एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा के निर्देशानुसार राष्ट्रीय खेल दिवस के दूसरे दिन कब्बडी, योग, शतरंज और वालीबॉल के मैचों का हुआ आयोजन
खेलों में खिलाड़ियों की बढती रूचि और उपलब्धियां उभरते भारत की नई तस्वीर है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT, 30 अगस्त, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा के निर्देशानुसार राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर तीन दिन चलने वाले कार्यक्रमों के दूसरे दिन कब्बडी, योग, शतरंज और वालीबॉल के मैचों का आयोजन किया गया जिसमें पुरुष और महिला टीमों ने भाग लिया । कार्यक्रम का उदघाटन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने वालीबॉल में पहली सर्विस देकर किया । उनके साथ डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो रेखा भी मैचों में उपस्थित रहे । रोचक और प्रतिस्पर्धात्मक मैचों में सभी खिलाडियों का प्रदर्शन शानदार रहा । पुरुष वालीबॉल में मेजर ध्यानचंद कि टीम ने प्रथम स्थान हासिल किया । महिला कब्बडी में रानी लक्ष्मीबाई कि टीम तथा पुरुष कब्बडी में चन्द्र शेखर आज़ाद कि टीम ने पहला स्थान पाया । आज के खेलों की शुरुआत शपथ के साथ हुई । वर्ष 2025 के राष्ट्रीय खेल दिवस का थीम ‘शांतिपूर्ण और समावेशी समाजों के संवर्धन के लिए खेल’ है ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि खेल सभी के जीवन में विशेष रुप से विद्यार्थियों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । खेल गतिविधियों में शामिल होना हर व्यक्ति के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है । खेल न केवल शारीरिक ताकत प्रदान करते है बल्कि इनसे हम मानसिक रूप से भी शक्तिशाली और मजबूत बनते है । अब तो खेल हमें अपने पैरो पर खड़ा होने में भी मदद करने लगे है । कॉलेज अपने खिलाड़ियों को हर तरह से प्रोत्साहित करता है और आगे भी करता रहेगा । कब्बडी जैसे खेल द्वारा विद्यार्थी सामाजिक होना सीखते है और उनका भावात्मक विकास भी होता है । युवा जीवन में खेलों में भाग लेने से युवा टीम वर्क सीखते है । शारीरिक विकास के साथ-साथ मन का विकास भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है । कब्बडी जैसा खेल अंग विन्यास को अच्छा, हृदय को मजबूत, श्वसनतंत्र को बेहतर और हमारी इम्यूनिटी को बढाने में सहायक होता है । प्रतियोगी भावना भी हमें कब्बडी जैसे खेल से ही मिलती है । हर युवा को चाहिए की वह अपने जीवन में कम से कम एक खेल में भाग जरुर ले ।
डॉ सुशीला बेनीवाल शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष ने कहा कि कब्बडी एक भारतीय मैदानी खेल है और जिसमे मैदान के दो पालों के अतिरिक्त किसी अन्य साधन की जरूरत नहीं होती है । यह एक मनोरंजक स्वदेशी खेल है जो युवाओं में ओज और स्वस्थ संघर्षशील जोश भरता है । यह खेल पकड़ने वाले और प्रतिरक्षक दोनों से अत्यधिक तंदुरुस्ती, कौशल, गति और ऊर्जा की माँग करता है ।
इस अवसर पर कॉलेज स्टाफ सदस्य डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो सुशीला बेनीवाल, प्रो रेखा मौजूद, प्रो आनंद, ग्राउंड्समैंन प्रताप उपस्थित रहे ।

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