एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में ‘विकसित भारत@2047: युवाओं की आवाज’ कार्यशाला में प्राध्यापकों ने लिया हिस्सा
-प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के युवाओं को विकसित भारत के निर्माण के लिए एकीकृत करने के आह्वान को पूर्ण करने का लिया प्रण
-मैं जो कुछ भी करूं वह विकसित भारत के लिए होना चाहिए: नरेंद्र मोदी का युवाओं से आह्वान
-प्रधानमन्त्री ने 2047 तक विकसित भारत निर्माण की जिम्मेदारी दी राष्ट्र के शिक्षकों को
BOL PANIPAT , 11 दिसम्बर: एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में ‘विकसित भारत@2047: युवाओं की आवाज’ कार्यशाला में प्राध्यापकों ने लिया हिस्सा और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत @2047: युवाओं की आवाज’ पहल में शामिल होकर इसे साकार करने का प्रण लिया । ‘विकसित भारत@2047: युवाओं की आवाज’ का उद्देश्य देश के युवाओं को विकसित भारत के निर्माण के लिए एकीकृत करना है । कार्यशाला सुबह 10:30 बजे शुरू हुई जिसे माननीय प्रधानमन्त्री ने संबोधित किया । कार्यशाला के सीधे प्रसारण में प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और स्टाफ सदस्यों ने हिस्सा लिया और माननीय प्रधानमन्त्री की बातों को ध्यान से सुना । कार्यशाला में देश भर के राज्यपालों, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, संस्थानों के प्रमुखों और संकाय सदस्यों ने हिस्सा लिया और सभी इस शानदार पहल के साक्षी बने ।

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्हें विकसित भारत के सपने को हकीकत में बदलने के लिए भारत की युवा शक्ति पर बहुत भरोसा है । युवा पीढ़ी के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका भी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है । आज की कार्यशाला को आयोजित करने का उद्देश्य विकसित भारत के निर्माण के लिए देश के युवाओं को एकीकृत करना है । उन्होनें विकसित भारत पहल में बड़ी से बड़ी संख्या में शामिल होने का आग्रह किया और कहा कि विकसित भारत@2047 का लक्ष्य भारत को उसकी आजादी के 100वें वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है । इस दृष्टिकोण में विकास के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाएगा जिनमें आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, पर्यावरणीय स्थिरता और सुशासन शामिल हैं । जैसे परिवार के किसी सदस्य की परीक्षा के समय सारा परिवार उस व्यक्ति के साथ तन-मन से एकजुट हो जाता है वैसे ही विकसित भारत की चुनौती को सफल करने के लिए पूरा देश एकजुट होगा ऐसा उन्हें पूर्ण भरोसा है । ट्रैफिक सिग्नल को न तोडना, स्वच्छता का ख्याल रखना जैसे छोटे-छोटे कार्य भी विकसित भारत बनाने में मददगार साबित होंगे । डिजिटल इंडिया की सफलता और कोरोना आपदा की सफल लड़ाई ने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की तरफ खींचा है । हर देश के कालखंड में एक समय ऐसा अवश्य आता है जब वह देश क्वॉन्टम छलांग लगाता है । भारत देश का भी वह समय अब और आज है । वर्ष 2047 तक भारत देश विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा होगा इस दिशा में हर नागरिक को प्रयास आज से ही शरू करने होगे । देश का हर नागरिक अपने कर्तव्य बोध को ईमानदारी से निभाये, समय पर अपने दफ्तर पहुंचे और ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करें यही विकसित भारत बनने की दिशा में ठोस कदम है । जीवन में हम जो कुछ भी करें वह विकसित भारत के लिए होना चाहिए । हमारा हर कार्य हर प्रयास इस भाव में हो कि यह हमें विकसित भारत की और अग्रसर करता हो । उन्होनें कहा कि विकसित भारत के संकल्पों को लेकर आज बहुत महत्वपूर्ण दिन है । आज हर व्यक्ति, हर संस्था, हर संगठन को इस संकल्प के साथ आगे बढ़ना है कि वे जो कुछ भी करें वह विकसित भारत के निर्माण के लिए हो । सभी को अपने लक्ष्यों और अपने संकल्पों का ध्यान केवल विकसित भारत पर होना चाहिए । उन्होनें कहा कि ये ऐतिहासिक कालखंड है जब भारत लंबी छलांग लगाने जा रहा है । ऐसे कई देशों के कुछ उदाहरण हैं जिन्होंने एक निश्चित समय में इतनी लंबी छलांग लगाकर खुद को विकसित किया है । प्रधानमंत्री के मुताबिक, विकसित भारत के निर्माण का यह स्वर्णिम युग वैसा ही है जैसा लोग अक्सर परीक्षा के दिनों में देखते हैं । हमारे सामने 25 साल का अमृतकाल है । हमें इस अमृतकाल और लक्ष्यों के लिए चौबीसों घंटे काम करना है । विकसित भारत बनाने का देश के लिए सही समय है । हमें इस अमर समय के हर पल का लाभ उठाना है । विकसित भारत लॉन्च के मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि हमें एक पल भी नहीं गंवाना चाहिए । प्रधानमंत्री ने कहा कि एक मजबूत और सशक्त समाज तभी बनता है जब नागरिक देश के हित में सोचते हैं, जब वे देश के कल्याण के बारे में सोचते हैं । समाज की मानसिकता किसी भी देश के प्रशासन और शासन की झलक तय करती है ! उनका मानना है कि ‘जनभागीदारी’ एक ऐसा मंत्र है जिसके जरिये बड़े से बड़े संकल्प भी पूरे किये जा सकते हैं । चाहे ‘डिजिटल इंडिया’ हो, ‘वोकल फॉर लोकल’ हो या स्वच्छ भारत अभियान, हम सभी ने ‘सबका प्रयास’ की शक्ति देखी है ! सरकार का दृष्टिकोण देश के लिए राष्ट्रीय योजनाओं, प्राथमिकताओं और लक्ष्यों के निर्माण में युवा पीढ़ी को सक्रिय रूप से शामिल करना है । कार्यशाला 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के लिए अपने विचारों और सुझावों को साझा करने के लिए युवाओं को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है । उन्होनें शिक्षकों और युवाओं से अपील कि की वे नए विचार और आइडियाज सरकार को भेजें जिससे विकसित भारत को साकार करने में सरकार को मदद मिले ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने स्टाफ सदस्यों से बात करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षकों को मिली है और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि शिक्षक इस भूमिका को ईमानदारी से निभाएंगे और प्रधानमन्त्री के विश्वास पर खरे उतरेंगे ।
इस अवसर पर डॉ नवीन गोयल, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ एसके वर्मा, डॉ बलजिंदर सिंह, प्रो मयंक अरोड़ा, डॉ दीपिका अरोड़ा मदान, प्रो किरण मलिक, प्रो जुगमती समेत अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद रहे ।

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