वेद मंत्रों के साथ प्रारंभ हुआ हनुमान जन्मोत्सव के लिए छह दिवसीय यज्ञ
BOL PANIPAT : हनुमान जन्मोत्सव के लिए छह दिवसीय यज्ञ प्रारंभ हुआ प्रातः कालीन सूर्य उदय के साथ ही वेद मंत्रों के साथ आचार्य देवनारायण जी हनुमान चालीसा यज्ञ प्रारंभ किया आचार्य जी ने कहा हनुमान जी हनुमान चालीसा के यज्ञ से अति प्रसन्न होते हैं मेहंदीपुर बालाजी की तरह प्रगठीश्वर श्री हनुमान जी के समक्ष 40 चौपाइयों की आहुति दी गई
यज्ञ का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा अच्छे मार्ग पर ले चलो, हमेशा हमारी रक्षा करो। यज्ञ को शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ कर्म कहा गया है। इसकी सुगंध समाज को सुसंगठित कर एक सुव्यवस्था देती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यज्ञ करने वाले अपने आप में दिव्यात्मा होते हैं। यज्ञों के माध्यम से अनेक ऋद्धियां-सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं। यज्ञ मनोकामनाओं को सिद्ध करने वाला होता है। विशेष आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए, विशेष संकट निवारण के लिए और विशेष शक्तियां अर्जित करने के लिए विशिष्ट विधि-विधान भी भिन्न-भिन्न हैं। यज्ञ भगवान विष्णु का ही अपना स्वरूप है। इसे भुवन का नाभिकेंद्र कहा गया है। याज्ञिकों के लिए आहार-विहार और गुणकर्म को ढालने के लिए विशेष प्रावधान बताया गया है। यज्ञ से ब्रह्म की प्राप्ति होती है। यह इंसान की पाप से रक्षा करता है, प्रभु के सामीप्य की अनुभूति कराता है। मनुष्य में दूसरे की पीड़ा को समझने की समझ आ जाए, अच्छे-बुरे का फर्क महसूस होने लगे तो समझें यज्ञ सफल है। यज्ञ करने वाले आपसी प्रेम और भाईचारे की सुवास हर दिशा में फैलाते हैं।

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