एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में करवाचौथ का त्यौहार रंगारंग और पारंपरिक तरीके से मनाया गया
मेगा मेहँदी प्रतियोगिता में नेहा ने बाजी मार जीता नकद पुरस्कार
करवाचौथ का त्यौहार पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों और रिश्तों को मजबूत करता है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में करवाचौथ की पूर्वसंध्या पर करवाचौथ का त्यौहार पूरे धूमधाम और परंपरागत तरीके से मनाया गया. कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र मेगा ‘मेहँदी लगाओ प्रतियोगिता’ का आयोजन रहा जिसमे लगभग 150 छात्राओं ने भाग लिया. नई पहल के तौर पर इस बार कार्यक्रम का शुभारंभ बीए प्रथम वर्ष की छात्राओं ने किया. छात्राओं का उत्साहवर्धन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और प्राध्यापिकाओं ने किया. मेहँदी प्रतियोगिता का शीर्षक ‘मेहँदी लगाओ, पर्यावरण बचाओ’ रहा जिसमे नेहा ने प्रथम, सोनिया ने द्वितीय और कंचन एवं मुस्कान ने तृतीय स्थान हासिल कर क्रमश: 300, 200 और 100 रुपये का नकद पुरस्कार जीता. निर्णायक मंडल में डॉ इंदु गर्ग, डॉ संतोष कुमारी और प्रो भारती गुप्ता शामिल रहे. उनके साथ प्रो गीता प्रुथी, प्रो अन्नू आहूजा, डॉ भारती गुप्ता, डॉ इंदु गर्ग, प्रो सुषमा, डॉ सुशीला बेनीवाल, डॉ संतोष कुमारी,प्रो मोनिका खुराना, डॉ दीपा वर्मा, डॉ प्रियंका चांदना, डॉ रेखा रानी, प्रो सविता पुनिया, प्रो प्रवीण कुमारी, प्रो दीपिका अरोड़ा, डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ जगमती, प्रो किरण मलिक, दीपक मित्तल मौजूद रहे. विदित रहे की भारत वैसे भी त्योहारों और विविध आस्थाओ का देश है तथा यहाँ मनाया जाने वाला हरपर्व अनोखा एवं आकर्षक है. उत्तर भारत में मनाए जाने वाले करवाचौथ के पर्व का यहाँ के लोगो के दिलों में ख़ास स्थान है. हिन्दू सनातन पद्धति में करवाचौथ सुहागनो का महत्वपूर्ण त्यौहार माना गया है. यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है जिसे सुहागन स्त्रियाँ बड़ी श्रद्धा के साथ मनाती हैं. इसके पश्चात लगभग 1000 छात्राओं ने डीजे के गीतों पर जमकर डांस किया और अपने जोश एवं जज्बे का परिचय दिया. विविधता में एकता का भाव लिए छात्राओं ने भिन्न-भिन्न गीतों पर जमकर धमाल मचाया.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की ‘मम सुख सौभाग्य पुत्र पौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये कर्क चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये’ का भाव लिए करवाचौथ पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों और रिश्तों को मजबूत करने वाला त्यौहार है. कॉलेज की छात्राओं एवं प्राध्यापिकाओं को पहले से इस भावनात्मक त्यौहार के प्रति जागरूक करना ही इस प्रकार के आयोजनो को मनाने का ध्येय है. कामयाबी के साथ उन्हें जीवन में खुशियाँ और शान्ति मिले ऐसी मंगल कामना कॉलेज करता है. उन्होनें कहा की चूँकि करवाचौथ एक पारम्परिक पर्व है इसलिए इस मौके पर मेहँदी की प्रतियोगिता का आयोजन करना बनता ही है और इसका भी एक अपना ही चाव है.
डॉ मोनिका खुराना ने अपने आशीर्वचन में कहा की हर सुहागन स्त्री के लिए करवाचौथ का व्रत काफी महत्वपूर्ण होता है. प्यार और आस्था के इस पर्व पर सुहागन स्त्रियां पूरा दिन उपवास रखकर भगवान से अपने पति की लंबी उम्र और गृहस्थ जीवन में सुख की कामना करती हैं. करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. उन्होनें कहा की‘करवाचौथ’ दो शब्दों से मिलकर बना है’करवा’ यानी ‘मिट्टी का बरतन’ और ‘चौथ’यानि ‘चतुर्थी’. इस त्योहार पर मिट्टी के बरतन यानी करवे का विशेष महत्व है और यह माना जाता है की करवाचौथ की कथा सुनने से विवाहित महिलाओं का सुहाग बना रहता है एवं उनके घर में सुख, शान्ति और समृद्धि बनी रहती है. उन्होनें इस मौके का लाभ उठाते हुए प्रत्येक छात्रा और प्राध्यापिका को यह शपथ भी दिलाई की वे पर्यावरण की भी लम्बी आयु की कामना करेंगे. वक़्त आ गया है की हम अपने पतियों के साथ-साथ अपनी आने वाली पीढ़ी की भी चिंता आज से ही शुरू करे.
डॉ दीपा वर्मा ने कहा की सुहागन या पत्नियों के लिए करवाचौथ बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. इस पर्व पर महिलाएं हाथ में मेहँदी रचाकर और सोलह श्रृंगार कर अपने पति की पूजा कर उनके लिए व्रत रखती है. सुहागन महिलाये इस व्रत को पति की दीर्घायु के लिए रखती है. यह व्रत अलग-अलग प्रदेशों में वहां पर व्याप्त मान्यताओं के अनुरूप रखा जाता है. इन मान्यताओं में थोड़ा-बहुत अंतर तो हो सकता है परंतु सभी का सार और भाव एक ही होता है. उन्होनें इसे माताओ, बहनों, बेटियों और पत्नियोंके लिए सबसे बड़ा त्यौहार बताया और उन्हें ह्रदय से सदभावनाए संप्रेषित की.
रंग-बिरंगी और विविध डिज़ाइन वाली मेहँदी प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे जिन्हें प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने पुरस्कृत किया –
प्रथम नेहा बीए-द्वितीय
द्वितीय सोनिया बीए-द्वितीय
तृतीय कंचन एमकॉम- प्रथम
मुस्कान बीकॉम-तृतीय
सांत्वना तम्मना, ख़ुशी, संगीता, सपना, गीता

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