माइक्रोफाइनेंस से ग्रामीण क्षेत्रों का आर्थिक विकास होगा
-पाइट में अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस, सशक्त भारत पर हुई चर्चा
BOL PANIPAT : समालखा – माइक्रोफाइनेंस से ग्रामीण क्षेत्रों का आर्थिक विकास हो सकता है। जब तक समाज के निम्न आय वर्ग के लोग सशक्त नहीं होंगे, विकसित भारत की कल्पना नहीं कर सकते। यह बात देश के प्रसिद्ध आर्थिक विशेषज्ञों ने कही। पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलोजी (पाइट) में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में माइक्रोफाइनेंस, नवाचार और बैंकिंग के माध्यम से सशक्त भारत पर शोध पढ़े गए, चर्चा की गई।
फिनटेक कंपनी एरिसकन के बोर्ड सदस्य अनुज मोहन ने बताया कि माइक्रोफाइनेंस कैसे करना चाहिए। छोटी-छोटी बचत करें। माइक्रोफाइनेंस से ग्रामीण एरिया डेवलप होंगे। इसी से विकास की राह खुलेगी।
शेफाली नागपाल ने कहा कि माइक्रोफाइनेंस एक ऐसी वित्तीय व्यवस्था है जिसके तहत कम आय वाले लोगों, छोटे व्यापारियों और गरीब परिवारों को छोटे-छोटे ऋण दिए जाते हैं। इसका उद्देश्य उन लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना है, जिन्हें आमतौर पर बैंक लोन नहीं मिल पाता। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर से ह्यूमेन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर की निदेशक डॉ. प्रीति जैन ने कहा कि आउट ऑफ द बॉक्स सोचने व नए रोजगार पर चर्चा की। बीबीए विभाग के अध्यक्ष डॉ.रोहित गर्ग ने माइक्रोफाइनेंस पर विस्तार से चर्चा की। चेयरमैन हरिओम तायल, सचिव सुरेश तायल, वाइस चेयरमैन राकेश तायल, बोर्ड सदस्य शुभम तायल, निदेशक डॉ.शक्ति कुमार, डीन डॉ.जेएस सैनी, डॉ.शक्ति अरोड़ा, डॉ.सुरेश बेदी, सह संयोजक डॉ.पूजा गुप्ता, डॉ.प्रीति दहिया, पारस बतरा ने शोधार्थियों को सम्मानित किया।

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