वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कविकर जयशंकर प्रसाद विषय पर विचार संगोष्ठी का आयोजन
BOL PANIPAT : आई. बी.स्नातकोत्तर महाविद्यालय पानीपत में क्लास गतिविधि के अंतर्गत एक विचार संगोष्ठी का आयोजन डॉ. शर्मिला यादव के मार्गदर्शन में किया गया | इस गोष्ठी का विषय “कविकर जयशंकर प्रसाद वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रहा | कॉलेज प्राचार्य डॉ. अजय कुमार गर्ग ने कहा कि साहित्य कभी भी पुरातन नहीं होता, समाज की संवेदनाओ में मानव निर्माण की प्रक्रिया में साहित्य ही मानवीय मूल्यों को सजीवता देता है | समाज में व्यक्ति को दया, ममता, करुणा मानवता आदिभाव साहित्य से ही हमें प्राप्त होते है |
इस कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. शर्मिला यादव ने बताया कि कविवर जयशंकर प्रसाद के शैवदर्शन के 33 वें तत्व ‘नियंतिवाद से हमें यह यह ज्ञात होता है कि मनुष्य के सभी दु:खो का कारण उसका भोगवादी प्रवृति में लिप्त होना है | हमें अपनी इच्छाओं को सीमित रखना चाहिए ताकि जीवन में हमें कष्ट का अनुभव कम हो सके | सुख-दुःख सभी समान भाव से ग्रहण करने की प्रवृति मनुष्य की होनी चाहिए क्योंकि समाज के कल्याणकारी स्वरुप के लिए यह अति आवश्यक है | इस विचार गोष्ठी में 15 विद्यार्थियों ने भाग लिया | जिसमे प्रथम स्थान – ख़ुशी, द्वितीय स्थान – संजू एवं तृतीय स्थान – वंशिका ने प्राप्त किया |

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