श्री प्रेम मंदिर प्रांगण में श्री ठाकुर जी का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया।
BOL PANIPAT : (11 फरवरी) श्री प्रेम मन्दिर पानीपत का 102वाँ वार्षिक सम्मेलन परम पूज्य श्री श्री 1008 श्री मदन मोहन जी हरमिलापी महाराज परमाध्यक्ष श्री हरमिलाप मिशन हरिद्वार की अध्यक्षता में एवं श्री प्रेम मन्दिर पानीपत की परमाध्यक्षा परम पूज्या श्री श्री 108 श्री कान्ता देवी जी महाराज के आशीर्वाद से प्रारंभ हुआ।
आज सम्मेलन के दूसरे सत्र में मंदिर प्रांगण में श्री ठाकुर जी का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। ठाकुर जी के सभी भक्तों द्वारा फूल होली खेलकर वातावरण को रसमय तथा रंगमय बना दिया।
स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भगवान भाव से शीघ्र रीझ जाते हैं। भगवान के भजन गाने के लिए सुर ताल का होना जरूरी नहीं बल्कि भाव होना चाहिए। वृन्दावन से पधारे स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवतगीता में भगवान ने स्वयं कहा है कि मुझे स्मरण करते हुए अपने कर्म में लगे रहो और फल की इच्छा मत रखो। फल अपने आप मिलेगा। सहारनपुर से पधारे बाबा रिजकदास जी ने प्रभुनाम का गुणगान कर वातावरण को रसमय बना दिया।

देहरादून से पधारे श्री काका हरिओम जी ने बताया कि इस अमूल्य चोले के मिलने के बाद यदि व्यक्ति शास्त्रों में निहित तथा धर्मानुसार आचरण नहीं करता तो उसमें तथा अन्य जीवों में कोई अन्तर नहीं रह जाता। सत्संग से सबको पता चलता है कि कब कहां और कैसे बोलना है किसे देखना है और क्या सुनना है। भानपुरा पीठ से पधारे परम पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने सत्संग के माध्यम से हमें जीने की राह का मार्ग दर्शारूा। सन्त मनुष्य को बगुले से हंस बनाते हैं।
मन बुद्धि को तमोगुण तथा रजोगुण से हटाकर सतोगुणी बनाते हैं। धीरे धीरे प्रयास करते रहने से भक्त इन तीन गुणों से भी परे हो जाता है। अर्थात दुख क्लेश द्वेष क्रोध काम आदि शरीर में रहते हुए भी विचलित नहीं करते। बुद्धि निश्चियात्मक हो कर समता योग में स्थिर हो जाती है।
सत्संग श्रवण कर मनन व जीवन में अपनाने से मन सही ही सेवा सिमरन में लग जाता है। फलस्वरूप सहयोग तथा समर्पण भाव भी जागृत हो जाते हैं। समता योग में स्थिर होने पर भक्त सबमें ईश्वर का रूप निहारता है। इसके लिए ‘‘हरि व्यापक सर्वत्र समाना प्रेम ते प्रकट होत मैं जाना’’ चरितार्थ हो जाता है। इस आयोजन में कानपुर, भरतपुर कामा हल्द्वानी अम्बाला मेरठ से आए हुए भक्तों ने भाग लिया। इस अवसर पर चरणजीत रत्रा, रमेश असीजा, शशी असीजा, दयानन्द अग्घी, अनिल नंदवानी, गौतम दुआ, अनिल अरोड़ा आदि उपस्थित थे।

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