एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के तीन खिलाडियों ने अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में झटके पांच गोल्ड सहित नौ मैडल
–जार्जिया में हुआ अंतर्राष्ट्रीय वुशु चैंपियनशिप का आयोजन
–खेल हमें समयबद्धता,धैर्य,अनुशासन औरसमूह में कार्य करना सिखाते है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपतके खिलाडीयो प्रिंस कुमार, प्रशांत और प्रशांत कुमार ने अंतर्राष्ट्रीयएवं राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में पांचगोल्ड समेत दो रजत एवं दो कांस्य पदकों पर कब्ज़ा कर जिले और कॉलेज का मान बढाया. 75किलोग्राम भारवर्ग में प्रिंस कुमार नेजॉर्जिया में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में रजत पदक पर कब्ज़ा कर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया.इससे पहले प्रिंस कुमार ने इसी केटेगरी में केरल में आयोजित राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा किया.प्रशांत ने फतेहाबाद में आयोजित राज्य स्तरीय वुशू चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीत कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. इसी प्रकार प्रशांत कुमार ने फतेहाबाद में आयोजित राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता.कॉलेज पधारने पर विजेता खिलाडियों का उत्साहवर्धन और स्वागत एसडी पीजी कॉलेज प्रबंधकारिणी के प्रधान पवन गोयल,प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रो सुशीला बेनीवाल, प्रो रजनी देवी,ग्राउंडस मैन प्रताप और अन्य स्टाफ सदस्यों ने किया. तीनों ही खिलाड़ी कई वर्षो से राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर की वुशू चैंपियनशिपस में मैडल जीतते आ रहे है.
एसडी कॉलेज प्रधान पवन गोयल ने अपने बधाई सन्देश में कहा की वुशुएक पारंपरिक चीनी मार्शल आर्ट खेल है जिसे दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है – ताओलू और संसौ. ताओलू पूर्व निर्धारित एवं एक्रोबेटिक गतिविधियों से संबंधित होता है जिसमे प्रतियोगी काल्पनिक हमलावरों के खिलाफ उनकी तकनीकियों पर महारथ हासिल करता है. दूसरी तरफसंसौ एक पूर्ण संपर्क खेल है जो प्राचीन प्रथाओं और आधुनिक खेल सिद्धांतों का संयोजन है. यह दिखने में कुश्ती या किक-मुक्केबाजी जैसा होता है. उन्होनें कहा की खेलो का हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्थान है और बिना इनके हमारा शरीर किसी काम का नहीं है. हमे कुछ समय खेलों के लिए अवश्य निकालना चाहिए. खेल बहुत ही आवश्यक है क्योंकिखेलों में नियमित रुप से शामिल होने वाला व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहता है.जिस प्रकार नाम,प्रसिद्धीऔर पैसा प्राप्त करने के लिए शिक्षा बहुत आवश्यक है उसी तरह स्वस्थ शरीर और मस्तिष्क प्राप्त करने के लिएखेल सबसे अच्छा तरीका है. ये तीनोखिलाडी दूसरे छात्र-छात्राओ के लिए मिसाल है.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने अपने प्रेरणा से भरपूर वक्तव्य में कहा कि भारत वुशु एसोसिएशन ने वुशु को ऐसे खेल के रूप में वर्णित किया है जिसमे लड़ाई की गतिविधियों के साथ आंतरिक और बाहरी दोनों अभ्यासों पर ध्यान देना होता है. वुशु का खेल भारत में पहली बार 1989 में आया. इस खेल को राष्ट्रीय खेलों में पदक कार्यक्रम के रूप में खेला जाता है.आज वुशु का खेल भी लोकप्रियता के पायेदान चढ़ता जा रहा है. उन्होनें कहा की खेल हमारे लिए बहुत ही लाभदायक हैं क्योंकि इनसे हमें समयबद्धता,धैर्य,अनुशासन,समूह में कार्य करना और लगन को पैदा करना आता है.खेलो से ही आत्मविश्वास का निर्माण होता है. यदि हम खेल का नियमित अभ्यास करेंतो हम अधिक सक्रिय और स्वस्थ रह सकते हैं.खेल हमें जीवन में कमजोरियों को हटाकर आगे बढ़ना सिखाता है.प्रिंस कुमार, प्रशांत और प्रशांत कुमार की तारीफ करते हुए उन्होनें कहा की इन खिलाडीयो ने वुशू चैंपियनशिप में पदक जीत कर वो कारनामा अंजाम दिया है जिसे हर कॉलेज हासिल करना चाहता है. एसडी कॉलेज ने खेलों को हमेशा बढ़ावा दिया है और यहाँ के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा कर कॉलेज का भरपूर नाम रोशन किया है. कॉलेज को इन युवाओं पर गर्व है और यही हमारे भविष्य कि धरोहर है.
विजेता खिलाडियों ने भी अपनी जीत का श्रेय अपने माता-पिता, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रो सुशीला बेनीवाल, प्रो गीता मलिक और एसडी कॉलेज प्रबंधनको दिया.इस अवसर पर कॉलेज के स्टाफ सदस्य जिनमें प्रो सुशीला बेनीवाल, प्रो रजनी देवी, डॉ एसके वर्मा, दीपक मितल, प्रताप मौजूद रहे.

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