इंसान की आत्मा महान तथा दिव्य शक्तियों का भण्डार है: डॉ सीडीएस कौशल ( निदेशक साहित्य एवं संस्कृति प्रकोष्ठ )
–एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर (नेशनल इंटीग्रेशन कैंप) का चौथा दिन
–ऐसे पासवर्ड नहीं बनाने चाहिए जिनका अंदाजा आसानी से लग सके: आरएल सचदेवा
BOL PANIPAT, 24 अक्टूबर, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर (नेशनल इंटीग्रेशन कैंप) के चौथे दिन बतौर मुख्य वक्ता रोशन लाल सचदेवा पूर्व चीफ मैनेजर पंजाब नेशनल बैंक और डॉ सीडीएस कौशल निदेशक साहित्य एवं संस्कृति प्रकोष्ठ कुरुक्षेत्र विश्वविधालय ने और 17 राज्यों के 200 स्वयंसेवकों एवं प्रोग्राम ऑफिसर्स को अपने ज्ञान और अनुभव का लाभ दिया । इस अवसर पर कैंप समन्वयक डॉ आनंद कुमार कुरुक्षेत्र विश्वविधालय भी कार्यक्रम का हिस्सा बने । आरएल सचदेवा ने एटीएम, क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं के इस्तेमाल के समय जरुरी दिशा निर्देश और सावधानियाँ बरतने के टिप्स दिए । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ तेनजिन नोर्जोम भूटिया, डॉ शशीकला कुमारी, डॉ एन मंजू भार्गवी और डॉ परमिंदर कौर ने पौधा-रोपित गमला भेंट करके किया । मंच संचालन डॉ संतोष कुमारी ने किया । सात दिवसीय कैंप के चौथे दिन सभी स्वयंसेवकों ने प्रातः काल में योग और ध्यानशाळा में हिस्सा लिया और श्रमदान किया । सांयकालीन सत्र में स्वयंसेवकों को दोपहर के भोजन के बाद स्थानीय एतिहासिक स्थल काला अंब (पानीपत) भ्रमण पर ले जाया गया । भारत के इतिहास में जिला पानीपत का अत्यंत गौरवशाली स्थान है । कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के समय पांडवों ने दुर्योधन से जो पांच गांव मांगे थे उनमें ‘पानीपत’ भी एक था । बाद में इसका नाम पानीपत रखा गया । यंही तीन प्रमुख लड़ाईयां लड़ी गईं जिन्होंने भारतीय इतिहास की दिशा ही बदल दी ।
सांस्कृतिक गतिविधियों में जम्मू और कश्मीर से नदीम अहमद शेख ने पारंपरिक नृत्य (पहाड़ी) पेश किया । सिक्किम से सुप्रिया छेत्री द्वारा सोलो कथक और सिक्किम टीम द्वारा सिक्किम में दिवाली उत्सव की झलक समीर राय, एरोन गुरुंग, आशीष खाती, देबिशेश प्रधान, फिची डेम भूटिया, नम्रता गुरुंग, हेलिना राय, श्रीजना सुब्बा, सुषमा सेवा, अभिषेक शर्मा, योगेश अधिकारी, आदर्श शर्मा, कबिता प्रधान, दिक्च्य लामिचाने और राजीव राय ने दिखाई । देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर (मध्य प्रदेश) की टीम जिसमें सुमित बेडेकर, पूजा अडानिया, सुभाष, यश बोयट, लक्ष्मी वास्केल, तनीषा गोस्वामी, महेश तोमर और शिवानी यादव शामिल थे ने मध्य प्रदेश की आदिवासी संस्कृति को दर्शाता हुआ आदिवासी समूह लोक नृत्य प्रस्तुत किया ।
आरएल सचदेवा पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व चीफ मेनेजर ने कहा कि एटीएम के उपयोग के दौरान हमें कुछ सावधानियां अवश्य बरतनी चाहिए अन्यथा हमारे लिए बड़ी मुश्किल पैदा हो सकती है । एटीएम कार्ड अत्यधिक गोपनीय और सुरक्षित प्रकार से रखें तथा कार्ड पर पासवर्ड लिखने की भूल कभी नहीं करनी चाहिए । हमें अपने हर लेनदेन के पूरा होने अथवा अधूरा रहने के बाद एटीएम में दिए गए कैंसल के बटन को कम से कम दो बार जरुर जरूर दबाना चाहिए । प्रत्येक लेनदेन की मिनी स्टेटमेंट जरूर लेनी चाहिए । बैंक की एसएमएस अलर्ट सर्विस को जरुर लेना चाहिए । यदि हमारा एटीएम कार्ड काम नहीं करता है तो इसे अलग-अलग मशीनों पर आजमाना नहीं चाहिए । हमें ऐसे पासवर्ड नहीं बनाने चाहिए जिनका अंदाजा आसानी से लग सके जैसे कि हमारे घर, कार, बाइक, जन्म तिथि आदि । एटीएम के प्रयोग के समय हमें किसी दूसरे व्यक्ति की मदद बिलकुल नहीं लेनी चाहिए । कार्ड गुम या चोरी होने पर संबंधित बैंक को तुरंत सूचना देनी चाहिए और ब्लॉक करवाना चाहिए । असुरक्षित स्थान के एटीएम के उपयोग से हमें बचना चाहिए । ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को सुरक्षित बनाने के बारे में बताते हुए श्री सचदेवा ने कहा कि हमें सुरक्षित नेटवर्क से ही अपने अकाउंट को एक्सेस करना चाहिए । वेबसाइट का एड्रेस चेक करके हमें उसपर सीधे ही जाना चाहिए न की किसी लिंक के माध्यम से किसी भी बदलाव को बैंक में तुरंत अपडेट करना चाहिए । उन्होनें कहा कि हर खाताधारक फिशिंग से सावधान रहना चाहिए. फिशिंग ऐसी ईमेल है जो खाताधारक को फंसाने के लिए भेजी जाती है । यह बैंक या किसी शॉपिंग वेबसाइट या बड़े कारोबारी संस्थान से भेजी हुई प्रतीत होती हैं जिसके माध्यम से खाताधारक की व्यक्तिगत जानकारी मांगने की कोशिश की जाती है ताकि उसके खाते में पड़े पैसे साफ़ किये जा सके । उन्होनें कहा कि हमें अपना पासवर्ड कठिन बनाना चाहिए और इसे हर महीने बदल देना चाहिए । हमें किसी भी साइट पर अपने खाते या कार्ड की डीटेल सेव नहीं करनी चाहिए. सावधानी से इस्तेमाल करने पर ऑनलाइन से अच्छी सुविधा कोई नहीं है ।
डॉ सीडीएस कौशल ने कहा कि हमारी आत्मा महान तथा दिव्य शक्तियों का भण्डार है । सुख और शान्ति का आगार है । हम अपने आत्म स्वरूप तथा उसके सच्चे आनन्द को भूलकर ही संसार के क्षणिक सुखों में आसक्त होकर उनकी प्राप्ति के लिये साँसारिक विषयों में भटक रहे हैं । यदि हम अपनी महान आत्मा की थोड़ी सी भी झाँकी प्राप्त कर लें, यदि इसके शताँश आनन्द का भी आस्वादन कर लें, तो यह ध्रुव सत्य है कि फिर हमें साँसारिक विषयों का क्षणिक सुख बिलकुल नीरस प्रतीत होने लगेगा । जिस व्यक्ति ने मधु के स्वाद को नहीं चखा है वह गुड़ की मिठास को ही आनन्द मानता है और उसकी प्राप्ति के लिये उचित−अनुचित तरीके से रात-दिन प्रयत्न करता है । किन्तु जो मनुष्य एक बार मधु के माधुर्य का आस्वादन कर लेता है वह फिर गुड़ में आसक्त नहीं होता । अतः सच्चे सुख और शान्ति के अभिलाषी का परम कर्तव्य है कि वह अपने आत्म-स्वरूप को साक्षात करे । अर्थात अपनी आत्मिक शक्तियों का विकास करे । एनएसएस के स्वयंसेवक को इसी आत्म-शक्ति को खुद मैं जागृत करना चाहिए ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की इन्टरनेट, ऑनलाइन बैंकिंग या इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग दो तरीको से की जा सकती है । पहले तरीके में कार्ड आदि की जरुरत नहीं होती जिसे ऑनलाइन बैंकिंग, आईडी अथवा कार्ड और पासवर्ड, ओटीपी, सीवीवी, आदि के माध्यम से किया जाता है । दूसरे प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में कार्ड का प्रयोग होता है जैसे की एटीएम से पैसे निकालना या बाजार में पॉइंट ऑफ़ सेल के माध्यम से भुगतान करना । इन दोनों प्रकार की ऑनलाइन बैंकिंग में अलग-अलग तरह के सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं । बैंक और ऑनलाइन व्यवसाय करनेवाली कंपनियां लेनदेन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए नए-नए सुरक्षा उपाय लागू करती रहती हैं जिन्हें आरएल सचदेवा ने सटीक और सुन्दर तरीके से आज समझाया है ।
डॉ आनंद कुमार ने कहा कि जिन मामलों में कार्ड की जरुरत नहीं पड़ती और बैंकिंग के लिए आईडी, पासवर्ड आदि की जरुरत होती है उन मामलों में फ्रॉड करनेवालो की संख्या जयादा होती है क्योंकि वे लुभावने प्रस्ताव देकर फ़ोन, ईमेल आदि से जानकारियाँ प्राप्त कर लेते हैं और फिर फ्रॉड को अंजाम देते है । आज दी गई जानकारी अवश्य ही हमें सचेत और जागरूक बनाएगी ।

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