Friday, April 17, 2026
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17 राज्यों के स्वयंसेवकों ने सांस्कृतिक गतिविधियाँ पेश कर मोहा सबका मन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 26, 2024 Tags: , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर (नेशनल इंटीग्रेशन कैंप) का छठा दिन

नए छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है अभिमुखीकरण कार्यक्रम: डॉ दिनेश कुमार, स्टेट एनएसएस ऑफिसर  

मिट्टी का पुनरुद्वार हमारे पर्यावरण का पुनरुद्वार है: ज्योति भारद्वाज ईशा कार्यकर्ता ईशा फाउंडेशन पानीपत

BOL PANIPAT , 26 अक्टूबर,  एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर (नेशनल इंटीग्रेशन कैंप) के छठे दिन 17 राज्यों के 200 स्वयंसेवकों को बतौर विशिष्ट मेहमान डॉ दिनेश कुमार स्टेट एनएसएस अधिकारी और कैंप समन्वयक डॉ आनंद कुमार कुरुक्षेत्र विश्वविधालय ने सुबह के सत्र संबोधित किया । तत्पश्चात ईशा फाउंडेशन पानीपत से पधारे कार्यकर्ताओं ने ‘मिट्टी बचाओ’ विषय पर ज्ञानवर्धन किया जिसमे उत्कर्ष वर्मा, ज्योति भारद्वाज, अक्षित जुनेजा और आस्था प्रमुख रूप से उपस्थित रहे । 

सांयकालीन सत्र में बतौर विशिष्ट मेहमान श्रवण राम क्षेत्रीय निदेशक एनएसएस निदेशालय युवा एवं खेल मंत्रालय नई दिल्ली, डॉ जितेन्द्र कुमार प्रोग्राम समन्वयक चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी जींद और मनोज कुमार फील्ड ऑफिसर खेल एवं युवा मंत्रालय दिल्ली उपस्थित रहे । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ नागेन्द्र कुमार, डॉ तेनजिंग नोर्जोम भूटिया, डॉ शशीकला कुमारी, डॉ एल मंजू भार्गवी, डॉ राम कुमार वर्मा, डॉ फारुख अहमद वनी, डॉ आरती दुबे, डॉ गोपाल लकुम, प्रज्ञानंद मते और डॉ परमिंदर कौर ने किया । मंच संचालन डॉ संतोष कुमारी ने किया । सात दिवसीय कैंप के छठे दिन कर्नाटक राज्य के स्वयंसेवकों ने स्वादिष्ट इडली-साम्भर खिला कर सबके मुंह में पानी ला दिया । अंतिम सत्र में प्रत्येक राज्य के स्वयंसेवकों ने कम से कम एक सांस्कृतिक गतिविधि पेश की जो भारती की अनेकता में एकता का प्रतीक बनकर दिखी । कल इस कैंप का पुरस्कार वितरण और समापन समारोह आयोजित होगा । 

डॉ दिनेश कुमार ने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है की इस कैंप में पधारे रिसोर्स पर्सन्स सभी प्रतिभागियों को पूरे आत्मविश्वास, साहस और इस महान राष्ट्र के विभिन्न पहलुओं के बारे में ज्ञान दे कर और बहुत कुछ सिखा कर गये है । इस कैंप में आकर उन्हें भी अहसास हुआ है कि हमारा राष्ट्र वास्तव में इतनी साड़ी विविधताओं के बावजूद भी एकीकृत है । 

डॉ आनंद कुमार ने कहा कि भारत सरकार के अभिमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन कई तरह से किया जाता है । नए छात्रों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम में छात्रों को नए वातावरण से परिचित कराया जाता है । उन्हें पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति, परीक्षा, और मूल्यांकन योजना के बारे में जानकारी दी जाती है । इसके अलावा उन्हें कॉलेज के नियम-कानून, आचार संहिता और परिसर की सुरक्षा के बारे में भी बताया जाता है । शिक्षकों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों के नेतृत्व में सत्र आयोजित किए जाते हैं और इन सत्रों में शिक्षण के सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है । कर्मचारियों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम में कंपनी में भर्ती होने वाले कर्मचारियों को परिचित कराया जाता है । इस कार्यक्रम में नियम-कानून, नीतियां, प्रचलित प्रथाएं, नैतिकता, मानक, टीम निर्माण, संगठनात्मक मिशन एवं विज़न और समय-समय पर नीतियों में संशोधन के बारे में जानकारी दी जाती है ।

ज्योति भारद्वाज ईशा फाउंडेशन पानीपत ने कहा कि पूरे संसार में 300 केन्द्रों और 7 लाख स्वयंसेवकों के समर्थन के साथ ईशा फाउंडेशन मानव खुशहाली के सभी आयामों को संबोधित करती है । अपने भीतरी रूपांतरण के शक्तिशाली योग कार्यक्रमों से लेकर समाज, पर्यावरण और शिक्षा के लिए अपनी प्रेरणादायक परियोजनाओं तक ईशा की गतिविधियां एक समावेशी संस्कृति है । ईशा फाउंडेशन की गतिविधियों ने हर तरह की आर्थिक, सांस्कृतिक या धार्मिक पृष्ठभूमि लोगों तक पहुंचाई है । फाउंडेशन की सामाजिक परियोजनाएँ इस तरह तैयार की गई हैं कि उनका क्रियान्वन और संचालन आसानी से हो सकें । संसार में मानव सशक्तिकरण और सामुदायिक कायाकल्प के आदर्श नमूने फाउंडेशन का मुख्य आधार है । ‘माटी बचाओ अभियान’ की शुरुआत 21 मार्च को लन्दन से सदगुरु ने की थी । ‘मिट्टी बचाओ आंदोलन’ मिट्टी और धरती के प्रति जागरूकता पैदा करने वाला अभियान है । 3 अरब से अधिक लोगों का समर्थन जुटाने के लिए सदगुरु ने अकेले मोटरसाइकिल की सवारी करते हुए 24 देशों की तीस हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर इसे दक्षिण भारत में समाप्त किया । इस अभियान का उद्देश्य दुनिया भर में मिट्टी के खतरनाक क्षरण के बारे में वैश्विक जागरूकता लाना है । खराब होती मिट्‌टी खाद्य और जल सुरक्षा के लिए विनाशकारी साबित हो रही है । जलवायु आपदा और विलुप्त होती प्रजातियां भी इसी मिट्‌टी की गुणवत्ता से जुड़ी हैं । 

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि ऊपरी मिट्टी के पहले 12 से 15 इंच में जो जीवन है वही वास्तव में हमारे अस्तित्व का आधार है । यदि मनुष्य अपने अस्तित्व के आधार से सचेतन रूप से जुड़ा ही नहीं है तो हम उसे जीवन की प्रकृति और सृष्टि के स्रोत के प्रति सचेत नहीं कर सकते । प्रत्येक युवा को इस आंदोलन में शामिल होना चाहिए । मिट्टी को लेकर यदि देश में आवश्यक जागरूकता आ गई तो हम अपनी धरती और आने वाली पीढ़ियों को बचा पायेंगे । मिट्टी का पुनरुद्वार हमारे पर्यावरण का पुनरुद्वार है ।

     डॉ तेनजिन नोर्जोम भूटिया (सिक्किम) ने कहा कि सिक्किम राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय एकता शिविर में भाग लेने वाले एक कार्यक्रम अधिकारी के रूप में उनका अनुभव समृद्ध और प्रेरणादायक है । विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों के बीच साझा की गई विविध संस्कृतियों, परंपराओं और मूल्यों ने राष्ट्रीय स्तर पर एकता की मेरी समझ, महत्व और आकर्षण को गहरा किया है । सहयोगात्मक गतिविधियों, व्याख्यान सत्रों और चर्चाओं ने भाईचारे और आपसी सम्मान की भावना को बढ़ावा दिया है जिससे भारत जैसे बहुसांस्कृतिक राष्ट्र में एकीकरण के महत्व को बल मिला है । कार्यक्रम अच्छी तरह से आयोजित किया गया और हर दिन परोसे जाने वाले स्वादिष्ट भोजन उन्हें सैदेव याद रहेगा । विभिन्न दृष्टिकोणों के संपर्क से निस्संदेह युवाओं के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा देने में उन्हें पूरी मदद मिलेगी । इस शिविर में मैंने न केवल आमंत्रित विशेषज्ञों और अनुभवी अधिकारियों से बल्कि देश भर के प्रिय स्वयंसेवकों से भी बहुत कुछ सीखा है । मैं ईश्वर, सिक्किम एनएसएस सेल और अपने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान गंगटोक की छात्रों को ऐसा अवसर देने के लिए आभारी हूं ।

डॉ परमिंदर कौर बेबे नानकी खालसा कॉलेज फॉर वुमेन धारीवाल (पंजाब) ने कहा कि इस राष्ट्रीय एकता शिविर के माध्यम से चंडीगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की टीमें बहुत कुछ सीख रही हैं । स्वयंसेवकों के लिए टीम भावना और विभिन्न राज्यों की संस्कृति को समझने का यह एक बड़ा अवसर है ।

डॉ. आरती एसडी (पीजी) कॉलेज अम्बाला कैंट ने कहा कि कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र के एनएसएस स्वयंसेवक एसडी (पीजी) कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय एकता शिविर में भाग ले रहे हैं । यह सभी स्वयंसेवकों के लिए एक शानदार अनुभव है । टीम भावना सीखना और इस एनआईसी में शानदार अनुभव प्राप्त करना यादगार रहा । यह एनआईसी अनुभव और भविष्य की संभावनाओं में वास्तविक रूप से एकीकरण है । 

डॉ मोनिका जीसीजी पलवल कुरूक्षेत्र ने कहा कि इस राष्ट्रीय एकता शिविर का अनुभव परिवर्तनकारी रहा है जो एकता और सांस्कृतिक विविधता के जीवंत प्रदर्शन में राज्यों के कार्यक्रम अधिकारियों और स्वयंसेवकों को एक साथ लाया है । एक यादगार घटना सांस्कृतिक संध्या थी जहां विभिन्न राज्यों के छात्रों ने पारंपरिक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए जिनमें से प्रत्येक ने अपने क्षेत्र की अनूठी विरासत का प्रदर्शन किया । प्रत्येक प्रदर्शन को हर किसी का उत्साहवर्धन और समर्थन करते हुए देखने से एकजुटता की वह भावना प्रबल हुई जिसके लिए एनएसएस खड़ा है । इसके अतिरिक्त, सामाजिक जिम्मेदारी और युवा सशक्तिकरण पर शैक्षणिक सत्र व्यावहारिक और प्रेरक दोनों रहे हैं जो हम सभी को सकारात्मक बदलाव की दिशा में कार्रवाई योग्य कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं । 

डॉ शशीकला कुमारी शान्ति प्रसाद जैन कॉलेज बिहार ने कहा कि एक और अविस्मरणीय क्षण सुबह का योग सत्र है । यह प्रत्येक दिन की एक ताज़ा शुरुआत रही है, जो न केवल शारीरिक कायाकल्प बल्कि मानसिक स्पष्टता भी प्रदान करती है । इन शुरुआती घंटों में उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा एक सामंजस्यपूर्ण स्वर स्थापित करती है जो हमें एकता की याद दिलाती है और हमारा लक्ष्य एनएसएस के माध्यम से जागरूकता को बढ़ावा देना है । इसके अलावा, शिविर का भोजन अनुभव का मुख्य आकर्षण रहा । महाराष्ट्र के पोहा से लेकर पंजाब के छोले-भटूरे तक प्रत्येक प्रसार ने हमें भारत के पाक परिदृश्य के माध्यम से एक आनंदमय यात्रा की पेशकश की है । यह एक भावनात्मक यात्रा भी रही है जो शब्दों में बयां नहीं की जा सकती है । जीवन के सभी क्षेत्रों के व्यक्तियों से घिरे होने के कारण, प्रत्येक ने एक अनूठी कहानी के साथ मेरे दिल और दिमाग को उन तरीकों से खोल दिया है जिनकी मुझे उम्मीद नहीं थी । बनी मित्रता, साझा की गई हँसी और उद्देश्य की सामूहिक भावना ने इस शिविर को दूसरे परिवार जैसा महसूस कराया है । कैंप से वापिस जाना कड़वा-मीठा पल होगा क्योंकि यहां का प्रत्येक दिन इस बात की याद दिलाता है कि हम समझ और करुणा के माध्यम से एक-दूसरे के जीवन पर कितना गहरा प्रभाव डाल सकते हैं । इस शिविर ने वास्तव में राष्ट्रीय गौरव की मेरी भावना को गहरा किया है और एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी के रूप में सेवा करने की मेरी प्रतिबद्धता को मजबूत किया है । मैं राष्ट्रीय एकता शिविर में भाग लेने का अमूल्य अवसर प्रदान करने के लिए केयूके एनएसएस सेल और मेरे कॉलेज के अधिकारियों की बहुत आभारी हूं । यूपेश कुमार अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ने कहा कि छत्तीसगढ़ के एनएसएस प्रतिभागीयों ने पानीपत में आयोजित राष्ट्रीय एकीकरण शिविर में हिस्सा लिया जो उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक अनुभव साबित हुआ । इस शिविर में उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं के साथ बातचीत और सांस्कृतिक आदान-प्रदान करने का अवसर मिला जिससे वे भारत की विविधता को और गहराई से समझ पाये । शिविर के दौरान लोकनृत्य, संगीत, नाट्य प्रस्तुतियों और सामूहिक चर्चाओं जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया जो राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हुआ हैं ।

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