डिटेक्टिव आदि महत्वपूर्ण पदों पर नौकरियां पा सकते है ।

डॉ प्रेरणा डावर, प्रोफेसर और निदेशक प्रशिक्षण, गीता इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ पानीपत ने कहा कि नि:स्वार्थ भाव से मानव सेवा करना एक दैवीय गुण है और कैंप में उपस्थित सभी एनएसएस कार्यकर्ता बधाई के पात्र है कि उन्होनें युवा अवस्था में ही इस गुण को अपनाया है । जीवन में किसी लक्ष्य का होना अत्यंत जरुरी है । किसी भी ऐसी धारणा को जो हमारे मन में किसी व्यक्ति के प्रति उसका सदभाव, हितैषिता, सत्यता, दृढ़ता आदि अथवा किसी सिद्धांत आदि की सत्यता अथवा उत्तमता का ज्ञान होने के कारण होती है ही हमारा विश्वास है । आत्मविश्वास से ही हमें अपने विचारों की स्वाधीनता प्राप्त होती है और इसके कारण ही महान कार्यों के सम्पादन में सरलता और सफलता मिलती है । इसी के द्वारा आत्मरक्षा होती है । जो व्यक्ति आत्मविश्वास से ओत-प्रोत है उसे अपने भविष्य के प्रति किसी प्रकार की चिन्ता नहीं रहती है । हमें खुद को प्रेरित करने के लिए अपने हर लक्ष्य के प्राप्त करने के उपरान्त खुद को पुरस्कृत करना चाहिए । हमें हर रोज़ अपने जीवन दिन दिनचर्या की योजना बनाकर उस को क्रियान्वित करना चाहिए । याद रहे कि कभी-कभी दृढ़ निश्चयी लोग भी अपना उत्साह खो देते है और ऐसे में थोड़ा आराम और ध्यान बड़ा लाभकारी सिद्ध होता है । हमें अपनी किसी भी हार से डरना नहीं चाहिए क्यूंकि हर व्यक्ति ने कभी न कभी असफलता का स्वाद जरुर चखा होता है । हमारे जीवन में जो कुछ भी अच्छा है हमें उसके लिए शुक्रगुजार रहना सीखना होगा क्योंकि ऐसा करने से हमारा ध्यान सकारात्मक रहता है और दिमाग में नकारात्मक ख्याल नहीं आते है । हमें सकारात्मक सोच रखने वाले लोगों के साथ रहना चाहिए । जैसी हमारी संगति होगी वैसी ही हमारी सोच बन जाती है ।

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि वर्तमान में व्याप्त समयाओं से निपटने की अगुआई महिलाओं ने की है । शिक्षित महिला परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण के दायित्वों का सबसे संतुलित एवं श्रेष्ठ मार्ग है । छात्राओं को चाहिए कि वे अपने अधिकारों का निरंतर और बेखौफ तरीके से प्रयोग करे और अपने घर मे भी अपने भाइयो को सिखाये कि वे जीवन मे महिलाओं का सम्मान करे तथा समाज में उन्हे उनका उचित स्थान दिलवाने में मदद कर सके ।  

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