Thursday, May 14, 2026
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अष्टकुमारियों ने चौक पुराया एवं सौधर्म इंद्र/ धनपति कुबेर एंव अन्य इंद्रो को हल्दी लगाकर शगुन किया गया

By LALIT SHARMA , in RELIGIOUS , at April 29, 2025 Tags: , , , ,

BOL PANIPAT : जैन मोहल्ला में श्री 1008 महावीर स्वामी दिगंबर जिनालय (छोटा मंदिर) नवीनीकरण पंच दिवसीय महोत्सव में आज चतुर्थ दिवस परम पूज्यनीय गणिनी आर्यिका 105 आर्षमति माताजी के पावन सानिध्य में धूमधाम के साथ मनाया गया
आज सर्वप्रथम भगवान का अभिषेक एवं शांति धारा के उपरांत श्री महावीर जिनालय (छोटा मंदिर) से श्री 1008 पार्श्वनाथ स्वामी की एक प्रतिमा याग मंडल विधान हेतु श्री दिगंबर जैन बडा मंदिर जी के नवीन जिनालय में सौंधर्म इंद्र बने पुनीत जैन अपने मस्तक पर धारण कर लेकर आए
मंदिर जी में पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान कर अभिषेक एवं विश्व शांति कामना हेतु शांति धारा की गई
अष्टकुमारियों ने चौक पुराया एवं सौधर्म इंद्र, धनपति कुबेर एंव अन्य इंद्रो को हल्दी लगाकर शगुन किया गया
इंद्राणियों ने अस्थाई वेदी की शुद्धि करी प्रतिष्ठाचार्य डा. अभिषेक जैन के कुशल निर्देशन में वेदी शुद्धि की प्रक्रियाएं प्रारंभ हुई एवं श्री यागमंडल विधान का शुभारंभ हुआ
तत्पश्चात मंत्रों के साथ आहुति दी गई

इस अवसर पर परम पूज्य गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी ने कहा कि संसार में पैसे वाले का सम्मान नहीं है अपितु पैसे का दान करने वाले का सम्मान होता है
जैन आगम के अनुसार, दान एक अत्यंत महत्वपूर्ण कर्म है जो आत्मा को शुद्ध करता है और मोक्ष की ओर ले जाता है। दान देने से व्यक्ति को भौतिक जीवन के दुखों से मुक्ति मिलती है और मन को शांति प्राप्त होती है।
दान जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण कर्म है जो व्यक्ति को आत्मा की शुद्धि, मोक्ष प्राप्ति, मन की शांति और सामाजिक कल्याण में मदद करता है। दान देते समय विधि, पात्र और सामर्थ्य का ध्यान रखना चाहिए।

इस अवसर पर जानकारी देते श्री दिगंबर जैन पंचायत के सचिव मनोज जैन ने बताया कि कल यानि 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर प्रातः की बेला में बैंड बाजे व शहनाई वादन के साथ छोटे मंदिर जी से सभी प्राचीन जिनबिम्बो को इंद्रों के द्वारा मस्तक पर विराजमान कर नवीन जिनालय बड़ा मंदिर जी में विराजमान किया जाएगा उन्होंने सभी से अनुरोध किया इस ऐतिहासिक क्षण में सभी लोग सम्मिलित हो उन्होंने बताया कि आज याग मंडल विधान में पुनीत जैन संजना जैन को सौधर्म इंद्र, मनोज जैन अंजू जैन को कुबेर इंद्र, संजीव जैन मंजू जैन को यज्ञनायक, पंकज जैन पूनम जैन को महेंद्र इंद्र, सुरेश जैन अनु जैन को ईशान इंद्र, बृजभूषण जैन संगीता‌ जैन को सनत कुमार इंद्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ

आगे जानकारी देते हुए एडवोकेट मेहुल जैन ने बताया कि कल धूमधाम के साथ प्राचीन प्रतिमाएं अस्थाई रूप से बड़े मंदिर की में विराजमान हो जाएगी
और जब तक मंदिर का निर्माण होगा तब तक यह प्रतिमाएं बड़े मंदिर जी में ही विराजमान रहेगी छोटा मंदिर जिसका नव निर्माण होने जा रहा है यह 200 वर्ष प्राचीन मंदिर है
साथ ही उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया का त्यौहार भी कल धूमधाम से पूज्यनीय माता जी ससंघ के पावन सानिध्य मनाया जाएगा
जैन धर्म में अक्षय तृतीया, जिसे इक्षु तृतीया भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है. यह दिन जैन धर्म के पहले तीर्थंकर, भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) से जुड़ा हुआ है, जब उन्होंने एक वर्ष की तपस्या के बाद गन्ने के रस (इक्षुरस) से पारणा किया था. इस दिन को जैन समुदाय दान और पुण्य कमाने के लिए सबसे बड़ा दिन मानता है
इस अवसर पर अध्यक्ष सुनील जैन, सुरेश जैन, मनोज जैन, सुशील जैन, दिनेश जैन, रूलियाराम जैन, कुलदीप जैन, संजीव जैन, प्रदीप जैन आदि मौजूद रहे

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