Monday, May 18, 2026
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जब तक बुद्धि पावन और पवित्र न हो तो तब तक परमात्मा का प्राकट्य नहीं होता : स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले)


BOL PANIPAT : श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2083 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में चार दिवसीय संत समागम कार्यक्रम के प्रथम दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि जब तक बुद्धि पावन और पवित्र न हो तो तब तक परमात्मा का प्राकट्य नहीं होता। जब नवरात्रों में व्यक्ति व्रतादि से अपनी बुद्धि पवित्र करता है तो श्री रामनवमी पर राम जी का प्राकट्य होता है।  सनातन संस्क्ृति किसी की बनाई नहीं अपितु अनादि है। एक राजा ने दरबार में प्रश्न किया कि ऐसी क्या चीज है जिसके बनने से सब कुछ बन जाए, जिसके बिगड़ने से सब कुछ बिगड़ जाए। सब मंत्रियों ने उत्तर दिए लेकिन सम्राट संतुष्ट नहीं हुआ। एक खास मंत्री ने कहा कि मुझे समय चाहिए। सम्राट ने 1 हफ्ते का समय दे दिया। मंत्री घर आकर सोचता रहा लेकिन उत्तर न मिला। फिर मंत्री को नदी किनारे एक छोटा बालक मिलता है मंत्री उस बालक से यहीं सवाल करता है तो बालक कहता है कि वह उत्तर बुद्धि है क्योंकि बुद्धि के बनने से ही व्यक्ति बनता है और बुद्धि खराब हो जाए तो व्यक्ति अपनी दशा से गिर जाता है। यह सुनकर मंत्री उस बालक को अपने घर ले आता है। मंत्री अगले दिन राजा को उसका उत्तर बता देता है तो राजा प्रसन्न होता है। इसके बाद व पूछता है कि बुद्धि करती क्या है। यह प्रश्न मंत्री घर आकर बालक को बताता है तो बालक कहता है कि वह अगले दिन स्वयं दरबार में जाएगा। दरबार में पहुँचकर बालक राजा को कहता है कि आप यह प्रश्न गुरू रूप में अथवा शिष्य रूप में पूछ रहे हैं तो राजा कहता है कि मैं शिष्य बनकर यह प्रश्न पूछ रहा हूँ। फिर बालक कहता है कि आप सिंहासन पर बैठें और मैं नीेचे खड़ा रहूँ यह उचित नहीं है। तो फिर राजा उसे अपना सिंहासन दे देता है। अब बालक उत्तर देते हुए कहता है कि बुद्धि यहीं करती है ऊपर वाले को नीचे और नीचे वाले को ऊपर। इससे पूर्व कलानौर से पधारे 108 महन्त भाई  श्री रामसुख दास जी महाराज ने  ‘‘हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता’’ भजन सुनाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। इस अवसर पर रमेश चुघ प्रधान, हरनाम चुघ, उत्तम आहूजा, ईश्वर लाल रामदेव, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, अमन रामदेव, ओम प्रकाश चौधरी, गोबिन्द लाल चुघ, तिलक राज चुघ, पवन चौधरी, भूषण नन्दा, जितेन्द्र जुनेजा, धर्मवीर नन्दवानी, गुलशन नन्दवानी, कर्म सिंह रामदेव, गोल्डी बांगा, अमर वधवा, सुरेन्द्र जुनेजा, हरनारायण जुनेजा, श्याम लाल सपड़ा, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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