‘कोविड आपदा काल में शिक्षा में डिजिटल बदलाव: संभावनाएं और चुनौतियां” (डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन इन एजुकेशन ड्यूरिंग कोविड: प्रोस्पेक्ट्स एंड चैलेंजेज) विषय पर कांफ्रेंस का आयोजन
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज में उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार द्वारा प्रायोजित एकदिवसीय बहु-विषयी राष्ट्रीय कांफ्रेंस का सारगर्भित आयोजनहुआ जिसका विषय रहा ‘कोविडआपदा काल में शिक्षा में डिजिटल बदलाव: संभावनाएं और चुनौतियां”(डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन इन एजुकेशन ड्यूरिंग कोविड: प्रोस्पेक्ट्स एंड चैलेंजेज). कांफ्रेंस का उदघाटन लोकसभा करनाल के माननीय सांसद संजय भाटिया ने किया औरउन्होनें महाविधालय द्वारा संचालित की जा रही सकारात्मक गतिविधियों के समर्थन स्वरूप सांसद निधि से11 लाख रूपयेके सहयोग की घोषणा की.गेस्ट ऑफ़ ऑनर प्रो श्याम कुमार पूर्व डीन अकादमिकएवं विभागाध्यक्ष भौतिकी विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र रहे. प्रातःकालीन सत्र में कीनॉट संबोधन प्रोफेसर नसीब सिंह गिल विभागाध्यक्ष कंप्यूटर साइंस विभाग,महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक ने दिया. बतौर अति विशिष्ट मेहमान प्रो अशवनी कुश विभागाध्यक्ष कंप्यूटर साइंस विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र ने कांफ्रेंस में शिरकत की.राजीव रंजन पीआरओ हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम पंचकूला ने भी कांफ्रेंस में शिरकत की. माननीय मेहमानों का स्वागत एसडी पीजी कॉलेज प्रधान एवं कांफ्रेंस के मुख्य संरक्षक पवन गोयल,उपप्रधान मनोज सिंगला, जनरल सेक्रेटरी तुलसी सिंगला, कोषाध्यक्ष विकुल बिंदल,कांफ्रेंस के संरक्षक एवं प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कांफ्रेंस के संयोजक डॉ राकेश गर्ग और प्रो मयंक अरोड़ा ने मोमेंटोऔर शाल भेंट कर किया.उनके साथ संगठन सचिव डॉ सुशीला बेनीवाल, डॉ रवि कुमार, प्रो दीपिका अरोड़ा मदान और डॉ पवन कुमार भी कांफ्रेंस में उपस्थित रहे.कांफ्रेंस में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और देश के अन्यराज्यों से आये शोधकर्ताओं, प्राध्यापकोंऔर छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. कांफ्रेंस में 350 से अधिक प्रतिभागियों ने अपना पंजीकरण करवाया और लगभग 200 शोधपत्र प्रस्तुतकिये.कांफ्रेंस में वाणिज्य विषय के क्षेत्र के उच्च कोटि के विद्वान और प्रोफेसर नेपधारकर रिसर्च स्कोलर्ज और विद्यार्थियो के ज्ञान में वृद्धि की. मंच का संचालन डॉ दीपिका अरोड़ा मदान ने किया.

करनाल लोकसभा सांसद संजय भाटिया ने कहा की रिकॉर्ड समय में वैक्सीन बनाकर और लगाकर देश ने दुनिया में अपना लोहा मनवाया है. देश अब न सिर्फ रिकॉर्ड वैक्सीन का निर्माण कर रहा है बल्कि 80 से अधिक देशों को इसकी सप्लाई भी दे रहा है.एसडी एजुकेशन सोसाइटी की तारीफ़ करते हुए उन्होनें इसे हरियाणा की सर्वोत्तम सोसाइटी बताया जिसनेशिक्षा के क्षेत्र में बेजोड़ योगदान दियाहै. उन्होनें कांफ्रेंस के सभी प्रतिभागियों से कहा कि वे इस कांफ्रेंस में इमानदारी से भाग ले और यहाँ कही गई हर बात को ध्यान से सुनकर जायें ताकि उन्हें इसका लाभ हो. विषय पर बोलते हुए उन्होनें कहा की डिजिटलशिक्षा से संवादात्मकताबढ़ गई है, विवरणोंपर ध्यान देना आसान हो गया है, कार्यों का शीघ्र समापन संभव हो गया है,शब्दावली मेंसुधार होता है, विद्यार्थी अपनी क्षमता अनुसार सिखने लगे है, रिकार्डेड लेक्चरसछात्रों को उनकी योग्यता एवं सुविधा के अनुसार सीखने में मदद करते है, विद्यार्थी कहीं भी बैठकर पढ़ सकता है और हम किसी भी समय दूर के सलाहकारों और संकाय से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते है. इन फायदों के साथ डिजिटल शिक्षा मेंचुनौतियां भी है.डिजिटल शिक्षा का महंगी है, दूरस्थग्रामीणक्षेत्रो में इसकी अभी भी पहुँच नहीं है,आधारभूत संरचनाका निर्माण भी महंगा होता है, एकनिश्चित समय-सारिणी केअभावछात्रों में अनुशासन न होने की आदत बनने का खतरा बना रहता है, हमारीरचनात्मक क्षमताओं में भी कमीआती है क्यूंकि नेट पर सब कुछ पका-पकाया मिल जाता है. सुरक्षा एवं भटकने का खतराभी इन्टरनेट पर रहता है. शिक्षा के डिजिटल होने पर उन्होनें कहा कि व्यावहारिकशिक्षा का कोई विकल्प नहीं है. जरुरत है व्यावहारिकशिक्षा और डिजिटल साधने के उचित समन्वय की.

गेस्ट ऑफ़ ऑनर प्रो श्याम कुमार पूर्व डीन अकादमिक एवं विभागाध्यक्ष भौतिकी विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र ने संजय भाटियाके बारे में बताया की वे हमेशा बौध्धिकएवंशैक्षणिक कार्यक्रम में शिरकत करते है. ऐसे गुणों वाला व्यक्ति अगर हमारा पथ प्रदर्शक है तो समाज और देश की तरक्की सुनिश्चित है. अच्छा अध्यापक वह है जिसे हर छात्र-छात्र में अपने ही बच्चे नजर आते है. कॉलेजने सैदेव ऐसे सकारात्मकता और नए विचारोंसे भरपूर आयोजन किये है. इस कांफ्रेंस का विषय भी अत्यधिक प्रासंगिक और समय की मांग के अनुसार चुना गया है. कोविडआपदा और लॉकडाउन के प्रभाव ने शिक्षण संस्थाओं को शिक्षण माध्यमों के नए विकल्पों पर विचार करने हेतु विवश कर दिया है.भारत में ई-शिक्षा अभी शुरूआती अवस्था में है इसलिए जरुरी है कि इसकी राह में मौजूद विभिन्न चुनौतियों को संबोधित कर ई-शिक्षा के रूप में एक नए शिक्षण विकल्प को और मजबूत किया जाए. इस आपदा से पहले भारतीय के अधिकांश शिक्षण संस्थानों को ऑनलाइन शिक्षा का कोई विशेष अनुभव नहीं था.ऐसे में शिक्षण संस्थानों के लिये अपनी व्यवस्था को ऑनलाइन शिक्षा के अनुरूप ढालना और छात्रों को अधिक-से-अधिक शिक्षण सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है.ऐसे में इस कांफ्रेंस में उत्पन्न हुए नए विचार और अनुभव डिजिटल शिक्षण की दिशा में बहुत ही प्रासंगिक सिद्ध होंगे.
कीनॉट संबोधन में प्रोफेसर नसीब सिंह गिल विभागाध्यक्ष कंप्यूटर साइंस विभाग,महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक ने विश्व के संदर्भ में भारत में डिजिटल परिवर्तन की रफ़्तार विषय व्याक्यान दिया.आज के इस युग की तकनीक को उन्होनें विध्वंस्कारक तकनीक बताते हुए कहा की डिसरप्टिव टेक्नोलॉजी के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे ड्रोन-स्वार्मिंग, रोबोट्स, क्लॉउड कम्पयूटिंग, ऑगमेंटेड-वर्चुयल रिएलिटी, बिग डाटा एनेलेटिक्स, क्वाउंटम कम्पयुटिंग, 5-6जी, साइबर वॉरफेयर और स्मॉल सैटेलाइट्स शामिल होते है. स्मार्ट फोंस, सोशल मीडिया इत्यादि जल्द इंसानों का विकल्प बन जायेंगे और इसीलिए हावी होती यह डिसरप्टिव टेक्नालॉजी जल्द धरती और मानव जीवन के स्वरूप को बदलने वाले हैं. दुनिया में ओद्योगिक क्रांति, इन्टरनेट क्रान्ति के बाद अब इंडस्ट्रियल इंटेलिजेंस का आगमन हो गया है. जो सोचने-विचारने के कार्य पहले इन्सान करता था जल्द उन्हें मशीने करने लगेगी जिनके साथ संभावित खतरे भी जुड़े हुए है.डिजिटल एजुकेशन पर जोर देकर और डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से इस साल के बजट में कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं जो इस बात को साबित करता है की आने वाला दौर डिजिटल शिक्षा का होगा. शिक्षा देने के परम्परागत माध्यमों को सुधार कर और उनमे कुछ नयापन लाकर ही नई पीढ़ी का भला कर सकते है. नई शिक्षा नीति में यही बदलाव है जिसके जल्द अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे. एबीसी आधारित क्रेडिट सिस्टम, बहुविषय पढने का विकल्प इत्यादि कुछ नए बदलाव है.

प्रोफ़ेसर अशवनी कुश विभागाध्यक्ष कंप्यूटर साइंस विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्रनेअपने व्याख्यान एजुकेशन टेक्नोलोजी में प्रयोग होने वाली नई-नई तकनीको पर विस्तार से प्रकाश डाला और बताया की कैसे एक शिक्षक और रिसर्चर इनका इस्तेमाल कर अपने कार्य में गुणवत्ता ला सकता है. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और डाटा के भण्डार ने शिक्षा जगत में क्रान्ति ला दी है. कंप्यूटर आधारित गेमिंग का अध्यापन में इस्तेमाल होने लगा है जो शिक्षा को रोचक और आसान बना देता है. डिजिटल साधनों में आडिओ और विडियो के माध्यम से लेक्चर अधिक मनोरंजक और समजने में सरल हो गए है. दूर बैठ कर पढने से टीचर और स्टूडेंट दोनों आराम और शान्ति के साथ बैठ कर पढ़ पते है और अध्यापक व्यक्तिगत तौर पर भी छात्रों का ध्यान रख पाते है. डिजिटल शिक्षा में हमें पाठ्यक्रम के अलावा भी बहुत कुछ सिखने को मिलता है. खुद सीखना अपने आप में इस प्रकार की शिक्षा का एक सुखद पहलु है. एडोमो, प्रोजेक्ट, थिंकलिंक, टेडएड, एजुक्लिपर, एडोब पार्क, एनिमोटो, सोक्रेतिव, आदि वेब टूल्स की मदद से इन्टरनेट से पढाई कर सकते है. कोर्सेरा, स्किलशेयर, लिंदा डॉट कॉम, उडेमी, ईडीएक्स आदि ऐसे प्लेटफार्म है जहाँ से अपनी पसंद के अनुसार कोर्सेज आन लाइन कर सकते है.
अपने स्वागत भाषण में प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने सांसद संजय भाटिया,डॉ श्याम कुमार, प्रो नसीब सिंह गिल और डॉ अशवनी कुश की तारीफ़ करते हुए उन्हें देश की धरोहर बताया. उन्होनें कहा की 1900 से 1977 की अवधि में दुनिया भर में चिकन-पोक्स की वजह से 30 करोड़ लोगों की मौत हुई थी जबकि कोरोना आपदा ने दुनियाभर में अब तक लगभग 60 लाख से अधिक लोगों की जान को लील लिया है. आधुनिक भारत में विज्ञानके क्षेत्र में हुई तरक्की ने रिकॉर्ड समय में वैक्सीन निर्माण को संभव बनाया और इसलिए अब कोरोना की ताकत कमजोर पड़ती जा रही है. फिरभी हमें सचेत रहना होगा और शिक्षा के डिजिटल बदलाव पर निरंतर कामकरते रहना होगा ताकि किसीभी संभव आपदा के समय हमारे पास अच्छे और मजबूत विकल्प उपलब्ध हो.उन्हें पूरी उम्मीद है की कांफ्रेंस में भाग लेने वाले प्रतिभागी अवश्य ही इसविषय के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करेंगे और इसे दूसरो तक बेहतर ढंग से पहुचाएंगे. यह कांफ्रेंस उनके शोधकार्यों में भी मददगार सिद्ध होगी.
प्रधान पवन गोयल ने कहा की “कोविडकाल में शिक्षा में डिजिटल बदलाव: संभावनाएं एवं चुनौतियां” विषय पर राष्ट्रीय कांफ्रेंस आयोजित कर कॉलेज ने शिक्षा जगत में आए इस क्रांतिकारी बदलाव पर उल्लेखनीय विमर्श किया है. वैसे तो कोविड आपदा ने प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है, परंतु इसका सबसे ज्यादा नुकसान छात्र-छात्राओं ने उठाया है. यदि देश में इतने डिजिटल बदलाव न आए होते तो यह नुकसान और भी व्यापक होता. समय आ गया है कि अब हम व्यवहारिक शिक्षा के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों को भी इसके साथ जोड़े. विद्यार्थियों के लिए भविष्य की शिक्षा अधिक रोचक एवं ज्ञानवर्धक होने वाली है. एसडीपीजी कॉलेज ने भी ऑनलाइन कक्षाओं के लिए शानदार डिजिटल माध्यमों को अपनाकर छात्र छात्राओं के भविष्य को संजोकर रखा. अंतिमसत्र में रिसर्च स्कोलर्ज को अपने लिखे शोधकार्य को सबके समक्ष पढ़ा और प्रतिभागियों से सीधे संवाद कर उनके सवालों के जवाब दिए.इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ एसके वर्मा,प्रो मयंक अरोड़ा, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो नरेंद्र कौशिक,प्रो मनोज कुमार, प्रो एकता दुरेजा, प्रो भावना जिंदल, प्रो मनमीत सिंह, प्रो नम्रता अरोड़ा, प्रो आशीष गर्ग, दीपक मित्तल ने भी कांफ्रेंस का दायित्व संभाला.

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