स्वस्थ भारत की दिशा में योग बड़ा कदम : कैबिनेट मंत्री मनोहरलाल
योग बने जन-आंदोलन .बढ़ती भागीदारी पर दिया जोर.
उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया ने बुके देकर किया अभिनंदन
सहायकों से सीधा संवाद. आयुष को बढ़ावा, बीमारी पर लगाम. योग-आहार शिविर में मंथन, सेवा भाव से योग अपनाएं
BOL PANIPAT , 14 अप्रैल। केंद्रीय ऊर्जा,आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को सेक्टर-6 स्थित एचडी इंटरनेशनल (एचवीपीएन) स्कूल में संचालित किए जा रहे योग एवं आहार चिकित्सा प्रशिक्षण शिविर में योग सहायकों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए कहा कि योग को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाये और समाज में इसकी व्यापकता बढ़ाने के लिए ठोस प्रयासों की आवश्यकता बताई।
उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया ने शिविर में पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री का बुके देकर अभिनंदन किया। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र सलूजा भी उपस्थित रहे।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री ने योग सहायकों से संवाद करते हुए व्यायामशालाओं में प्रतिभागियों की संख्या के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने इस बात पर गंभीर चर्चा की कि किस प्रकार लोगों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि योग को केवल व्यायाम तक सीमित न रखकर एक संपूर्ण जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत किया जाए।
बैठक के दौरान योग सहायकों की शैक्षणिक योग्यता पर भी चर्चा हुई। यह सामने आया कि जिले में अधिकांश योग सहायक योग के क्षेत्र में स्नातक या पीजी डिप्लोमा धारक हैं। उन्होंने योग के माध्यम से सेवा भाव को प्राथमिकता देने की अपील की।
प्रशिक्षण शिविर में योग सहायकों द्वारा सीखे गए विषयों, विशेषकर आहार चिकित्सा पर भी चर्चा हुई।
कैबिनेट मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिभागियों को ‘ऋतु भूख, हित भूख और मित भूख’ के सिद्धांतों के अनुसार भोजन करना सिखाया जाए—अर्थात मौसम के अनुसार, हितकारी और संतुलित मात्रा में भोजन करना।
योग के विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए सहायकों ने आठ आयामों का उल्लेख किया, जिनमें से मंत्री ने योगासन, प्राणायाम और आहार पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि इन तीन पहलुओं पर सही तरीके से काम किया जाए तो व्यक्ति स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हो सकता है।
सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि प्रयास यह है कि स्वास्थ्य बजट पर भार कम किया जाए और आयुष प्रणाली को बढ़ावा दिया जाए, ताकि लोग बीमार ही न पड़ें।
उन्होंने भूटान का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां विकास का आकलन ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ से किया जाता है, जो समग्र खुशहाली को दर्शाता है।
विदित रहे कि
यह प्रशिक्षण शिविर 2 अप्रैल से 16 अप्रैल तक संचालित हो रहा है, जिसमें योग सहायकों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उनकी कार्यप्रणाली, समस्याओं और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
कार्यक्रम में उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि एक संतुलित और अनुशासित जीवन जीने की कला है। उन्होंने कहा, “आज के भागदौड़ भरे जीवन में योग मानसिक शांति, शारीरिक सुदृढ़ता और आत्मिक संतुलन का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। हमारी प्राथमिकता है कि योग को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए, ताकि हर नागरिक स्वस्थ, जागरूक और ऊर्जावान बन सके।” उन्होंने योग सहायकों से आह्वान किया कि वे अपने दायित्व को सेवा के रूप में निभाएं और लोगों को स्वस्थ जीवन के प्रति प्रेरित करें।
कार्यक्रम में आयुष विभाग के राज्य प्रशासनिक अधिकारी डॉ. दलीप मिश्रा, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. राजकपूर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक महिपाल बंसल, जिला योग समन्वयक डॉ. नितिन राय सहित अन्य अधिकारी एवं लगभग 33 योग सहायक उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण शिविर का संचालन स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा किया गया। बैठक में कई महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने आए, जिनमें योग सहायकों के लिए साप्ताहिक अवकाश, नजदीकी क्षेत्रों में ड्यूटी, प्रदेश में 6 हजार नए योग सहायकों की भर्ती, व्यायामशालाओं को आरोग्य केंद्रों में विकसित करना तथा आहार विशेषज्ञता का 6 माह का प्रशिक्षण शामिल है।
कार्यक्रम में योग सहायकों में सतीश नैन और सतीश क्रांतिकारी ने मंत्री को विशेष आहार युक्त लस्सी भेंट कर सम्मानित किया।
ध्यान रहे कि
इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर न केवल योग सहायकों की क्षमता को सशक्त बनाते है, बल्कि समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

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