सबसे प्राचीन योग्य पद्धति है राजयोग.
– 5000 वर्ष पहले स्वयं परमात्मा ने सिखाया
BOL PANIPAT : ब्रह्माकुमारी के ज्ञान मानसरोवर रिट्रीट सेंटर में आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में माउंट आबू से राजयोगी बीके छोटेलाल, डॉक्टर राजीव, ज्ञान मानसरोवर निदेशक बीके भारत भूषण एवं पानीपत सर्किल इंचार्ज सहित सैकड़ों ब्रह्मावर्त भी उपस्थित रहे।बीके छोटेलाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत की सबसे प्राचीन योग पद्धति है राजयोग। जिसे आज से करीब 5000 वर्ष पहले स्वयं परमात्मा ने धरा पर आकर मानव मात्र को सिखाया। राजयोग से मनुष्य के जीवन में हेल्थ, वेल्थ और हैप्पीनेस ये तीनों एक साथ आती हैं। ब्रह्माकुमारी के हर सेवा केंद्र पर चाहे देश हो या विदेश सभी स्थानों पर रोजाना नियमित रूप से राजयोग का अभ्यास किया जाता है
डॉ राजीव ने स्वास्थ्य संबंधित टिप्स देते हुए कहा वर्तमान समय खाने पीने की हर वस्तु पर रासायनिक पदार्थ का छिड़काव किया जाता है। इसके सेवन करने से हमारे शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ता है और यही कारण है जो दिन प्रतिदिन बीमारियां बढ़ती जा रही है. ऐसे रसायन युक्त खाद्य पदार्थ को पचाने के लिए हमें रोजाना व्यायाम या प्राणायाम अवश्य करना चाहिए।
जी.आर.सी रिट्रीट सेंटर निदेशक बीके भारत भूषण ने कहा कि भारत के लिए कितने गौरव की बात है जो आज यहां के योग को विश्व योग दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। पानीपत सर्किल इंचार्ज राजयोगिनी बीके सरला दीदी ने राजयोग मेडिटेशन का कॉमेंट्री के द्वारा अभ्यास कराया। बीके के रेनू ने पूरी सभा को प्राणायाम व योगा कराया और इस कार्यक्रम में मंच का संचालन बीके सुनीता बहन ने किया

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