मिशन वात्सल्य योजना पर प्रशासन का फोकस. जरूरतमंद बच्चों को हर हाल में मिले सहायता: उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया
-स्पॉन्सरशिप व फोस्टर केयर स्कीम की समीक्षा, 31 मार्च तक लाभ जारी रखने के निर्देश
-गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा-पालन के लिए प्रशासन गंभीर, दोबारा सर्वे कराने के आदेश
-पात्र बच्चों के हितों से समझौता नहीं होगा, आय सत्यापन के बाद बनेगी आगे की रणनीति
BOL PANIPAT , 11 मार्च। जिला सचिवालय सभागार में बुधवार को उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया की अध्यक्षता में जिला स्तरीय स्पॉन्सरशिप एवं फोस्टर केयर अप्रूवल कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त ने मिशन वात्सल्य योजना के तहत बच्चों के संरक्षण, पुनर्वास और आर्थिक सहायता से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की व योजना की वर्तमान स्थिति, लाभार्थियों की संख्या और आय सत्यापन से संबंधित मामलों की जानकारी भी ली।
उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने कहा कि मिशन वात्सल्य योजना सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद और कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा, पोषण और सुरक्षित भविष्य प्रदान करना है। उपायुक्त डॉ.दहिया ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे और बच्चों के हितों की पूरी तरह से रक्षा हो।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन लाभार्थियों के मामलों में आय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, उनमें 31 मार्च तक योजना का लाभ जारी रखा जाए। साथ ही इन परिवारों का दोबारा सर्वे कराकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति के आधार पर आगे का निर्णय लिया जा सके।
उपायुक्त डॉ दहिया ने कहा कि बच्चों के भविष्य से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ काम किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत जिला बाल संरक्षण यूनिट द्वारा 0 से 18 वर्ष तक के ऐसे बच्चों को सहायता प्रदान की जाती है, जो देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले वर्ग में आते हैं। इनमें ऐसे बच्चे शामिल होते हैं जिनके माता-पिता की आर्थिक, शारीरिक या मानसिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपने बच्चों को पर्याप्त सुविधाएं जैसे भोजन, शिक्षा और देखभाल उपलब्ध नहीं करा पाते। ऐसे मामलों में प्रशासन की ओर से स्पॉन्सरशिप एवं फोस्टर केयर स्कीम के माध्यम से बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग दिया जाता है।
गौरतलब है कि इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में 72 हजार रुपये और शहरी क्षेत्र में 96 हजार रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के बच्चों को पात्र माना जाता है। पात्र बच्चों के माता-पिता या अभिभावकों को उनके पालन-पोषण और शिक्षा के लिए प्रति माह 4 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है, ताकि बच्चे पढ़ाई जारी रख सकें और उनका समुचित विकास हो सके।
बैठक के दौरान 28 अक्टूबर 2025 को आयोजित पिछली बैठक की भी समीक्षा की गई। उस समय कुछ परिवारों की आय योजना के निर्धारित मानदंडों से अधिक दिखाई गई थी, जिसके बाद उपायुक्त के निर्देश पर अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से इन मामलों का सत्यापन करवाया गया। सत्यापन के बाद 7 लाभार्थी बच्चों के परिवारों की आय योजना की गाइडलाइन के अनुरूप पाई गई, जबकि 3 मामलों में आय अधिक दर्ज होने की स्थिति बनी हुई है। जिस पर उपायुक्त ने उपरोक्त बच्चों को 31 मार्च तक लाभ देने व इनका फिर से सर्वे करवाने के निर्देश दिए।
बैठक में जिला बाल संरक्षण अधिकारी निधि गुप्ता, सीडीपीओ किरण, समिति सदस्य मालती अरोड़ा, अंजू, दीपा मोहिंद्रयू, रीना सहित अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।

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