Friday, April 24, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की सात होनहार खिलाड़ियों के बूते पर कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र ने किया आल इंडिया इंटरयूनिवर्सिटी खो-खो (महिला) चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL SPORTS , at December 21, 2023 Tags: , , , , ,

-सातों खिलाड़ी नेशनल मैडल से भी हो चुकी है सम्मानित

-असीमित ऊर्जा, तंदुरुस्ती और कौशल पाने के लिए युवाओं को खो-खो के खेल को अपनाना चाहिए: डॉ अनुपम अरोड़ा

BOL PANIPAT , 21 दिसम्बर, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की बीए तृतीय वर्ष की खिलाड़ियों अन्नू, निकिता, मनीषा, साक्षी, ऋतु, अंजली और निशा के बेहतरीन खेल के दम पर कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र ने आल इंडिया इंटरयूनिवर्सिटी खो-खो (महिला) चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया है । कुरुक्षेत्र विश्वविधालय की टीम ने इलाहबाद विश्वविधालय को 3-7, सोबन सिंह जीना विश्वविधालय अल्मोड़ा को 1-9, हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी शिमला को 5-7, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला को 3-8 और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी को पराजित किया । विश्वविधालय की जीत में कॉलेज की सातों खो-खो खिलाड़ियों, जो सभी नेशनल मेडलिस्ट भी है, का योगदान शानदार रहा । विजेता खिलाड़ियों का कॉलेज प्रांगण में आगमन पर स्वागत प्रधान दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ सुशीला बेनीवाल, डॉ एसके वर्मा, प्रो रजनी, कोच अंकुश मलिक, ग्राउंड्स मैन प्रताप और अन्य प्राध्यापको ने किया । कॉलेज की छात्रा खिलाड़ियों अन्नू, निकिता, मनीषा, साक्षी, ऋतु, अंजली और निशा ने बुद्धिमानी, कौशल और तेज गति के समन्वय से शानदार खेल दिखाकर सभी टीमों पर दबदबा बनाकर रखा । विदित रहे कि अकसर ऐसा संयोग कम ही देखने को मिलता है जब विश्वविधालय की टीम में एक ही कॉलेज से इतने खिलाड़ी चुने जाएँ । यह कॉलेज लिए गर्व का विषय है ।

प्रधान दिनेश गोयल ने अपने बधाई सन्देश में कहा कि कॉलेज के खिलाड़ियों ने नियमित जीत के परचम लहरा रखे है जिस पर उन्हें गर्व है । खिलाड़ियों को कॉलेज प्रशासन इसी प्रकार से सुविधाएं देता रहेगा ताकि वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित कर सके । खो-खो को खेलने से पूरा शरीर तंदुरुस्त रहता है और साथ ही हमारी सोचने-समझने की शक्ति भी बढ़ती है । इस खेल को खेलने के बाद एकाग्रता में भी वृद्धि होती है जो हमारे अध्यन में मददगार है ।

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि खो-खो के खेल में किसी प्रकार की अन्य वस्तुओं की आवश्यकता नहीं पड़ती है इसलिए सभी वर्ग के छात्र-छात्राएं इस खेल में भाग ले सकते है । यह भारत का सबसे पुराना और ख़ास तौर पर ग्रामीण इलाकों में बहुत लोकप्रिय खेल है । खो-खो का खेल खुले मैदान में खेला जाता है जिससे हमारा शरीर चुस्त और तंदुरुस्त बना रहता है । इस खेल को खेलने के बाद हमारे शरीर में किसी भी प्रकार का आलस्य नहीं रहता है । यदि हम भरपूर ऊर्जा, तंदुरुस्ती और कौशल खुद में पैदा करना चाहते है तो खो-खो इसके लिए सबसे उचित खेल है । अन्नू, निकिता, मनीषा, साक्षी, ऋतु, अंजली और निशा पर उन्हें नाज़ है ।

डॉ सुशीला बेनीवाल शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष ने कहा कि भारत देश विभिन्न परंपरागत खेलों को खेले जाने के लिए सदा विख्यात रहा है और हमारे ये खेल ऐसे है जिनमें किसी भी प्रकार की धनराशि और साजो-सामान की जरूरत नहीं होती है । इसे हर वर्ग के बच्चे खेल सकते है । कंप्यूटर और मोबाइल की वजह से बच्चे ऐसे खेलों में कम रूचि ले रहे है और इसी कारण उनका विकास रुक रहा है और मांसपेशियां मजबूत नहीं हो पा रही है । बीमारियों का पनपना भी इसीलिए संभव हो रहा है कि अब हम खेलने से बचने लगे है । लोगों और अभिभावकों को भी इस बात को समझना चाहिए कि हमारे जीवन में खेलों का कितना बड़ा महत्व है । हमारे देश में मुख्य रूप से हॉकी, कबड्डी और खो-खो खेले जाते है । ये सारे खेल ऐसे है जिनसे हमारा पूर्ण शारीरिक विकास होता है । खो-खो खेलने से हमारा स्वभाव कभी भी चिड़चिड़ेपन का शिकार नहीं होता है ।

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