एस.डी. (पी.जी.) कॉलेज पानीपत में स्वामी विवेकानंद जयंती के शुभ अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस सार्थकता के साथ मनाया गया
–स्वदेशी संकल्प दौड़ में सैकड़ों विद्यार्थियों ने 5 किलोमीटर दौड़ में लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा
–देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने में स्वदेशी का अतुल्य महत्व है : चंद्रशेखर
–स्वदेशी भारत की अर्थव्यवस्था का संकटमोचक उपाय है : अनुपम अरोड़ा
–आत्मनिर्भर भारत हेतु स्वदेशी एकमात्र विकल्प : दिनेश गोयल
BOL PANIPAT : 12-01-2026, एस.डी. (पीजी) कॉलेज पानीपत में स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस सार्थकता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्वदेशी संकल्प दौड़ का सफल आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ो विद्यार्थियों ने 5 किलोमीटर की स्वदेशी संकल्प दौड़ में हिस्सा लेकर देश के प्रति अपने भावों को अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम में स्वावलंबी भारत अभियान के जिला संयोजक चंद्रशेखर, स्वदेशी जागरण मंच से विक्रम चावला जितेंद्र गुप्ता, जिला संयोजक, स्वदेशी मेला प्रमुख सुनील ग्रोवर पूर्व कार्यकर्ता अजय अंतिल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे व कार्यक्रम के आयोजन में उनका सहयोग रहा। यह दौड़ कॉलेज प्रांगण से शुरू हुई और शहर के कई हिस्सों में घूम कर जनमानस को प्रेरित करती गई। असल में स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग ने सिर्फ हमारी संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखने में सहायक है। बल्कि यह हमारे देश की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करता है। दौड़ के पश्चात कॉलेज में स्वदेशी संकल्प सभा का आयोजन किया गया। जिसमें प्राध्यापकों ओर विद्यार्थियों ने स्वदेशी अपनाने की शपथ ली। विदित रहे की कॉलेज में वर्षों से स्वामी विवेकानंद केंद्र स्थापित है और प्रत्येक वर्ष स्वामी विवेकानंद जयंती को आदर और गंभीर भाव के साथ मनाया जाता है।
कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल व कॉलेज महासचिव महेंद्र अग्रवाल ने स्वदेशी जागरण मंच से आए अधिकारियों का स्वागत किया।
स्वावलंबी भारत अभियान, जिला संयोजक, चंद्रशेखर ने कहा कि स्वदेशी देश को बाहरी निर्भरता से मुक्त करता है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करता है। यह भारतीयों में स्वाभिमान और एकता की भावना जगाता है, जैसा कि 1905 के स्वदेशी आंदोलन में देखा गया था। घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने से उनमें प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होता है। विदेशी वस्तुओं का आयात कम होने से देश की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बचती है। स्वदेशी आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसे 1905 के बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू किया गया था। महात्मा गांधी ने इसे ‘स्वराज की आत्मा’ कहा था। आज के वैश्वीकरण के दौर में भी स्वदेशी का महत्व बढ़ गया है, क्योंकि यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों का आधार है, जो भारत को एक वैश्विक शक्ति बनाने के लिए आवश्यक है।
प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, आत्मनिर्भरता बढ़ाने, रोजगार पैदा करने और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने में है। स्वदेशी अपनाने के बहुत महत्व है। यह अपने देश में बने उत्पादों (Made in India) के उपयोग पर जोर देता है, जिससे स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को प्रोत्साहन मिलता है और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम होती है, जिससे देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति होती है। स्वदेशी का शाब्दिक अर्थ ‘अपने देश का’ या ‘अपने देश में निर्मित’ है। इसका मतलब है अपने देश में बने उत्पादों, तकनीकों और विचारों को अपनाना और विदेशी सामानों का बहिष्कार करना। स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी से पैसा देश के भीतर रहता है, जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और व्यापार घाटा कम होता है। यह स्थानीय उद्योगों और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देता है, जिससे अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। वर्तमान में वैश्विक परिदृश्य में जब अमेरिका के टैरिफ के कारण अर्थव्यवस्था पर दबाव आ रहा है। इसके अतिरिक्त भारत के अनेक पड़ोसी राष्ट्रों से मित्र संबंध नहीं है। राष्ट्र की स्थिरता, सुदृढ़ता, अर्थव्यवस्था के लिए स्वदेशी उपयोग, स्वदेशी उत्पाद, स्वदेशी खपत और स्वदेशी अनुसंधान भारत को आत्मनिर्भर बनाने में एक मिल का पत्थर साबित होंगे।
स्वदेशी जागरण मचं, विक्रम चावला ने स्वावलंबी भारत पर बोलते हुए कहा कि एक ऐसा राष्ट्र जो अपनी ज़रूरतों के लिए आत्मनिर्भर हो, बाहरी सहायता पर निर्भरता कम करे, और आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त हो। जिसमें मुख्य रूप से उद्यमिता, स्वरोजगार, स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग और स्थानीय संसाधनों पर जोर दिया जाता है। जिसे “स्वावलंबी भारत अभियान” के तहत बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत देश को हर क्षेत्र (रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी) में आत्मनिर्भर बनाना, जैसा कि प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया है। यह युवाओं को उद्यमी बनाने और उन्हें रोज़गार के अवसर प्रदान करने के लिए प्रेरित करता है। स्वदेशी और स्थस्वदेशी उत्पादों को अपनाने और बढ़ावा देने पर जोर, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है।
इस अवसर पर डॉ. संतोष कुमारी, डॉ. मोनिका खुराना, डॉ. रवि कुमार, डॉ. राहुल जैन, डॉ. दीपा वर्मा, प्रो. मनोज कुमार, प्रो. आशीष गर्ग, आदि स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।

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