एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह के दूसरे दिन भाषण और काव्य पाठ प्रतियोगिता का हुआ आयोजन
– काव्य पाठ में ज्योति जैन और भाषण प्रतियोगिता में इशिका जैन ने बाजी मार पाया पहला स्थान
–भारत की वनस्पतियों और जीवों को बचाना राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह को मनाने का मूल उद्देश्य: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 04 अक्टूबर,
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के जैव विज्ञान विभाग के तत्वाधान में 2 से 8 अक्टूबर तक चलने वाले राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह के दूसरे दिन काव्य पाठ और भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे बीएससी और कॉलेज के अन्य विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर हिसा लिया. काव्य पाठ में ज्योति जैन और भाषण में इशिका जैन ने बाजी मार प्रथम स्थान पाकर नकद धनराशि और प्रशस्ति पत्र पर कब्ज़ा किया. राष्ट्रीय वन्य जीव सप्ताह के माध्यम से छात्र-छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवो की सुरक्षा को लेकर जागरूक किया जा रहा है ताकि वे इनके प्रति गंभीर बने और इसकी हर हाल में रक्षा करे. दूसरे दिन आयोजित विविध प्रतियोगिताओं का उदघाटन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने किया. उनके साथ डॉ राकेश गर्ग, प्रो प्रवीन खेरडे, डॉ राहुल जैन, डॉ रवि कुमार, प्रो प्रवीन कुमारी, प्रो रिया, प्रो नम्रता, प्रो ऋतु, दीपक मित्तल ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया और प्रतिभागियों का हौंसला बढाया. जूरी की भूमिका डॉ एसके वर्मा और डॉ प्रियंका चांदना ने निभाई. विदित रहे कि वनों का संरक्षण अब हर इंसान की पहली प्राथमिकता है. जिम्मेदारी के भाव से हम लुप्त हो रहे पेड़-पौधों, जंगली जानवरों और पक्षियों के संरक्षण को सुनिश्चित कर सकते है. इसी लक्ष्य से प्रत्येक वर्ष 2 से 8 अक्टूबर के दौरान वन्य जीव सप्ताह आयोजित किया जाता है ताकि देश के नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी को समझे और वन्य प्राणियों को बचाने और संजोने के कार्य में तुरंत जुटे. आज की प्रतियोगिताओं के विषय ‘पर्यटन का वन्यजीवन पर प्रभाव’, ‘ग्लोबल वार्मिंग का वन्यजीवन पर प्रभाव’, ‘पर्यावरण संरक्षण के प्रति युवाओं की संवेदनशीलता’, ‘वन्यजीवन व्यापार’ आदि रहे.
डॉ अनुपम अरोड़ा प्राचार्य ने कहा कि हमने अपनी सुख-सुविधाओं और विकास के नाम पर धरती पर मौजूद संसाधनों का दोहन इस तरह से किया है कि अब दूसरे जीवधारियों के जीवन का आधार ही खत्म हो गया है. विकास का सबसे बुरा शिकार प्रकृति हुई है. कितने ही पशु-पक्षियों की प्रजातियाँ खत्म हो चुकी हैं और कितनी ही गायब होने के कगार पर खड़ी हैं. समय आ गया है कि हम सभी इंसान अपनी जिम्मेदारियां समझें. सिर्फ भाषण और उपदेशों से नहीं बल्कि धरती और वन्य जीवों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने से ही बात बनेगी. वन्यजीवन को बचाने के लिए हमें पूरे देश में जंगली जानवरों और पक्षियों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों की अधिक से अधिक संख्या में स्थापना करनी चाहिए. ईंधन के लिए जंगल में पेड़ों से लकड़ियों का अनाधिकृत रूप से काटना तुरंत बंद करना चाहिए. हमारे ही प्रयासों से से वन्यजीवन संरक्षित हो सकता है.
डॉ प्रियंका चांदना ने कहा कि मानव ने अपनी भौतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए जैव विविधता के साथ भयंकर खिलवाड़ कर रखा है और इससे वन्य प्राणियों का जीवन जीना लगभग दूभर हो गया है. लालची प्रवृत्ति और विकास के नाम पर इंसान इस धरती का सत्यानाश करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. पर्यावरण और वन्यजीव सभी इंसान के इन कारनामों से हैरान एवं परेशान है. हमारे लालच का ही यह परिणाम है कि पृथ्वी पर उपस्थित तमाम वन्य प्राणियों के विलुप्त होने का खतरा अब सत्य हो चला है. कई प्रजातियों का धरती से नामोनिशान मिट चुका है और एक बार विलुप्त हो जाने के बाद किसी भी प्रजाति को वापस लाने का कोई भी तरीका नहीं है. ऐसे में इंसान को अब समझदारी का परिचय देना होगा और यही यह वन्यजीव सप्ताह हमें सिखा रहा है.
काव्य पाठ प्रतियोगिता के परिणाम-
प्रथम ज्योति जैन एमएससी (रसायन शास्त्र)
द्वितीय मंजू एमएससी (रसायन शास्त्र)
तृतीय सपना बीएससी-तृतीय
सांत्वना पंकज बीकॉम
भाषण प्रतियोगिता के परिणाम-
प्रथम इशिका जैन बीए-प्रथम
द्वितीय खुशबू बीकॉम-द्वितीय
तृतीय श्वेता बीए-प्रथम
सांत्वना रूबी बीएससी-तृतीय

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