एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के अवसर पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन
पर्यावरण प्रदूषण जीवन और स्वास्थ्य की गुणवत्ता को प्रभावित करता है: प्रो मीना मलिक डीएवी कॉलेज अम्बाला कैंट
BOL PANIPAT , 02 दिसम्बर , एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के अवसर पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया जिसकी मुख्य अतिथि और वक्ता प्रो मीना मलिक डीएवी कॉलेज अम्बाला कैंट रही । सेमीनार की शुरुआत में माननीय वक्ता का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कॉलेज एनएसएस अधिकारी डॉ राकेश गर्ग, प्रो अन्नू आहूजा और प्रो मनोज कुमार ने पुष्प-रोपित गमले के साथ किया । विदित रहे कि यह दिवस हमें प्रदूषण नियंत्रण के महत्व को समझने और स्वस्थ वातावरण के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देता है । यह दिन 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की याद में मनाया जाता है और इस दिन का उद्देश्य प्रदूषण के खतरों के प्रति जागरूकता फैलाना और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जरूरी कदमों को बढ़ावा देना है । इस अवसर पर प्रदुषण मुक्त भारत की शपथ और जागरूकता रैली भी निकाली गयी ।
प्रो मीना मलिक डीएवी कॉलेज अम्बाला कैंट ने कहा कि आज के दिन का उद्देश्य प्रदूषित जल, भूमि और वायु के कारण होने वाली मौतों के बारे में जागरूकता लाना है । इसके अलावा, भोपाल गैस त्रासदी जैसी औद्योगिक आपदाओं को कैसे रोका जाए, इस पर भी यह दिन प्रकाश डालता है । प्रदूषण विश्व के समक्ष एक बड़ी समस्या है । भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल के अनुसार दुनिया भर में हर साल लगभग 7 मिलियन लोग वायु प्रदूषण के कारण मरते हैं । इसे पर्यावरण प्रदूषण के नाम से भी जाना जाता है । हम प्रदूषण को किसी भी पदार्थ, चाहे वह ठोस, तरल, गैस हो या ऊर्जा का कोई भी रूप जैसे ऊष्मा, ध्वनि आदि, का पर्यावरण में शामिल कर सकते हैं । प्रदूषण पैदा करने के लिए विभिन्न कारक जिम्मेदार हैं जैसे पटाखे फोड़ना, कार्बन उत्सर्जन, बम विस्फोट, उद्योगों के माध्यम से गैसों का रिसाव आदि । आजकल प्रदूषण की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और प्रदूषण के स्तर को कम करना संबंधित सरकार और लोगों का कर्तव्य है । हमें प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विचार और योजनाएं बनानी चाहिए । हाल ही में 12 नवंबर 2024 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वायु प्रदूषण की जांच करने के लिए एक स्पष्ट और निष्पक्ष दृष्टिकोण स्थापित करने हेतु वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण नियम, 2024 को अधिसूचित किया है । यह प्रावधान 12 नवंबर से लागू भी हो गया हैं । यह नियम वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के दायरे में आता है ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की याद में मनाया जाता है जब यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से निकलने वाली जहरीली गैस ने हजारों लोगों की जान ले ली थी । इस त्रासदी ने प्रदूषण और उसके खतरों के बारे में समाज में जागरूकता बढ़ाई । इस दिन का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण के महत्व को समझाना और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी जागरूक करना है । भोपाल गैस त्रासदी 2 दिसंबर 1984 को हुई थी जब यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक हुई । इस हादसे में करीब 20 हज़ार लोग प्रभावित हुए और हजारों लोग मारे गए । इसके बाद सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना शुरू किया और इस दिन को एक प्रतीक के रूप में प्रदूषण नियंत्रण की जागरूकता फैलाने के लिए मनाने का निर्णय लिया । पर्यावरण प्रदूषण जीवन और स्वास्थ्य की गुणवत्ता को प्रभावित करता है ।
डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि राष्ट्रीय प्रदुषण नियंत्रण दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में समाज को जागरूक करना है । यह दिन प्रदूषण नियंत्रण उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करता है और सरकार, उद्योग तथा जनता को प्रदूषण को कम करने के लिए कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करता है । इसके माध्यम से हम सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण की ओर कदम बढ़ा सकते हैं । इस दिन विभिन्न सरकारी और निजी संस्थाएं प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती हैं । इनमें सेमिनार, कार्यशालाएं, प्रदर्शनी और स्कूलों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं । इसके अलावा, विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा सत्र भी आयोजित किए जाते हैं ताकि लोग प्रदूषण के खतरों और उससे निपटने के उपायों के बारे में अधिक जान सकें ।

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