Monday, June 15, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में भारत-तिब्बत समन्वय संघ का राष्ट्रीय कार्यक्रम एवं विमर्श

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 30, 2022 Tags: , , , ,

भारत-तिब्बत अन्तर्सम्बन्ध राष्ट्रीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का उत्कृष्ट प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित

मुख्य अतिथि: प्रो सुमित्रा कुकरेती, प्रो-वाईस चांसलर, इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली

तिब्बत की आजादी में ही भारत की सुरक्षा निहित है: प्रो सुमित्रा कुकरेती प्रो-वाईस चांसलर इंदिरा गाँधी ओपन यूनिवर्सिटी नई दिल्ली

देश के साहित्य और संस्कृति को तिब्बत ने संजोया है: विजय मान, राष्ट्रीय महामंत्री भारत-तिब्बत समन्वय संघ

बौद्धअध्यात्म के साथ कैलाश का सह-अस्तित्व हमें गौरवबोध कराता है: प्रोबैज राम पूर्व डीन, रूहेलखंड विश्वविधालय बरेली

BOL PANIPAT : 30 अक्टूबर 2022, पानीपत,     एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में भारत-तिब्बत समन्वय संघ के एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम एवं विमर्श का आयोजन किया गया जिसमे भारत-तिब्बत समन्वय संघ  (बीटीएसएस) के केन्द्रीय, क्षेत्रीय और प्रांतीय नेतृत्व के उच्च अधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया. एक दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन को तिब्बत की संस्कृति,वहांके वैचारिक भावों और रीति-रिवाजों से अवगत कराना है ताकि देश के लोगों को पता चले कि कैसे तिब्बत भारत काएक अटूट हिस्सा रहा है पर पिछले 7-8 दशकों से चीन ने इस पर जबरदस्ती अतिक्रमण किया हुआ है. एक दिवसीय कार्यशाला और चिंतन शिविरमें बीटीएसएस के भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा, कार्यप्रणाली और परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई. विदित रहे की भारत-तिब्बत समन्वय संघ(बीटीएसएस) के स्वरूप का अंकुरण राष्ट्रीय स्वंयसेवक के चतुर्थ सर-संघचालक परम् पूजनीय प्रो राजेन्द्र सिंह उपाख्य रज्जू भैया जी के ह्रदय से प्रारंभ हुआ.2001 में स्थापित इस संघ का उद्देश्य देश के लोगों की वैचारिक शक्ति को मजबूत करना है ताकि तिब्बत की आजाज़ी के लिए एक दूसरा अहिंसात्मक स्वतंत्रता संग्राम देश में पैदा हो.राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम कीमुख्य अतिथिप्रो सुमित्रा कुकरेती प्रो-वाईस चांसलर इंदिरा गाँधी ओपन यूनिवर्सिटी नई दिल्ली रही.वरिष्ठ समाजसेवी और बीटीएसएस के राष्ट्रीय महामंत्री विजय मान ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. नामग्याल सेकी पूर्व एडवाइजर एवं ज्यूरी, सुप्रीम जस्टिस कमीशन, तिब्बत सरकार एवं बीटीएसएस की महिला विभाग की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बतौर सारस्वत मेहमान आयोजन में भाग लिया. इस अवसर पर विशिष्ट अतिथिगण में प्रो बीआर कुकरेती प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं पूर्व डीन, रूहेलखंड विश्वविधालय बरेली, नरेंद्र चौहान प्रतिष्ठित समाजसेवी मेरठ एवं बीटीएसएस के पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रभारी, फ़क़ीर चन्द चौहान पूर्व बैंक अधिकारी एवं बीटीएसएस उत्तर क्षेत्र के मुख्य संयोजक, संध्या सिंह वरिष्ठ समाजसेवी दिल्ली, डॉ वीरेंद्र चौहान डिप्टी चेयरमैन एंड डायरेक्टर हरियाणा ग्रन्थ अकादमी पंचकुलाऔर डॉ सीताराम चौधरी प्राचार्य जयपुर महाविधालय ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई. माननीय मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ाने पुष्प-रोपित गमले भेंट कर किया. इस अवसर पर तेजस चतुर्वेदी और कुणाल यादव राष्ट्रीय युवा मंत्री दिल्ली, देवेन्द्र प्रताप असीजा पूर्व-प्राचार्य सोहन लाल डीएवी कॉलेज अम्बाला सिटी, यमुनानगर सेडॉ हरीश चन्द्र झंडई, कुरुक्षेत्र से रेणु खुग्गर और डॉ अर्चना शर्मा, सत्य प्रकाश पुनिया एएसआई राजस्थान पुलिस, मंजुला प्रांत मंत्री दिल्ली, शकुंतला शर्मा वरिष्ठ भाजपा नेता, सुधीर डांडा की उपस्थिति उल्लेखनीय रही. मंच संचालन डॉ रुकमेश चौहान, सुमन सांगवान और ममता राणा ने किया. मेहमानों का परिचय प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने दिया. इस अवसर पर कॉलेज एन एस एस अधिकारी डॉ राकेश गर्ग और डॉ एसके वर्मा भी एनएसएस कार्यकर्ताओं के साथ उपस्थित रहे.

     इस अवसर पर क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित भी किया गया.प्रथम स्थान कुरुक्षेत्र की ममता, दूसरा स्थान करनाल की नीरू देवी और तीसरा स्थान कैथल के विश्वजीत ने हासिल किया. इसके अलावा करनाल से सूर्यप्रताप और तेजस्वी, कैथल से तनुज, एसडी पीजीकॉलेज पानीपत से तानिया, भिवानी से आरती, कुरुक्षेत्र से याशिका,शौर्य सांगवान और अंबर बत्रा, अम्बाला से इंदु, फतेहाबाद से प्रीती, यमुनानगर से सुमित चौधरी, जींद से हितेश, रोहतक से अन्नू, चरखीदादरी से वर्षा, और रेवाड़ी से सुनील यादव ने भी क्विज प्रतियोगिता में सर्वोत्तम अंक पाकर सम्मान हासिल किया. क्विज में भारत और तिब्बत के संबंधों, संस्कृति और साहित्य पर आधारित 50 बहुविकल्पी प्रश्न पूछे गए थे. 80 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

मुख्य अतिथि प्रो सुमित्रा कुकरेती प्रो-वाईस चांसलर इंदिरा गाँधी ओपन यूनिवर्सिटी नई दिल्ली ने अपने भाषण में कहा कि तिब्बत की आजादी में ही भारत की सुरक्षा निहित है. बीटीएसएस का मुख्य उद्देश्य कॉलेजऔर विश्वविधालय के युवाओं को बीटीएसएस के माध्यम से तिब्बत और इसके महत्त्व के बारे में उनको जागरूक करना है. युवाओं की बातें वैसे भी सभी मानते है. ऐसे में आने वाली पीढियों को वे बेहतर ढंग से समझा पायेंगे की कैसे तिब्बत का भारत के साथ होना अत्यंक जरुरी है.

विजय मान वरिष्ठ समाजसेवी और बीटीएसएस के राष्ट्रीय महामंत्री नेअपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि देश के साहित्य और संस्कृति को तिब्बत ने ही संजोया है. तिब्बत भगवान भोलेनाथ का मूल निवास स्थान है और उसे चीन के आधिपत्य से मुक्त कराना हम सभी का सामूहिक प्रयास होना चाहिए. यहीप्रयास बीटीएसएस ने शुरू किया है. ‘भारतमाता’ के प्रति हमारी सच्ची श्रधान्जली यही होगी जब हम अपने देश की पारंपरिक सरहदोंको पुन: हासिल कर लेंगे. 1962 को संसद में लिए गए संकल्प को बीटीएसएस के प्रयासों ने पुनर्जीवित किया है. अब हम सभी का यह फ़र्ज़ बनता है कि हम तिब्बत और कैलाश मानसरोवर की मुक्ति के लिए ह्रदय से प्रयास करे.

फ़क़ीर चन्द चौहान पूर्व बैंक अधिकारी एवं बीटीएसएस उत्तर क्षेत्र के मुख्य संयोजक ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य बीटीएसएस की गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाना है. बेशक तिब्बत मुक्ति का रास्ता आसाननहीं है परन्तु यह नामुमकिन भी नहीं है. इतिहास गवाह है कि जन-मानस की शक्ति के आगे कोई भी टिक नहीं पाया है. यदि देश का हर युवा भारत और तिब्बत के गौरवपूर्ण इतिहास को अच्छे से मनमें उतार ले तो जीत मिलना निश्चित है.

प्रो बीआर कुकरेती प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं पूर्व डीन, रूहेलखंड विश्वविधालय बरेली ने अपने भाषण में कहा कि “भारत-तिब्बत समन्वय संघ” (बीटीएसएस) के स्वरूप का अंकुरण राष्ट्रीय स्वंयसेवक के चतुर्थ सर-संघचालक परम् पूजनीय प्रो राजेन्द्र सिंह उपाख्य रज्जू भैया जी के ह्रदय से प्रारंभ हुआ. वे सैदेव कहते थे की तिब्बत की भूमि कल्याण और भलाई की भूमि है क्योंकि बौद्ध-अध्यात्म के साथ कैलाश का सह-अस्तित्व हमें गौरव-बोध कराता है.

डॉरुकमेश चौहान उत्तर क्षेत्रीय महामंत्री बीटीएसएस ने कहा कि रुक्मेश समय आ गया है कि अब हम तिब्बतियों को साथ ले और समग्र रणनीति बना कर तिब्बत को वापिस वही स्थान और गौरव दिलाये जिसका तिब्बत हकदार है. भारत तिब्बत समन्वय संघ का मुख्य उद्देश्य तिब्बत की स्वतंत्रता, भारत की सुरक्षा और कैलाश-मानसरोवर की मुक्ति को प्राप्त करना है.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि यदि महात्मा गाँधी और अन्य क्रांतिकारी अहिंसा के मार्ग पर चल कर देश को अंग्रेजो से मुक्त करा सकते है तो तिब्बत की मुक्ति भी बिलकुल संभव है. बात सिर्फ विचार की है. विचार बड़ा होना चाहिए साधन अपने आप बनते चले जाते है. भोलेनाथके मूल निवास को स्वतन्त्र कराना हम सभी का ध्येय होना चाहिए.

इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ जुगमती सांगवान, प्रो कविता, प्रो किरण मलिक,प्रो सुनील कुमार, प्रो मीतु सैनी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे.

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