‘हिंद की चादर’ में जीवंत हुई गुरु तेग बहादुर की बलिदानी गाथा
-गुरु तेग बहादुर की 350वीं स्मृति,‘हिंद की चादर’ का भव्य मंचन भावुक कर गया दर्शकों को
-लाइट एंड साउंड शो में जीवंत हुई गुरु तेग बहादुर की शहादत
-धर्म, मानवता और त्याग की अमर गाथा, पानीपत में गूंजा ‘हिंद की चादर’
-आधुनिक तकनीक संग इतिहास का संगम, कलाकारों ने रचा गुरु तेग बहादुर का जीवंत संसार
BOL PANIPAT , 20 नवंबर। सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर की 350वीं वर्षगांठ पर आर्य पीजी महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में ‘हिंद की चादर’ का भव्य आयोजन किया गया। थ्री डी लाइट एंड साउंड प्ले से सुसज्जित इस मंचन में 20 कलाकारों ने गुरु तेग बहादुर के आदर्शों, त्याग और सत्य के प्रति उनकी अडिग निष्ठा को बेहद प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया।
कलाकारों ने मंच पर गुरु साहिब के बचपन, उनकी आध्यात्मिक प्रवृत्ति, ध्यान-समाधि और मुगल शासन के दौरान कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचारों को संवेदनशील ढंग से दर्शाया। शो का प्रमुख केंद्र बिंदु वह क्षण रहा, जब अत्याचार के सामने झुकने के बजाय गुरु तेग बहादुर ने निर्भीक होकर कहा धर्म की रक्षा के लिए मैं अपना शीश दे सकता हूं, परंतु धर्म नहीं बदलूगा।

उनके तीन महान अनुयायी भाई मती दास, भाई सती दास और भाई दयालाकी शहादत भी मंचन में अत्यंत मार्मिक ढंग से उभरी, जिसने सभागार में मौजूद दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। दादा कुशाल दहिया का बलिदान प्रस्तुति का सबसे भावुक दृश्य रहा। गंभीर नरेशन, गूंजते वार-गायन, लाल व सुनहरी रोशनी और 3 डी प्रोजेक्शन ने दर्शकों को उस कालखंड में पहुँचा दिया, जब गुरु तेग बहादुर ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। अंतिम दृश्यों में शांति, सहिष्णुता और त्याग का सशक्त संदेश उज्ज्वल प्रकाश और भावनात्मक वॉयस ओवर के साथ प्रस्तुत किया गया।
अतिरिक्त उपायुक्त एवं निगम आयुक्त डॉ. पंकज ने कहा कि यह मंचन गुरु तेग बहादुर की विरासत को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने का एक उत्कृष्ट माध्यम है। शो के अंत में प्रमुख कलाकारों और आयोजकों को स्थानीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मेयर कोमल सैनी, जिला अध्यक्ष दुष्यंत भट्ट, पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह, डीईओ राकेश बूरा, प्राण रत्नाकर, नायब तहसीलदार सौरभ शर्मा, सरदार कुलवंत सिंह, मास्टर मुकेश, प्रिंसिपल डॉ. रविंदर जागलान, पवन नाजऱ सहित बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।

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