एस.डी. पी.जी. कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय सेवा योजना ने विजय दिवस को शौर्य और जज़्बे के भाव के साथ मनाया गया
–एन.एस.एस. स्वयंसेवकों एवं एन.सी.सी. कैडेट्स ने ली एकता, अखंडता और देश के प्रति प्राण न्योछावर करने की शपथ
–भारत की तीनों सेनाओं के अदम्य साहस और पराक्रम का प्रतीक है विजय दिवस: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 16 दिसम्बर. एस.डी. पी.जी. कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों एवं एन.सी.सी. कैडेट्सने विजय दिवस (विक्ट्री डे) को शौर्य और जज़्बे के भाव के साथ मनाया । कॉलेज में आयोजित विशेष समारोह में आज के दिन देश के लिए शहीद हुए वीर जवानों और अधिकारियों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया । समारोह में प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, एन.एस.एस. अधिकारी डॉ राकेश गर्ग, एन.सी.सी. अधिकारी डॉ. बलजिंदर सिंह, डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो मनोज कुमार, प्रो विशाल गर्ग, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला, अन्य प्राध्यापकों और स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया । प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने एन.एस.एस. स्वयंसेवकों को एकता, अखंडता और देश के प्रति प्राण न्योछावर करने की शपथ दिलाई। कॉलेज प्रांगण ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम’ के नारों से गूंज उठा । स्वयंसेवकों ने देश भक्ति के गीत गाकर अन्य विद्यार्थियों के लिए देश भक्ति की अलख जगा दी । विदित रहे कि 1971 में भारत देश के मुक्ति संग्राम में अंतिम जीत की याद में 16 दिसंबर को विजय दिवस मनाया जाता है । आज के दिन 1971 में पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश में नौ महीने के अत्याचारों के अंत के रूप में ढाका में आत्मसमर्पण किया था । पाकिस्तानी जनरल एएके नियाज़ी ने आधिकारिक तौर पर मित्र देशों की सेना के कमांडर जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण किया । इसके साथ ही बांग्लादेश को 9 महीने के लंबे नरसंहार और रक्तपात के बाद आजादी मिली और एक नए देश के रूप में मान्यता मिली । इस युद्ध में करीब 3,900 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए जबकि पाकिस्तानी सेना के 93000 सिपाहियों ने आत्मसमर्पण किया था जो विश्व इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आत्म्सपर्पण है । डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि विजय दिवस 16 दिसम्बर को 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत के कारण मनाया जाता है । साल 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह परास्त किया जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र हो गया जो आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है । यह युद्ध भारत के लिए ऐतिहासिक और हर देशवासी के हृदय में उमंग पैदा करने वाला साबित हुआ । इंदिरा गांधी ने लोकसभा में शोर-शराबे के बीच घोषणा की कि युद्ध में भारत को विजय मिली है। जब जनरल मानेक शॉ ने प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी को बांग्लादेश में मिली शानदार जीत की ख़बर दी तो इंदिरा गांधी के बयान के बाद पूरा सदन जश्न में डूब गया । विजय दिवस के उपलक्ष में सशस्त्र बल मुख्यालयों, इकाइयों और अन्य प्रतिष्ठानों पर राष्ट्रीय मानक फहराएं जाते है । तीनों सेनाओं द्वारा निर्दिष्ट भवनों और प्रतिष्ठानों पर रोशनी की व्यवस्था कर उन्हें सजाया जाता है । यह दिन हर भारतीय में जोश, उमग, शौर्य और बलिदान के भावों से भरता है । डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि जब पाकिस्तान को मजहब के आधार पर भारत से अलग किया गया तो उसके रहनुमाओं ने भी इतनी बड़ी हार और ऐसी शर्मिंदगी की कल्पना नहीं की होगी । पूर्वी पाकिस्तान की हार ने पाकिस्तानी सेना की प्रतिष्ठा को चकनाचूर कर दिया । पाकिस्तान ने अपनी आधी नौसेना, एक चौथाई वायु सेना और एक तिहाई थल सेना खो दी । बाद में एक रिपोर्ट में कहा कि पाकिस्तान के लिए यह एक पूर्ण और अपमानजनक हार थी, एक मनोवैज्ञानिक झटका था, जो कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत के हाथों हार से मिला था । सन 1905 में मजहब के नाम पर बंगभंग का उदय हुआ था । इसी मजहबी सोच पर पाकिस्तान बना मगर यह मजहब से भी ऊपर सांस्कृतिक पहचान का संघर्ष था । दरअसल बांग्लादेश की आजादी को लेकर संघर्ष के बीज तो 1952 में ही पड़ गए गए थे जब पाकिस्तानी हुकूमत ने उर्दू को पूरे देश की आधिकारिक भाषा बनाने की घोषणा की थी ।

Comments