रक्तदान के मिथकों और भ्रांतियों को तोड़ कर ही हम रक्तदान करने के भय से मुक्त हो सकते है: डॉ पूजा सिंघल रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी हरियाणा स्टेट ब्रांच चंडीगढ़ प्रायोजित पांच दिवसीय जिला स्तरीय यूथ रेड क्रॉस प्रशिक्षण शिविर का तीसरा दिन
खूबसूरत मुस्कराहट के लिए दांतों की देखभाल बहुत जरूरी है: डॉ अंकुर सब्भरवाल वरिष्ठ दंत्य चिकित्सक पानीपत
BOL PANIPAT , 23 नवम्बर. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में पांच दिवसीय जिला स्तरीय यूथ रेड क्रॉस प्रशिक्षण शिविर का आज तीसरा दिन रहा जिसमे बतौर मुख्य वक्ता डॉ अंकुर सब्भरवालवरिष्ठ दंत्य चिकित्सक पानीपत और डॉ पूजा सिंघल ब्लड डोनेशन रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत औररितु भारद्वाज सैंट जॉन एम्बुलेंस रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत ने व्यावहारिक ज्ञान और व्याख्यान दिया. विनोद कुमार डिप्टी सुपरइनटेंनडेंट रेडक्रॉस एवं शिविर निदेशक तथा कला भारद्वाज प्रवक्ता रेड क्रॉस नर्सिंग पानीपत ने भी तीसरे दिन वाईआरसी कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया.मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्रधान पवन गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कॉलेज में एनएसएस एवं वाईआरसी प्रभारी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी और डॉ एसके वर्मा ने तुलसी-रोपित गमले भेंट कर किया. भोजन उपरान्त दूसरे सत्र में ‘निर्मल पेय जल और स्वच्छता’ विषयपर सेमीनार का आयोजन किया गया. विदित रहे कि पांच दिवसीय जिला स्तरीय यूथ रेड क्रॉस प्रशिक्षण शिविर का आयोजन जिला रेड क्रॉस सोसाइटी के प्रधान और पानीपत के उपायुक्त सुशील सारवान आईएएस की अगुआई में हो रहा है. मंच संचालन डॉ संतोष कुमारी ने किया.आज एकल और ग्रुप डांस की प्रतियोगिताओं का भी आयोजन हुआ जिसमे छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया.
तीसरे दिन कैंप में डेंटलशिविर भी लगाया गया जिसमे डॉ अंकुर सब्भरवाल नेप्रतिभागी वाईआरसी कार्यकर्ताओं के दांतों की नि:शुल्कजांच की और उन्हें सम्बंधित बिमारी के अनुसार दवाईयां, पेस्ट, डेंटल फ्लॉस इत्यादि भी वितरित की. डॉ अंकुरसब्भरवाल ने कहा कि रात के भोजन के उपरांत और सुबह का नाश्ता करने के बाद ही दांतों को ब्रश करना चाहिए. तभी हमें ब्रश करने का भरपूर फायदा मिलेगा. कैंप के दौरान विद्यार्थियों के हिमोग्लोबिन की जांच भी की गई.
पांच दिवसीय कैंप में आर्य कॉलेज से डॉ विजय कुमार और प्रो अंजू शर्मा, आईबी कॉलेज सेप्रो सोनिया, देशबंधूराजकीय महाविधालय पानीपत से डॉ दलजीत सिंह, राजकीय महाविधालय इसराना से प्रो सुनील कुमार, राजकीय महाविधालय बापौली से प्रो रामपाल, राजकीय महाविधालय मतलौडा से प्रो रेणु, वैश कन्या महाविधालय से प्रो सुदेश चौधरीऔर देवी लाल मेमोरियल कॉलेज सिवाह से नीतू देवी बतौर काउंसलर्स भाग ले रहे है.
डॉ अंकुर सब्भरवालवरिष्ठ दंत्य चिकित्सक पानीपत ने अपने व्याख्यानमें कहा कि सच्ची मुस्कराहट दिल से ही आती हैलेकिन एक स्वस्थ मुंह इसमें चार चांद लगाता है. परन्तु कई हानिकारक खाद्य पदार्थ खाने की आदतों जैसे मिठाई, जंक फूड और अम्लीय पेय दांतों की सडऩ का मुख्य कारण बनते हैं और जरा सी लापरवाही एवं असावधानी के फलस्वरूप दांत जल्द खराब हो सकते है. हमारे दांतों के खराब होने का कारण नियमित रूप से ब्रश न करना, बहुत अधिक चिपचिपा भोजन, कार्बोनेटेड पेय, चाकलेट, फास्ट फूड, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करना, दांतों की ठीक से सफाई न करना, भोजन के बाद अच्छे से कुल्ला और ब्रश न करना एवं धूमपान करना, तंबाकू खाना और नियमित रूप से शराब का सेवन करना आदि है. दांतों को आजीवन चलाने और बचाने के लिए उन्होनें कहा की हमें दांतों को ब्रश से अच्छी तरह साफ करना चाहिए. जीभ हानिकारक सूक्ष्मजीवों को पनपने का आश्रय देती है और ये सूक्ष्मजीव दुर्गंध का कारण भी बनते हैं. हमें जीभ को भी दिन में दो बार टंग क्लीनर से साफ करना चाहिए. हमें खाने के बाद सादे पानी से हमेशा कुल्ला करना चाहिए. दांतों की सडऩ, मसूढ़ों की संवेदनशीलता और मुंह की बदबू को रोकने के लिए माउथवाश सबसे बेहतरीन विकल्प है. अगर हम यह न कर सके तो हमें भोजन के बाद गुनगुने नमकीन पानी से गरारे करने चाहिए. यदि मसूढ़ों से खून आ रहा है या दांतों में कालापन हो रहा है या दांतों में दर्द हो रहा है या मुंह से बदबूआ रही है तो हमें जल्द से जल्द किसी दंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. हमारा पूरा शरीर एक तरफ और हमारे दांत दूसरी तरफ है. दांतों का कोई भी विकल्प नहीं है.
डॉ पूजा सिंघल ब्लड डोनेशन रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत ने रक्त दान के महत्त्व पर बोलते हुए कहा कि रक्तदान करने के कई फायदे होते हैं. जब हम रक्तदान करते हैं तो हम कैंसरके खतरे को कम कर देते है. ऐसा करने से लीवर और पाचन ग्रंथि भी काफी तंदुरस्त रहती है. रक्तदान करने से दिल का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और मोटापा होने की संभावना भी कम हो जाती है. रक्तदान से लाखों जानें बच जाती हैं और नियमित रक्तदान से हमारी बड़ी से बड़ी शारीरिक समस्यायें भी कम हो जाती है. रक्तदान करने से नई रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में वृद्धि होती है तथा नियमित रक्तदान करने वाला व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर सहजता से रक्त पा सकता है. रक्तदान से रक्त की जांच भी नियमित होती रहती है तथा समाज के प्रति हमारे कर्तव्य का निर्वाह भी होता रहता है. रक्तदान करने से किसी का जीवन बचने से हममे आत्म-संतोष की भावना उत्पन्न होती है और समाज में हमारा मान-सम्मान भी बढ़ता है. हमें रक्तदान के मिथकों और भ्रांतियों को तोड़ कर इसकी सही समझ लेनी चाहिए तभी हम रक्तदान करने के भय से मुक्त हो सकते है.
ऋतु भारद्वाज फर्स्ट ऐड एवं नर्सिंग टीचर सैंट जॉन एम्बुलेंस इंडियन रेड क्रॉस पानीपत ने अपना प्रशिक्षण ‘प्राथमिक चिकित्सा और होम नर्सिंग’ विषय पर दिया. उन्होनें सभी एनएसएस कार्यकर्ताओं को कहा कि फर्स्ट ऐड टूल्स को जाने बिना सभी एनएसएस कार्यकर्ता अधूरे है. जहर पीने पर, सांप, कुत्ते और बिल्ली के काटने पर, दुर्घटना होने पर, लोहे से चोट लगने पर, आत्महत्याका प्रयास होने पर, दिल का दौरा पड़ने पर और मिर्गी का दौरा पड़ने पर हमें क्या करना चाहिए पर उन्होनें विस्तृत ज्ञान दिया.व्यावहारिकप्रशिक्षण देतेहुए उन्होनें समझाया किकिसी भी बीमारी,चोटया दुर्घटना के लिये चिकित्सक याएम्बुलेंसआने से पहले जो राहतकार्य और उपचारकिया जाता है उसे ही प्राथमिक सहायता कहते है.इस उपचार के दौरान उपयोग मे आने वाले साधनोके संग्रह को फर्स्ट ऐड किट कहते हैं. फर्स्ट ऐड के तीन महत्वपूर्ण उद्देश्य होते हैं. जीवनसंरक्षणप्राथमिक उपचार का सबसे पहला और मुख्य उद्देश्य है क्यूंकि इसमें मरीज,बीमार या घायल व्यक्ति के जीवनकीरक्षा करना होता है. दूसराकदम स्थिति को अधिक खराब होने सेबचाना होताहै औरइसके लिये बाहरी और आंतरिक स्थिति को नियंत्रण मे रखना आवश्यक होताहै. इसलियेबाहरी तौर पर मरीज़ या घायल व्यक्ति को उसके कष्ट या पीड़ाके कारण की स्थिति से दूर ले जाना होता है और आंतरिक तौर पर उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था कोबिगड़नेसे बचाया जाना शामिल होता है. रोग मुक्त होने में सहायता करना फर्स्ट ऐड का तीसरा कदम है. रोगी कोदवाई और मरहम पट्टी देकर उसे निरोगी और पूर्णत: स्वस्थ करना फर्स्ट ऐड का अंतिम उद्देश्य है.प्राथमिक उपचार शुरु करने पर सबसे पहले मरीज़ या घायल व्यक्ति की जाँच के लिये इन तीन चीज़ो को अहमियत दी जानी चाहिए जिसे संक्षेप मे फर्स्टऐड की एबीसी के नाम से जाना जाता है. हर एनएसएस कार्यकर्ता को फर्स्ट ऐड की जानकारी अवश्य होनी चाहिए.
डॉ मुकेश पुनिया गणित विभाग विभागाध्यक्षने सांयकालीन सत्र में‘निर्मलपेय जल और स्वच्छता’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा किसुरक्षित जल आपूर्ति एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था काआधार होती है परन्तु दुर्भाग्यवशविश्व स्तर पर इसे प्रमुखता नहीं दी गई है.सभी बच्चों को स्वच्छ पानी और बुनियादी स्वच्छता का अधिकार है जिसका बाल अधिकारों में भीउल्लेख किया गया है.पानी, सफाई और स्वच्छता में हमाराअंतिम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि सभी बच्चों को ये अधिकार मिले. बिना निर्मल जल और सफाई के किसी भी तरक्की का कोई अर्थ नहीं है.पानी का सदुपयोग समय की मांग है वरना अगला विश्व युद्ध पानी के लिए ही होगा.
डॉ संतोष कुमारी अंग्रेजी विभागने कहा कि भारत को एक संपूर्ण डिजिटल देश में बदलने के लिये निम्न लक्ष्यों को सुनिश्चित करने के लिये भारतीय सरकार के द्वारा डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को लागू किया गया है.ब्रॉडबैंड हाइवे सुनिश्चित करना, मोबाईल फोन के लिये वैश्विक पहुँच को सुनिश्चित करना, तेज गति इंटरनेट से लोगों को सुगम बनाना, डिजिटाईजेशन के माध्यम से सरकार में सुधार के द्वारा ई-गर्वनेंस लाना, सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलिवरी के द्वारा ई-क्रांति लाना, सभी के लिये ऑनलाईन सूचना उपलब्ध कराना, ज्यादा आईटी नौकरियों को सुनिश्चित करना. उन्होने इसे एक क्रांतिकारी पहल करार दिया.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि रेड क्रॉस एक शानदार और वैचारिक रूप से प्रेरित करने वाली सेवा इकाई है. यदि वाईआरसी और एनएसएस को स्कूलों और कालेजोंमें हर छात्र-छात्र के लिए अनिवार्य कर दिया जाए और इसे पाठ्यक्रम के भाग के रूप में एकीकृत कर दिया जाए तो इसके जो फायदे हमें मिलेगे उनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते है.
वाईआरसी प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग ने कहा की यूथ रेड क्रॉस छात्र-छात्राओं को समुदाय को समझने का अवसर प्रदान करता है. इनको समझने के बाद ही छात्र समाज की जरूरतों और समस्याओं को हल कर सकते है. पांच दिवसीय कैंप को आयोजित करने का उद्देश्य एनएसएस कार्यकर्ताओं के व्यक्तित्व को निखारना और उन्हें कर्त्तव्यनिष्ठ, संवेदनशील तथा उपयोगी नागरिक बनाना है.

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