Thursday, April 16, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का शानदार समापन  

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at February 28, 2026 Tags: , , , ,

अंतिम दिवस विज्ञान प्रश्नोतरी, डॉ सीवी रमन मेमोरियल लेक्चर तथा पारितोषिक वितरण समारोह का आयोजन 

 विषय विशेषज्ञ डॉ अनुपम अरोड़ा रहे मुख्य वक्ता 

    डॉ सीवी रमन ने की समुद्र के गहरे नीले रंग की विवेचना 

    प्रकृति का सूक्ष्म अन्वेषण ही विज्ञान है 

    रमन इफ़ेक्ट वैज्ञानिक इतिहास की एक क्रांतिकारी घटना है : डॉ अनुपम अरोड़ा

      BOL PANIPAT , 28 फरवरी, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के विज्ञान संकाय के तत्वाधान में आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का शानदार समापन हो गया जिसके अंतिम दिन विज्ञान प्रश्नोतरी, डॉ सीवी रमन मेमोरियल लेक्चर तथा पारितोषिक वितरण समारोह का आयोजन किया गया जिसमें प्रधान दिनेश गोयल और उप-प्रधान राजीव गर्ग ने विजेताओं को पुरस्कार वितरित किये गए । पहले सत्र में साइंस क्विज का आयोजन किया गया जिसमें एसडी पीजी कॉलेज के राहुल, शिवम और अंकित की टीम ने बाजी मार प्रथम स्थान हासिल किया । तत्पश्चात भारतीय भौतिक वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ चन्द्रशेखर वेंकट रमन को श्रद्धा और उल्लास भाव के साथ याद किया गया । डॉ सीवी रमन मेमोरियल लेक्चर प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने दिया । उनके साथ भौतिक विभाग के अध्यक्ष डॉ बलजिंदर सिंह, प्रो प्रवीण आर खेरडे, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो संजय चोपड़ा, डॉ प्रियंका चांदना, डॉ राहुल जैन, डॉ रवि रघुवंशी, प्रो मयंक अरोड़ा, प्रो प्रवीण कुमारी, डॉ बिंदु रानी, प्रो प्रोमिला आदि कार्यक्रम का हिस्सा बने । डॉ अनुपम अरोड़ा जो स्वयं भौतिक विज्ञान विषय के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और शोधार्थी है और जिन्हें इस विषय से विशेष रूप से लगाव है, ने बीएससी, बीसीए एवं एमएससी के छात्र-छात्राओं से बातचीत की और उनकी भविष्य की योजनाओं तथा सर सीवी रमन द्वारा किये गए कार्यों एवं उपलब्धियों पर पॉवर पॉइंट के माध्यम से चर्चा की । विदित रहे कि वर्ष 1928 में भारतीय भौतिक विज्ञानी सर चन्द्रशेखर वेंकट रमन के द्वारा रमन प्रभाव का आविष्कार किया था । रमन प्रभाव का सम्बन्ध प्रकाश के प्रकीर्ण से है । विज्ञान के क्षेत्र में इतनी बड़ी सफलता हासिल करने के लिये भौतिक विज्ञान में चन्द्रशेखर वेंकट रमन को नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया जो हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है । अंत में विजेता विद्यार्थियों को प्रधान दिनेश गोयल और उप-प्रधान राजीव गर्ग द्वारा पुरस्कारों और सर्टिफिकेट्स से नवाजा गया ।

      प्रथम सत्र में विज्ञान क्विज का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न कालेजों के विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया । क्विज मास्टर की भूमिका डॉ प्रियंका चांदना और प्रो प्रवीण कुमारी ने निभाई । क्वालिफ्यिंग राउंड के बाद अंतिम चरण के लिए कुल 8 टीमों का चयन किया गया और प्रत्येक टीम में 3 विद्यार्थी शामिल रहे । रैपिड फायर राउंड, बहुविकल्पी प्रश्न, विडियो राउंड, पॉवर पॉइंट राउंड के माध्यम से रोचक प्रश्न विद्यार्थियों से पूछे गए ।   

      डॉ अनुपम अरोड़ा ने महान वैज्ञानिक रमन को याद करते हुए कहा कि पहले लोग यह मानते थे कि समुद्र का गहरा नीला रंग असल में आसमान के नील रंग के प्रतिबिम्ब के कारण है । 1921 में जब डॉ रमन इंग्लैंड से भारत लौट रहे थे उन्होनें इस बात को ध्यान से देखा और फिर सिद्ध किया कि इसकी असली वजह प्रकाश का प्रकीर्णन है जिसमें प्रकाश पानी के अणुओं पर पडकर रौशनी का प्रकीर्णन करता है इससे समुद्र गहरा नीला दिखता है । उन्होनें कहा कि क्रिस्टल की स्पेक्ट्रम प्रकृति, स्टिल डाइनेमिक्स के बुनियादी मुद्दे, हीरे की संरचना और गुणों एवं अनेक रंगदीप्त पदार्थो के प्रकाशीय आचरण पर सीवी रमन का किया शोध आज भी मूल्यवान है । असल में 28 फरवरी 1928 भारत के लिए एक महान दिन था जब प्रसिद्ध भारतीय भौतिक शास्त्री चन्द्रशेखर वेंकट रमन के द्वारा भारतीय विज्ञान के क्षेत्र में आविष्कार हुआ जिसे बाद में रमन इफ़ेक्ट के नाम से जाना गया । रमन विज्ञान के क्षेत्र के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने भारत में ऐसे आविष्कार पर शोध किया था । रमन आधुनिक युग के पहले ऐसे भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्होंने विज्ञान के संसार में  भारत को बहुत ख्याति दिलाई । भारत सरकार ने विज्ञान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के कारण उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिया है । साथ ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी उन्हें प्रतिष्ठित ‘लेनिन शांति पुरस्कार’ से सम्मानित किया है । भारत में विज्ञान को नई ऊंचाइयां प्रदान तथा स्वाधीन भारत में विज्ञान के अध्ययन और शोध को जबरदस्त प्रोत्साहन देने का श्रेय सर रमन को ही जाता है । विज्ञान और अंग्रेज़ी साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी गहरी रूचि थी और यही आगे चलकर उनकी वैज्ञानिक खोजों का कारण बनी । भौतिक में एमए के दौरान वे कक्षा में कम और कॉलेज की प्रयोगशाला में ही अपने प्रयोग और खोजें करने में व्यस्त रहते । प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि भारत के विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की अहम भूमिका रही है तथा विज्ञान के क्षेत्र को सदा प्राथमिकता दी गयी है । रमन इफेक्ट का इस्तेमाल आज भी कई जगहों पर हो रहा है । जब भारत के चंद्रयान-1 ने चांद पर पानी होने का ऐलान किया था तो इसके पीछे भी रमन इफेक्ट का ही कमाल था । अनेक पुरस्कारों से सम्मानित सर रमन हर विद्यार्थी के आदर्श है । कड़ी मेहनत और वैज्ञानिक सोच का कोई विकल्प नहीं है और यदि हम ऐसी सोच खुद में विकसित कर ले तो बुलंदियां हमारे कदम चूमेंगी । सर रमन की याद में विद्यार्थीयो के लिए इस प्रकार के सेमीनार को आयोजित करने का उद्देश्य उन मे विज्ञान के प्रति लगाव को पैदा करना और वैज्ञानिक सोच एवं शोध को बढ़ावा देना है । वैज्ञानिक सोच के बढ़ने से ही हम एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तथा वैज्ञानिक बन सकते है ।

      आज जो मॉडल विद्यार्थियों के समक्ष रखे गए उनमे बिना ड्राइवर वाली रोबोट कार, सेंसर्स, कैमरों और रेडार तकनीक का उपयोग करके बिना मानव इनपुट के चलने वाला मॉडल प्रमुख रहा जिसे सभी ने सराहा । टेंसर 2026 में लेवल 4 ऑटोनॉमी वाली कार लेकर आया है । भारत में भी विनरिन नामक ड्राइवरलेस कार विकसित की गई है और ये कारें 24 घंटे और 7 दिन  चलने में सक्षम हैं और सुरक्षा, आराम तथा यातायात को सुचारू बनाने का वादा करती हैं । इस मॉडल को बीसीए प्रथम वर्ष के छात्र परमिंदर सिंह ने बनाया । 

      एक और मॉडल जो बीएससी प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों शिया, दीपक, हिमांशु और विनीत ने बनाया आकर्षण का केंद्र रहा । इसका उद्देश्य सतत विकास के लिए ऊर्जा-कुशल, स्वच्छ और कम प्रदूषण वाली विधियों का विकास करना है जैसे सौर एवं पवन ऊर्जा, जल शोधन और अपशिष्ट प्रबंधन ।

      निधि देवी, गायत्री, मुस्कान, शिवानी, दीप्ति और मुस्कान द्वारा ‘कार्बन शुद्धिकरण’ पर बनाए गए मॉडल्स को भी खूब प्रशंशा मिली । असल में कार्बन शुद्धिकरण में सक्रिय कार्बन, फिल्टर और रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ग्रेफाइट या नैनोट्यूब से अशुद्धियाँ हटाकर 99.99% तक शुद्धता प्राप्त की जाती है । औद्योगिक कार्बन अवशोषण, अवसादन और अपकेंद्रण जैसी तकनीकों का उपयोग, कार्बनिक पदार्थों के कार्बनीकरण और आणविक छलनी विधियों के द्वारा शुद्धिकरण किया जाता है ।

      ऑटो लोड सेल जेल्स मॉडल में भी आगुन्तकों की खूब रूचि रही जिसे ऋतु, दुर्गा और दृष्टि ने तैयार किया ।

      गणित का मॉडल सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहा जिसे किरण, शिवानी, नैंसी,, मनीषा और प्रिया ने बनाया । असल में फिबोनाची अनुक्रम संख्याओं की एक ऐसी श्रृंखला है जिसमें प्रत्येक संख्या अपने से पहले की दो संख्याओं के योग के बराबर होती है । उदाहरण के लिए 0, 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21 इत्यादि । 

      विज्ञान प्रश्नोतरी के परिणाम इस प्रकार रहे-

      प्रथम राहुल (बीएससी-III)

      शिवम (बीएससी-III)

      अंकित (बीएससी-I)

                 एसडी पीजी कॉलेज पानीपत  

      द्वितीय जतिन (बीसीए-II)

      आर्यन (बीएससी-I)

      दीपक (बीसीए-II)

      एसडी पीजी कॉलेज पानीपत 

      तृतीय शिवानी (बीएससी-I)

      मन्नत (बीएससी-II)

      शिवानी (बीएससी-III)

      देशबंदु राजकीय महाविधालय पानीपत 

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