एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में महात्मा गाँधी और लाल बहादुर शास्त्री जयंती को साम्प्रदायिक सदभावना दिवस के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया
स्वावलंबी भारत अभियान के माध्यम से ही देश का आर्थिक सशक्तिकरण संभव: दत्तात्रेय होसबोले, सरकार्यवाह आरएसएस
कॉलेज एनएसएस इकाइयों और यूथ रेड क्रॉस सोसाइटी के तत्वाधान में हुआ भाषण प्रतियोगिता और स्वच्छता अभियान का आयोजन
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में महात्मा गाँधी और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के शुभ अवसर को राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सदभावना दिवस के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता दत्तात्रेय होसबोले, सरकार्यवाह आरएसएस रहे जिन्होनें अपने ऑनलाइन भाषण के माध्यम से स्वावलंबी भारत अभियान के द्वारा भारत के आर्थिक सशक्तिकरण पर बल दिया और बताया की यह अभियान युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता की ओर अग्रसर करता है. उनके साथ सतीश कुमार राष्ट्रीय सह-संगठक स्वदेशी जागरण मंच एवं संयोजक स्वदेशी जागरण मंच, भगवती प्रकाश कुलपति गौतम बुद्ध विश्वविधालय नोएडा, नवीन सुनेजा डिप्टी सीएमओ पानीपत, डॉ अर्चना गुप्ता भाजपा जिला अध्यक्ष पानीपत, स्वदेशी जागरण मंच से महेश थरेजा, विजेंद्र अत्री एवं संयोजक विक्रम चावला बतौर अतिविशिष्ट मेहमान विमर्श में उपस्थित रहे. मुख्य वक्ता का स्वागत एवं परिचय प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने किया जो स्वयं स्वदेशी जागरण मंच के सदस्य भी है. उनके साथ कॉलेज एनएसएस यूनिट्स के अधिकारी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी और लगभग 200 एनएसएस कार्यकर्ता मौजूद रहे. कार्यक्रम कॉलेज एनएसएस इकाइयों और यूथ रेड क्रॉस सोसाइटी के तत्वाधान में हुआ जिसमे भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया. कार्यक्रम में एनएसएस के युवा कार्यकर्ताओं ने प्राचार्य अनुपम अरोड़ा के माध्यम से साम्प्रदायिक सदभावना की शपथ ली और फिर कॉलेज में साफ़-सफाई कर गाँधी जी के आह्वान को सफल बनाया. इस अवसर पर माननीय मुख्य अतिथि ने ‘माई एसबीए’ के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी जो की स्वावलंबी भारत अभियान का डिजिटल स्वरूप है. अंत में ‘एकता और अखंडता’ का भाव लिए एवं सामाजिक समरसता से औत्प्रौत युवा कार्यक्रताओं ने रैली निकाली और समाज में शान्ति और भाईचारे का सन्देश दिया.

दत्तात्रेय होसबोले, सरकार्यवाह आरएसएस ने अपने सन्देश में कहा की कोई भी युवा चाहे वो एनएसएस से जुड़ा हो या फिर साधारण विद्यार्थी हो वह ‘माई एसबीए’ का वालंटियर बन कर पूर्ण रोजगार युक्त, स्वावलंबी एवं सशक्त भारत के निर्माण में अपना सहयोग कर सकता है. हर युवा अपने समय, संसाधन एवं इच्छाशक्ति के अनुरूप अपना योगदान देने के लिए डिजिटल माध्यम से किसी भी प्रकार का कार्यकर्ता बन सकता है और इस अभियान का प्रचार-प्रसार कर सकता है. उसे बस अपनी स्थानीय परियोजनाओं की पहचान करके उन्हें बढ़ावा देना है. ऐसा वह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकता है. ऐसा करने से वह अधिक से अधिक युवाओं को इस अभियान से जोड़ पायेगा. वर्तमान सरकार ने शुरू से ही युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने हेतु और उनके कौशल विकास की दिशा में सक्रिय कदम उठाने प्रारंभ कर दिये थे. आज उसी का परिणाम है कि सरकार की कौशल विकास योजनाओं का लाभ लेकर अनेक युवा अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू कर चुके है और अनेकों युवाओं में अपना रोजगार स्थापित करने की ललक जाग उठी है. कौशल एक अनमोल खजाना है और इसे राष्ट्रीय आवश्यकता के रूप में परिभाषित करने की जरुरत है तभी आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हो पायेगा. कौशल अर्जित करके न केवल रोजगार प्राप्त किया जा सकता है बल्कि इससे स्वयं को जीवंत और ऊर्जावान भी किया जा सकता है. उन्होनें कहा की उद्यमिता, कौशल विकास और सहकारिता से ही देश स्वावलंबी बन सकता है.

सतीश कुमार अखिल भारतीय सह-संगठक स्वदेशी जागरण मंच एवं संयोजक स्वदेशी जागरण मंच ने अपने संदेह में कहा की स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता और अपना काम स्वयं करना जैसे गुण सबसे सर्वोत्तम है. हम सब को अपने घरों में और बाहर प्रत्येक काम स्वयं करने का प्रयास करना चाहिए. कहा भी गया है की जो व्यक्ति स्वयं अपना काम कर सकता है वही दूसरों की सहायता कर सकता है. स्वावलंबी व्यक्ति को ही सुख, शांति और धन-वैभव प्राप्त होता है और ऐसा करने से हमारा समाज, प्रदेश और देश मजबूत होगा. आज जरुरत ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुटीर उद्योग को मजबूत करने की है ताकि लोग नौकरी मांगने वाले की बजाये नौकरी देने वाले बने. गाँव मजबूत होंगे तो देश मजबूत होगा.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा जहाँ एक और महात्मा गाँधी जी देश के राष्ट्रपिता है तो वही लाल बहादुर शास्त्री जी देश का गौरव एवं मान है. गाँधी जी ने सत्य और अहिंसा के सहारे विश्व को शान्ति का मार्ग दिखाया. लाल बहादुर शास्त्री जी ने सादा जीवन उच्च विचार का दर्शन हर व्यक्ति को सिखाया. दोनों महापुरुष आज भी हम सभी के लिए अनुशरणीय है. गांधी जी चाहते थे कि भारत में एक समाज का निर्माण हो जहां सभी लोग बराबर हो और किसी के बीच किसी भी प्रकार का कोई मतभेद न हो. आज हम गांधी जी के विचारों को अपनाकर अपने भविष्य को संवार सकते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं. आज के विशेष दिन हमें यह शपथ लेनी चाहिए कि हम सदैव उनके विचारों को अपने जीवन में उतार कर सफलता प्राप्त करेंगे और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करेंगे. गांधी जी केवल युवाओं के लिए ही प्रेरणाश्रोत नहीं थे बल्कि दुनिया भर के महान व्यक्तित्वों के लिए भी मार्गदर्शक बने. मार्टिन लूथर किंग, नेल्सन मंडेला, जेम्स लॉसन, अल्बर्ट आईन्स्टीन जैसे कितने ही व्यक्तित्व महात्मा गांधी के विचारों के कायल हुए.
डॉ राकेश गर्ग एनएसएस अधिकारी ने लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व, जीवन दर्शन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा की बचपन में शास्त्री जी के पास स्कूल जाते वक्त नदी पार करने के लिए पैसे नहीं होते थे इसलिए वह तैराकी करके स्कूल जाते थे. ‘जय जवान जय किसान’ का नारा देकर उन्होनें भारत के भविष्य को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. स्वतंत्रता संग्राम में शास्त्री जी गांधी जी के साथ जेल भी गए और उस समय उनकी उम्र मात्र 17 साल थी. आजादी के बाद बतौर परिवहन मंत्री उन्होंने सार्वजनिक परिवहन में महिला ड्राइवरों और कंडक्टरों के प्रावधान की शुरुआत की. अपनी शादी में दहेज के रूप में उन्होंने केवल खादी का कपड़ा और चरखा स्वीकार किया. भारत में खाद्य उत्पादन की मांग को बढ़ावा देने के लिए ‘हरित क्रांति’ और दूध के उत्पादन को बढाने के लिए ‘श्वेत क्रान्ति’ के जनक शास्त्री जी थे. उन्होंने ही राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड बनाया और गुजरात में अमूल दूध सहकारी का समर्थन किया. शास्त्री जी दहेज प्रथा और जाति व्यवस्था के खिलाफ बहुत मुखर रहे और इनका उन्होनें घोर विरोध किया. ऐसे महान सपूत और आदर्श व्यक्तित्व को हमारा शत-शत नमन.
भाषण प्रतियोगिता के परिणाम –
प्रथम सौरभ बीकॉम- द्वितीय
द्वितीय ख़ुशी बीकॉम- तृतीय
तृतीय विकास बीए- द्वितीय

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