Monday, August 3, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विलियम शेक्सपियर के मशहूर नाटक ‘द मर्चेंट ऑफ़ वेनिस’ नाटक की हुई स्क्रीनिंग

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at May 14, 2022 Tags: , , , ,

अंग्रेजी विभाग की ‘लिटरेरी माइंडस’ एसोसिएशन के तत्वाधान में हुआ आयोजन

नाटक जीवन की परिस्थितियों एवं चुनोतियों की अभिव्यक्ति का सबसे सजीव माध्यम है:प्रोदिनेश खन्ना निदेशक भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ

व्यक्तित्व के सही विकास को प्रोत्साहित करता है रंगमंच: डॉ अनुपम अरोड़ा

मानव-मन की अनुभूतियों को मनोवैज्ञानिकता व सजीवता के साथ चित्रित करनेकी क्षमता शेक्सपियर मेंहै: प्रोअन्नू आहूजा

BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विलियम शेक्सपियर के मशहूर नाटक ‘द मर्चेंट ऑफ़ वेनिस’ नाटक की फिल्मस्क्रीनिंग की गई जिसका आयोजन अंग्रेजी विभाग की ‘लिटरेरी एसोसिएशन’ के तत्वाधान में हुआ.कार्यक्रममेंप्रोदिनेश खन्ना निदेशकभारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ एवं पूर्व निदेशक एनएसडी दिल्ली नेरंगमंच के महत्त्व और इसकी उपयोगिता पर अपने वेब-सन्देश के माध्यम से प्रकाश डाला.फिल्म के रूप में दिखाए गए इस नाटक का उदघाटन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और कार्यक्रम की संयोजक प्रो अन्नू आहूजा ने किया. उनके साथ अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो नरेंद्र कौशिक, डॉ संतोष कुमारी, डॉ मोनिका खुराना, डॉ एसके वर्मा,प्रो डेनसन डी. पॉल, प्रोसनी, प्रोमणि, प्रो दीप्ति, प्रो सुरभि, प्रो लक्षिता कपूर और प्रो मानवी कार्यक्रम में उपस्थित रही. स्क्रीनिंग का आयोजन बीए फाइनल, बीएओनर्स और एमए अंग्रेजी के विद्यार्थियों ने भाग लिया और अपने ज्ञान में वृद्धि की. विदित रहे की विलियम शेक्सपियर कृत मशहूर कॉमेडी ‘द मर्चेंट ऑफ़ वेनिस’ कई कक्षाओं के पाठ्यक्रम काभी हिस्सा भी है. माइकल रेडफोर्ड निर्देशित इस फिल्म में अल पेचीनो ने शायलॉक, जर्मी आयरन्स नेएंटोनियो, जोसफ फिन्नेस ने बसानियो एवं लीन कोलिन्स नेपोर्शियाकी भूमिका अदा की है.फिल्म रुपी नाटक का छात्र-छात्राओं ने भरपूर आनंद लिया जिससे उन्हें परीक्षाओं में भी भरपूर मदद मिलेगी.

डॉ दिनेश खन्ना निदेशकभारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ एवं पूर्व निदेशक एनएसडी दिल्ली ने अपने वेब-सन्देश में शेक्सपियर कि तारीफ़ करते हुए उनके नाटकों को बेजौड़  और मानव अभिव्यक्ति की पराकाष्ठा बतलाया. मानव जीवन भी मूलतः रंगमंच ही है “दुनिया एक स्टेज है, और हम सब है इसके एक्टर, कोई हीरो है, कोई जोकर, कोई…” जैसा संवाद नाटक की दुनिया का सबसे बड़ा संवाद है.“महानता से बिलकुल ना डरें. कुछ लोग महान पैदा होते हैं, कुछ महानता हासिल करते हैं और कुछ लोगों में महानता समाहित होती है” जैसे कितने ही संवाद आज हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके है. किसी को भी अगर रंगमंच पर कामयाबी हासिल करनी है तो उसे एक बार शेक्सपियर जरुर पढना चाहिए.

     प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि रंगमंचव्यक्तित्व के सहीविकास को प्रोत्साहित करता है और इससे हमारी मौखिक अभिव्यक्ति में भी वृद्धि होती है. रंमंच की मदद से हम अपनीशब्दावली, धाराप्रवाहता और भाषा की स्पष्टतामें सुधार कर सकते है. रंगमंचसमाजीकरण का सबसे सशक्त माध्यम है. खुद की अभिव्यक्ति का विकास और सुधार भी नाटक के माध्यम से संभव है. हम अपने चरित्र की संवेदनाओं और भावनाओं को सटीकता के साथ व्यक्त करना भी रंगमंच के माध्यम से सीखते है. थिएटर हमारेआत्मविश्वास के निर्माण में भी बहुत ज्यादा सहायक है. स्टेज पर मंचित नाटक हमारे मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ता है और इसे हम लम्बे समय तक याद रखते है. शिक्षा में मीडिया और फिल्म की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है.

कार्यक्रम की संयोजक प्रो अन्नू आहूजा नेविलियम शेक्सपियर के मशहूर नाटक ‘द मर्चेंट ऑफ़ वेनिस’ के बारे बतात्ते हुआ कहा कि इस कहानी कीदोस्ती के परीक्षण की शुरुआत एंटोनियो जैसे अमीर व्यापारी से हुईजब उसके दोस्त बसानियो नेएक सच्चे दोस्त की तरह एंटोनियो के लिए पैसे जुटाने का फैसला किया. जब अन्य व्यापारी आवश्यक राशि प्रदान करने में असमर्थ होते हैं तो बासानियो को शायलॉकके पास जाने के लिए मजबूर किया जाता है. बसानियो की चिंताओं के बावजूद एंटोनियोआगे बढ़ता हैऔर बांड पर हस्ताक्षर करता हैऔर अपने दोस्त को तीन हजार ड्यूकटदेता है. इस प्रकार मित्रता को नाटक में प्रमुखता दी गई है.शेक्सपियर इस नाटक में व्यापारिक महानगर की पूरी तस्वीर खींचता है औरएंटोनियो में वह एक ऐसा चरित्र बनाता है जो दोस्ती की खातिर अपने जीवन और धन का त्याग कर सकता है. बसानियोके लिए एंटोनियो का संदेश अपने महान आत्म-नियंत्रण को व्यक्त करता है.एंटोनियो के जहाज डूबने के कारण वह अब ऋण नहीं चुका सकता हैऔर दया के बिना एवं बांड की शर्त के अनुसार शाइलॉक अपने मांस का एक पाउंड मांगता है. सुन्दर एवं उत्तराधिकारी पोर्टिया जो अब एंटोनियो के दोस्त की पत्नी है एक वकील के रूप में कपड़े पहनती है और एंटोनियो को अपनी बुधिमत्ता एवं तर्कपूर्ण दलीलों से बचाती है.शेक्सपियर के नाटक मानव-मन की अनुभूतियों को अत्यन्त मनोवैज्ञानिकता व सजीवता के साथ चित्रित करते हैं औरउनके नाटक काल्पनिक जगत में मनुष्य को बड़ी यथार्थता के साथ ले जाते हैं.

प्रो नरेंद्र कौशिकविभागाध्यक्ष अंग्रेजी विभाग ने कहा कि शेक्सपियर अंग्रेजी साहित्य में अपने नाटकों के लिए उतने ही विश्व प्रसिद्ध रहे हैंजितने संस्कृत साहित्य में कालिदास.नाटकों में चित्रित उनके पात्र वीरोचित गुणों से युक्त प्रतीत होते हैं तथाप्रेम की सूक्ष्म अनुभूतियों को अभिव्यक्ति देते हैं. शेक्सपियर न केवल नाटककार थेअपितु कवि हृदय भी रखते थे. उन्होंने इन दोनों विधाओं में अपनी साहित्यिक श्रेष्ठता साबित की. वे एलिजाबेथ प्रथम के काल के प्रसिद्ध कवि और नाटककार थेजिन्होंने 37नाटक तथा 153सानेट लिखे है.

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