प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा “विश्व गौरैया दिवस” पर पक्षी अवलोकन तकनीकों पर कार्यशाला आयोजित
बचा लो चिड़ियों का चंबा – डॉ. साहनी
– बर्ड फोटोग्राफी, बर्ड हाउस, बर्ड फीडर व आर्द्र भूमि भ्रमण पर पीपीटी प्रेजेंटेशन प्रतियोगिताएं आयजित
– ग़ज़ल को बेस्ट प्रेजेंटेशन अवार्ड व प्रिया को मिला इन्थूज़ीऐस्टिक बर्ड वाचर अवार्ड
BOL PANIPAT , 20 मार्च 2026 – स्थानीय आर्य महाविद्यालय की प्राणीशास्त्र संगठन व इको क्लब के संयुक्त तत्वावधान में “विश्व गौरैया दिवस 2026” का आयोजन किया गया। भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून, उत्तराखंड के वैज्ञानिक सी डॉ. आशीष ने पक्षी अवलोकन की तकनीकों पर आयोजित कार्यशाला में बी.एस.सी. लाइफसइंस व मल्टीडिसीप्लिनरी जूलॉजी के लगभग 230 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया। 8×40 व 10×50 की दूरबीन, डीएसएलआर या मोबाइल कैमरा से फोटो लेना, फील्ड गाइड व मोबाइल अप के उपयोग एवं पक्षियों के चोंच, पंजो वह अन्य फील्ड चिह्नों के आधार पर उन्हें पहचानने की विधि का ज्ञान दिया। प्राणीशास्त्र विभाग अध्यक्ष डॉ. गीतांजलि साहनी ने गत वर्ष में विभिन्न रामसर साइट्स के अपने विभागीय शैक्षणिक दौरे के दौरान एकत्रित डाटा से पक्षी जीव विविधता को प्रदर्शित किया व विद्यार्थियों को पक्षीजीव संरक्षण के लिए शोध कार्य करने को प्रेरित किया। उनके द्वारा समय-समय पर की गई बर्ड फोटोग्राफी की प्रदर्शनी लगाई गई। विद्यार्थियों ने शोध कार्य को पीपीटी प्रेजेंटेशन व फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी प्रतियोगिताओं के रूप में प्रदर्शित किया। महाविद्यालय परिसर व आसपास के शहरी क्षेत्र में पक्षी आवास बढ़ाने के लिए “बर्ड हाउस” बांटे गए। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता व रिसोर्स पर्सन डॉ. आशीष ने प्रांगण के विभिन्न पेड़ों पर चिड़ियों के आवास को बढ़ावा देने के लिए बर्ड नेस्ट हाउस टांगे तथा विद्यार्थियों को समय-समय पर इनमें दाना-पानी डालने को प्रेरित किया। प्रयोगशाला के दौरान अंग्रेजों के समय सन् 1750 के पक्षियों की चेक लिस्ट की तुलना आज के समय में दिखने वाले पक्षियों की भारतीय लगभग 1350 प्रजातियों से की। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को ई-बर्ड ऐप के प्रयोग को सिखाया गया। बर्ड एटलस 2006 में भारत में दिल्ली में बना। हरियाणा का बर्ड एटलस बनाने को प्रेरित किया। निर्णय मंडल की भूमिका डॉ. गीतांजलि साहनी, डॉ. हरदीप शर्मा व प्राध्यापिका पिंकी ने निभाई। मंच संचालन छात्रा किट्टू व खुशी ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय की उपाचार्या डॉ. अनुराधा सिंह, डॉ. मधु गाबा, अंकित व सोमनाथ उपस्थित रहे।
महाविद्यालय प्रबंधन समिति व प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने सफल आयोजन का श्रेय संयोजिका डॉ. साहनी को देते हुए शपथ दिलवाई कि प्राणीशास्त्र विभाग पक्षी संरक्षण के लिए जन-जन को घरों, स्कूलों, पार्क आदि में बर्ड हाउस व बर्ड फीडर लगाकर अपना योगदान देने के लिए प्रयास करता रहेगा ताकि “सोने की चिड़िया” कहलाने वाले भारत देश में “चिड़ियों का चंबा” हमारी भाभी पीढ़ी के लिए बचा रहे।

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