Friday, April 17, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में नेशनल टेक्नॉलजी डे पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at May 11, 2022 Tags: , , , ,

डॉएपीजे अब्दुल कलाम,डॉ होमी जहाँगीर भाभा, डॉ राजा रामन्नासमेत भारत के सभीवैज्ञानिको को गौरवपूर्णतरीके से किया गया याद

सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के मद्देनज़रभारतीय जनमानस में वैज्ञानिक चेतना का विकास करना अनिवार्य है:प्रो एसएम गुप्ता, डीनआईआईआरएनआईटी कुरुक्षेत्र

BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में नेशनलटेक्नॉलजी डेके अवसर पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया जिसमे बतौर मुख्य अतिथि एवं वक्ता प्रो एसएम गुप्ता, डीन इंडस्ट्रियल और इंटरनेशनल रिलेशंस एनआईटी कुरुक्षेत्र ने शिरकत की और कॉलेज के बीएससी एवं एमएससी के छात्र-छात्राओं से जीवंत संवाद किया.ऑफलाइन और आनलाइन दोनों माध्यम से आयोजित इस सेमीनार में माननीय मेहमान का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा एवं विज्ञान संकाय के अन्य प्राध्यापकों ने किया. विदित रहे की आज ही के दिन 11 मई 1998को भारत ने माननीय प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई में परमाणु परीक्षण किया था. आज के दिन पोखरण (राजस्थान) में कुल 5परीक्षण हुए थेजिसमें से तीन 11मई को तथादो 13मई को किए गए. इन परीक्षणों के साथ ही भारत ने खुद को दुनिया के छठे परमाणु सम्पन्न देश के रूप में घोषित कर दिया था औरतभी से माननीय प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयीकी पहल पर भारत में 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाने की शुरुआत हुई. इसकेअगले हीसाल यानी 11मई1999 को भारत में पहला नेशनल टेक्नॉलजी डे भीमनाया जाने लगा क्यूंकिइसी दिनरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने त्रिशूल मिसाइल केटेस्ट-फायर को पूरा करके इसेभारतीय वायु सेना कीसेवा में शामिल करदिया गया.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2022की थीम ‘सस्टेनेबल फ्यूचर के लिए साइंस एंड टेक्नोलॉजी में इंटिग्रेटेड अप्रोच’ है.

प्रो एसएम गुप्ता, डीन इंडस्ट्रियल और इंटरनेशनल रिलेशंस एनआईटी कुरुक्षेत्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान में प्रौद्योगिकी अर्थातटेक्नोलॉजी की हर क्षेत्र मेंआवश्यकता है औरइसका महत्व किसी भी देश को आगे बढ़ाने के हर पहलू से जुड़ा है.आज प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी तरह से प्रौद्योगिकी से जुड़ा हुआहै औरभारत को डिजिटल करने में प्रौद्योगिकी का सबसे बढ़ा हाथ है. जिस तरह से प्रत्येक विकसित औऱ विकासशील देश अपने-अपने परमाणु परीक्षण कर अपनी शक्तियों से दुनिया को अवगत करा रहे हैं उसी प्रकार सेभारत भी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाकर अपने वैज्ञानिकों एवं उनके कार्यों को दुनिया के समक्ष सम्मान प्रदान करता है.अर्थव्यवस्था के भूमंडलीकरण और उदारीकरण के दबाव की वजह से आज प्रौद्योगिकी की आवश्यकता बढ़ गई है. वास्तव में प्रौद्योगिकीय गतिविधियों को बनाए रखने के लिए तथा सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय जनमानस में वैज्ञानिक चेतना का विकास करना अति आवश्यक हो चला है. वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिकीय ज्ञान के सतत विकास और प्रसार के लिए हम सब को आगे आना होगा औरइसमें हम सब की सामूहिक और सार्थक भागीदारी की आवश्यकता है. आजदेश में स्वदेशी प्रौद्योगिकी को बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है और इसी से हमसही मायनों में विकसित राष्ट्र का अपना सपना पूरा कर पायेंगे, ऐसा उन्हें पूर्ण विश्वास है.

     प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज ही के दिन 1998में पोखरण में न सिर्फ सफलतापूर्वक परमाणु परीक्षण किया गयाबल्कि इस दिन से शुरू हुई नेशनल टेक्नोलॉजी डे मनाने की कड़ी. भारत ने न सिर्फ परमाणु विस्फोट से अपनी कुशल प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन कियाबल्कि भारत दुनिया के उन 6 राष्ट्रों की श्रृंखला में आ खड़ा हुआ जो परमाणु शक्ति संपन्न देशहै.इस दिवस को मनाने का यह भी उद्देश्य है कि लोग ज्यादा से ज्यादा प्रौद्योगिकी के बारे में जाने और इसके प्रति अधिक से अधिक जागरुक हो. आज प्रौद्योगिकी के कारण ही समस्त विश्व एकदूसरे से जुड़ चुकाहै. शिक्षा,व्यापार,संचार इत्यादि को आज सरल और संभव प्रौद्योगिकी ने ही बनाया है. भारत अपने इसी विकास को आगे बढ़ाने के लिए और प्रौद्योगिकी के महत्व को दर्शाने के लिए प्रतिवर्ष राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाता है. डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, डॉहोमी जहाँगीर बाबा, राजा रमन्ना जैसे कितने ही भारतीय वैज्ञानिक है जिन पर हमें नाज़ है और जिनके योगदान को भारत देश मरते दम तक भी न भुला पायेगा. उन्होनें कहा कि भारत में परमाणु कार्यक्रम की नींव रखने का श्रेय बेशकडॉ होमी जहांगीर भाभा को जाता है परन्तुइस कार्य में डॉ राजा रामन्ना का योगदान भी कम नहीं है. 18मई 1974में देश के पहले सफल परमाणु परीक्षण कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाने के लिए राजा रामन्ना को याद किया जाता है. रामन्ना उन आरंभिक भारतीय वैज्ञानिकों में से हैंजिन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए नाभिकीय ऊर्जा के उपयोग के लिए पथ प्रदर्शक कार्य किए और देश के स्वदेशी परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए अथक कार्य किया.

इस अवसर पर प्रो राकेश सिंगला, प्रो मुकेश गुप्ता, प्रो बलजिंदर सिंह, प्रो रेखा रानी, डॉराहुलजैन, डॉ रवि कुमार, डॉ एसके वर्मा, प्रो मयंक अरोड़ा, डॉ चेतना नरूला, प्रो रेणु, प्रो बिंदु, प्रो दिव्या, प्रो साक्षी, प्रो जगबीर, दीपक मित्तल समेत अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे.

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