भरत जैसा त्याग आज तक किसी ने नहीं किया – स्वामी दयानन्द सरस्वती
BOL PANIPAT : भरत जैसा चरित्र रामायण में न कोई हुआ है न कोई होगा। भाई से भाई के प्रेम की अद्भुत मिसाल जो श्री रामचरितमानस में हैं वह कहीं नहीं मिल सकती। यह आशीर्वचन स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज जी ने हुडा सैक्टर 11 स्थित श्री रामकृष्ण मंदिर के 25वें वार्षिकोत्सव के सत्संग कार्यक्रम में देते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि भरत जी ने भाई प्रेम के लिए उनकी खड़ाऊँ को राजगद्दी पर विराजित किया। एवं उन्हीं से आज्ञा लेकर राजकाज के कार्य करते रहे।
श्री महाराज जी ने कहा जब जब कुछ देने की बात आएगी तब तब रामायण का बोध होगा एवं जब जब लेने की बात होगी तब तब महाभारत होगी। श्री राम जी ने कहा हे भरत, आप मुझे श्री हनुमान जी के समान प्रिय हो। इससे पूर्व स्वामी शेषनारायण शास्त्री जी ने बहुत ही सुन्दर भाव से हरिनाम संकीर्तन ‘हम हाथ उठाकर कहते हैं, हम हो गए राधारानी के’ गाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। पं. शिवनरेश शास्त्री जी ने ज्योत प्रज्ज्वलित करवाई। मंच संचालन कैलाश नारंग ने किया। कार्यक्रम के प्रधान ओम प्रकाश चौधरी, सुभाष गर्ग, विकास जुनेजा, गणेश दास चावला, सतपाल चानना, रमेश रहेजा, रवि गांधी, कुन्दनलाल अशोक रेवड़ी, सुभाष चन्द रेवड़ी, बाल मुकुन्द, रामनिवास सिंगला, आदि उपस्थित रहे कथा पश्चात भण्डारा किया गया।

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