Monday, May 18, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत बना कुरुक्षेत्र विश्वविधालय पुरुष कबड्डी का चैंपियन.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at April 30, 2024 Tags: , , , ,

लगातार तीसरी बार विश्वविधालय चैंपियन बन रचा नया इतिहास

एसए जैन कॉलेज कॉलेज अम्बाला सिटी, आरकेएसडी कॉलेज कैथल और राजकीय महाविधालय इसराना की टीमों को दी पटखनी   

खेलों में खिलाड़ियों की बढती रूचि और उपलब्धियां उभरते भारत की नई तस्वीर है: डॉ अनुपम अरोड़ा  

BOL PANIPAT , 30 अप्रैल,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की कबड्डी टीम ने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय पुरुष कबड्डी चैंपियनशिप जीतकर न सिर्फ कॉलेज और जिले का मान बढाया बल्कि इस कारनामे को लगातार तीसरी बार अंजाम देकर कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया । यह टूर्नामेंट हाल ही में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र में सम्पन्न हुआ और इसमें एसडी पीजी कॉलेज की टीम ने जोन और इंटरजोन की विजेता टीमों को सभी मैचों में पछाड़ते हुए पुरुष कबड्डी चैंपियनशिप पर कब्ज़ा किया । एसडी पीजी कॉलेज की कबड्डी टीम ने एसए जैन कॉलेज कॉलेज अम्बाला सिटी को 34-25 के अंतर से, आरकेएसडी कॉलेज कैथल की टीम को 26-8 के अंतर से और राजकीय महाविधालय इसराना से मैच 22-22 से बराबर होने पर कुल पॉइंट्स 82-73 में 9 अंक अधिक होने पर इसराना की टीम को पटखनी दी । विजेता छात्राओं का कॉलेज प्रांगण में पहुँचने पर स्वागत एसडी पीजी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्षा डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो रेखा, कोच अंकुश मलिक और ग्राउंड्समैन प्रताप ने किया । कॉलेज की पुरुष कबड्डी टीम ने कप्तान राहुल की अगुआई में सचिन, संजू, सुमित, अक्षय, सुमित कुमार, सागर, नवीन, शुभम, मंजीत, अभिषेक और साहिल के शानदार खेल के बूते पर सभी मैचों में एकतरफा जीत हासिल कर इस मुकाम को प्राप्त किया । सबसे अधिक हर्ष का विषय यह रहा कि इस टीम के 4 खिलाड़ी अक्षय, मंजीत, शुभम और अभिषेक पहले आल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी की टीम के लिए खेल चुके है ।

एसडी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल ने कहा कि कबड्डी के इन खिलाड़ियों ने जो उपलब्धि हासिल की है वह हर विद्यार्थी के लिए गौरव और हर्ष का विषय है । इस जीत के पीछे इनकी लगन और कड़ी मेहनत का हाथ है । खेल सभी के जीवन में विशेष रुप से विद्यार्थियों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । खेल गतिविधियों में शामिल होना हर व्यक्ति के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है । खेल न केवल शारीरिक ताकत प्रदान करते है बल्कि इनसे हम मानसिक रूप से भी शक्तिशाली और मजबूत बनते है । अब तो खेल हमें अपने पैरो पर खड़ा होने में मदद भी करने लगे है । विश्वविधालय और राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेना और फिर स्वर्ण पदक जीतना अपने आप में गौरवपूर्ण उपलब्धि है । इन खिलाड़ियों ने यही संदेश और प्रेरणा हम सभी को दी है । कॉलेज अपने खिलाड़ियों को हर तरह से प्रोत्साहित करता है और आगे भी करता रहेगा ।

     प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने सभी खिलाड़ियों की उपलब्धियों के बारे में बोलते हुए कहा कि ऐसे खिलाडी बहुत कम होते है जो कम उम्र में बड़े कारनामे कर जाते है । इन सभी खिलाड़ियों की कामयाबी का सफ़र बहुत लम्बा है और यह अभी और भी बड़ा मुकाम हासिल करेंगे । कबड्डी जैसे खेल द्वारा विद्यार्थी सामाजिक होना सीखते है और उनका भावात्मक विकास भी होता है । युवा जीवन में खेलों में भाग लेने से युवा टीम वर्क सीखते है । शारीरिक विकास के साथ-साथ मन का विकास भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है । कबड्डी जैसा खेल अंग विन्यास को अच्छा, हृदय को मजबूत, श्वसनतंत्र को बेहतर और हमारी इम्यूनिटी को बढाने में सहायक होता है । प्रतियोगी भावना भी हमें कबड्डी जैसे खेल से ही मिलती है । हर युवा को चाहिए की वह अपने जीवन में कम से कम एक खेल में भाग जरुर ले ।

शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ सुशीला बेनीवाल ने कहा कि कबड्डी एक भारतीय मैदानी खेल है और जिसमे मैदान के दो पालों के अतिरिक्त किसी अन्य साधन की जरूरत नहीं होती है । यह एक मनोरंजक स्वदेशी खेल है जो युवाओं में ओज और स्वस्थ संघर्षशील जोश भरता है । यह खेल पकड़ने वाले और प्रतिरक्षक दोनों से अत्यधिक तंदुरुस्ती, कौशल, गति और ऊर्जा की माँग करता है ।

राहुल, सचिन, संजू, सुमित, अक्षय, सुमित कुमार, सागर, नवीन, शुभम, मंजीत, अभिषेक और साहिल ने कहा कि उनकी जीत का श्रेय अपने माता-पिता, एसडी कॉलेज प्रबंधकारिणी, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रो सुशीला बेनीवाल और कोच अंकुश मलिक को जाता है । उनके माता-पिता सदा उनके साथ खड़े रहे है और कॉलेज से भी उन्हे भरपूर मदद और हौंसला मिला है । वे अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ना चाहते है और इसके लिए वे निरंतर अभ्यास में जुटे हुए है । 

इस अवसर पर कॉलेज स्टाफ सदस्य डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो सुशीला बेनीवाल, प्रो रेखा मौजूद रहे ।

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