Friday, April 17, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वाधान में एक दिवसीय ‘साइबर क्राइम जागरूकता’ सेमीनार का आयोजन.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 4, 2023 Tags: , ,

लोभ, लालच और झांसा है साइबर क्राइम घटित होने के बड़े कारण, साइबर क्राइम होने पर 1930 नंबर पर तुरंत कॉल करें: अजय कुमार पीएसआई थाना साइबर पानीपत

साइबर क्राइम के शिकार व्यक्ति को पुलिस की मदद लेने में संकोच, शर्म और देरी बिलकुल नहीं करनी चाहिए: डॉ अनुपम अरोड़ा

BOL PANIPAT , 04 अक्टूबर,     

     एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वाधान में ‘साइबर क्राइम जागरूकता’ विषय पर सेमीनार का आयोजन किया गया जिसमे बतौर मुख्य वक्ता अजय कुमार पीएसआई थाना साइबर पानीपत ने शिरकत की. उनके साथ एचसी रणबीर सिंह, एचसी सुनील कुमार, मीर कुमार होमगार्ड, नरेंद्र ड्राईवर और धरमबीर कार्यक्रम में उपस्थित रहे. सेमीनार में विद्यार्थियों को साइबर क्राइम के प्रकारों, इन्हें करने के तरीकों और इनसे बचने के उपायों पर विस्तृत एवं व्यवहारिक ज्ञान और प्रशिक्षण दिया गया. वर्तमान समय में साइबर क्राइम करने की वारदातों की संख्या लगातार बढ़ रही है. मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, एनएसएस प्रोग्राम अधिकारी डॉ राकेश गर्ग और डॉ एसके वर्मा ने किया.

     अजय कुमार पीएसआई ने कहा कि यदि ओटीपी की मदद से कोई हमारे पैसे निकाल ले तो हमें बिना वक्त गवाएं 1930 साइबर हेल्प लाइन नंबर पर कॉल करनी चाहिए. हम cybercrime.gov.in साईट पर जाकर भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है. जितनी जल्दी हम अपनी शिकायत दर्ज करवाएंगे उतना ही फायदा हमें होगा. हमें भूल कर भी अपना ओटीपी किसी को नहीं देना चाहिए और अनचाहे लिंक एवं इमेल पर हमें क्लिक नहीं करना चाहिए. हमें आसान संख्या वाले, अपना जन्मदिन, अपनी गाड़ी के नंबर आदि जैसे पासवर्ड नहीं बनाने चाहिए. साइबरफिशिंग के माध्यम से किसी के पास स्पैम ईमेल भेजी जाती है ताकि वह व्यक्ति अपनी निजी जानकारी दे और उस जानकारी से फिर उसका नुकसान कर दिया जाए. ऐसी इमेल ज्यादातर आकर्षक होती है. डेटा उल्लंघन एक सुरक्षा उल्लंघन है जिसमें संवेदनशील, संरक्षित या गोपनीय डेटा की प्रतिलिपि बनाई, प्रेषित, देखी या चुराई जाती है. ऐसी घटनाएं व्यक्तिगत लाभ या द्वेष (ब्लैक हैट्स), संगठित अपराध, राजनीतिक कार्यकर्ताओं या राष्ट्रीय सरकारों के लिए हैक करने वाले व्यक्तियों द्वारा की जाती है. फोटो मोर्फिंग तकनीक और फेक यूआरएल पर भी उन्होनें विस्तार से चर्चा की और इनसे बचने की सलाह दी. डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि साइबर अपराध एक ऐसा अपराध है जिसमें कंप्यूटर, आईओटी, मोबाईल, टेब और नेटवर्क इत्यादि शामिल होते है. किसी भी कंप्यूटर का अपराधिक स्थान पर मिलना या कंप्यूटर से कोई अपराध करना ही साइबर क्राइम कहलाता है. किसी की निजी जानकारी को कंप्यूटर से निकाल लेना या फिर चोरी कर लेना भी साइबर अपराध का ही हिस्सा है. कंप्यूटर अपराध भी कई प्रकार से किये जाते है जैसे कि जानकारी चोरी करना, जानकारी मिटाना, जानकारी मे फेर-बदल करना, किसी कि जानकारी को किसी और को देना. साइबर क्राइम में स्पैम ईमेल, हैकिंग, फिशिंग, वायरस को डालना, किसी की जानकारी को ऑनलाइन प्राप्त करना या किसी पर हर वक़्त नजर रखना आदि भी शामिल होते है. साइबर क्राइम के घटित होने का सबसे बड़ा कारण लोभ, लालच और झांसा है.       डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि हमें अपने डेबिट और क्रेडिट कार्ड का संभलकर इस्तेमाल करना चाहिए. अपना सीवीवी किसी भी हालत में किसी अन्य व्यक्ति के साथ शेयर नहीं करना चाहिए. हमें अपने कार्ड की वाई-फाई और अंतरराष्ट्रीय सुविधा को जरुरत के समय ही ऑन करना चाहिए. आजकल साइबर क्राइम का सबसे बड़ा आधार हमारा मोबाइल फ़ोन बन चुका है. आने वाले समय का सबसे बड़ा हथियार डाटा साबित होगा. उन्होनें कहा कि साइबर क्राइम को कुछ लोग वितीय क्राइम से जोड़कर ही देखते है जबकि ऐसा नहीं है. मोर्फिंग साइबर क्राइम का दूसरा घिनोना रूप है और युवाओं को इससे खासतौर पर बचना चाहिए. साइबर क्राइम होने की स्थिति में पुलिस के पास जाने में बिल्कुल भी संकोच और शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए. इस अवसर पर कार्यक्रम में डॉ राहुल जैन, डॉ प्रियंका चांदना, डॉ रवि कुमार, डॉ एसके वर्मा, प्रो रिया, प्रो नम्रता, प्रो ऋतु आदि भी उपस्थित रहे.      

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