Monday, June 15, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के बीएससी मेडिकल के विद्यार्थियों का तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण सफलतापूर्वक संपन्न

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at May 26, 2022 Tags: , , , , ,

चकराता, देहरादून(उत्तराखंड) में दुर्लभ वनस्पतियों, पौधों एवं जड़ी-बूटियों का का किया अध्ययन

    BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत केबीएससी मेडिकल के37 विद्यार्थियों का तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ जिसमे छात्र-छात्राओं ने चकराता एवंदेहरादून (उत्तराखंड) में3दिवसीयआवासीय कैंप में रहकर वहां मौजूद दुर्लभ वनस्पतियों, पौधों और जड़ी-बूटियों का अध्ययन किया और धरातल पर जाकर व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया.23 से25 मई तक चले इस शैक्षणिक भ्रमण में छात्र-छात्राओं का अगुआई एवं मार्गदर्शन डॉ रवि कुमार,डॉ राहुल जैन,प्रो काजल जिंदलऔर प्रो शीतल शर्मा ने की. कॉलेज प्रधान पवन गोयल और प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने भ्रमण के सफलतापूर्ण वापिस लौटने पर सभी सदस्यों को बधाई दी. छात्र-छात्राएं हर्बेरियम या सूखी वनस्पतियों का संग्रह भी चकराता से इक्कठा करके लाये. उन्होनें विभिन्न दुर्लभ प्रजातियों के बारे में भी अपने प्राध्यापकोंके माध्यम से जानकारी एकत्रित की. विदित रहे कि भारत हल्दी और अदरक का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक देश है और भारत में यहीस्थान चकराता को हासिल है जहाँ हल्दी और अदरक का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है.यहाँ अदरक और हल्दी से निर्मित विभिन्न औषधियां एवं उत्पाद जग मशहूर है जिनमे अदरक घृता, खंडाव्लेह, गुल अदरकम शामिल है.चकराता का राजमाह और बुरांश के फूलों का अर्क न केवल भारत में बल्कि संसार में प्रसिद्ध है. छात्र-छात्राओं ने कालाजीरा, राजमाह,बुरांश के फूलों का अर्क, रतनजोत, विभिन्नदाले, अखरोट, खुमानी का तेल, लौंग, सौंफइत्यादि उत्पाद भी चकराता के बाजार से ख़रीदे और अपने इस शैक्षणिक भ्रमण को यादगार और आनंदवर्धकबनाया.शैक्षणिक भ्रमण और कैंपपर आये कुल खर्चे का आधा खर्च कॉलेज ने वहनकिया.

इस भ्रमण की सबसे ख़ास और यादगार बात लाईकन के पौधे को लेकर रही.लाईकन का पौधा प्रदुषण के स्तर को सबसे सटीकता के साथ इंगित करता है और प्रदुषण कम होने पर यह खूब फलता-फूलता है.इस बार इसे चकराता में बहुतायत में देखा गया. यह इस बात का शुभ संकेत है की कोरोना आपदा के मद्देनजर लॉक डाउन के कारण भ्रमणकारियों और पर्यटकों की संख्या में जो गिरावट हुई उससे प्रदुषण के स्तर में भारीकमी आई. कम प्रदुषण ने इस पौधे को पनपने और इसके जीने में खूब मदद की. इसलिए यह पौदा जो कल तक सुदूर पहाड़ियों पर ही देखा जा सकता था आज चकराता में बहुतायत में फलता-फूलता पाया गया.

प्रधान पवन गोयल ने अपने सन्देश में कहा कि भ्रमण के माध्यम से हमें हर विषय के व्यावहारिक ज्ञान को प्राप्त करने का सुनहरा अवसर मिलता है. इंसान और मानवता का सही अध्ययन मनुष्यों के अध्ययन से ही हो सकता है और भ्रमण के दौरान ही तरह-तरह के व्यक्तियों से हमारा संपर्क होता है जिनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है. 

     प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि विज्ञान जैसे विषयों को समझने के लिए हमें प्रयोगशालाओं के साथ-साथ बाहर जाकर भी अध्ययन करना होगा. धरातल पर जाकर प्राप्त किया गया ज्ञान अधिक प्रासंगिक, व्यावहारिक और ठोस होता है. इस 3 दिवसीय शैक्षिक भ्रमण से छात्र-छात्राओं के न सिर्फ ज्ञान में वृद्धि हुई है बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी भरपूर निखार आया है. छात्रों को नियमित शैक्षिक भ्रमण पर ले जाकरहम उन्हें खुले वातावरण में शिक्षा को अपने व्यक्तिगत अनुभवों से परिभाषित करते है. शैक्षिक भ्रमण के माध्यम से छात्रों की अनुभूति जागृत होती है और प्रकृति और विज्ञान को व्यक्तिगत रूप से जान पाते है. ऐसे भ्रमणों से छात्रों में समूह में रहने की प्रवृति,नायक बनने की क्षमता तथा आत्मविश्वास एवं भाई-चारे की भावना भी प्रबल होती है.

डॉ रवि कुमारविभागाध्यक्ष वनस्पतिशास्त्र विभाग ने कहा कि छात्र-छात्राओं ने इस शैक्षणिक एवं मनोरंजक भ्रमण के दौरान टाइगर जल प्रपात, बुध्हेर गुफाएं, मोइलाडांडा पहाड़ीपथ, देववन, कनेसर गाँव, झिर्मरी टॉप एवं सनसेट पॉइंट जैसे पर्यटक स्थलों का भी आनंद लिया. शिक्षा के साथ यदि आनंद का भी समावेश हो जाए तो ऐसी शिक्षासार्थक एवं स्थाई असर डालती है. शतपुष्पा जिसका प्रयोग मधुमेहके ईलाज में कियाजाता है का चकराता में उत्पादन किया जाता है.

डॉ राहुल जैन ने कहा कि देवदार की वादियों और बुगयाल (पहाड़ी चारागाहों) की धरती चकराता में प्रकृति की छठा देखते ही बनती थी जिसपर छात्र-छात्राएं और प्राध्यापक भाव विभोर हो गए.

                                                   

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