Friday, June 5, 2026
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खादी मिशन की सभा में ‘खादी रक्षा अभियान’ के तीन बिंदुओं पर विचार किया गया

By LALIT SHARMA , in Business , at October 10, 2022 Tags: , , , ,

BOL PANIPAT : 10 अक्टूबर, 2022: खादी मिशन की सभा दिनांक 9-10 अक्टूबर, 2022 को खादी आश्रम, जी. टी. रोड, पानीपत (हरियाणा) में हुई जिसमें देश के विभिन्न भागों/प्रदेशों से पधारे महानुभावों ने भाग लिया। इस सभा में विशेष सभा द्वारा खादी मिशन द्वारा 2010 से चलाए जा रहे ‘खादी रक्षा अभियान’ के तीन बिंदुओं पर विचार किया गया:-

  1. खादी ग्रामोद्योग आयोग द्वारा सुक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय को भेजी गई संस्तुति के अनुसार खादी संस्थाओं को दिए गए ऋण से मुक्त किए जाने बारे।
  2. खादी संस्थाओं को दिए गए ऋण से अधिक की आयोग में जमा सम्पत्तियों के दस्तावेज संस्थाओं को वापस लौटाने बाबत।
  3. खादी ग्रामोद्योग आयोग में संस्थाओं की बकाया राशि पुरानी रिबेट (ओ.पी.आर.), एक मुश्त भुगतान (ओ.टी.आई.), एम.डी.ए., एम.एम.डी.ए., ब्याज सहायता एवं आयोग के भवनांे में बकाया राशि संस्था को मय ब्याज के साथ भुगतान किया जाये।
    बिंदु नं. 1 – पर विचार कर संस्थाओं का यह मत रहा कि आयोग द्वारा संस्थाओं को ऋण मुक्त करने के लिए गठित कमेटी दीन-दयाल शोध संस्थान व भारतीय बैंकिंग और वित्त संस्थान (आई.आई.बी.एफ.) द्वारा अध्ययन किया गया, दोनों ने ही आयोग को अपनी रिपोर्ट को सौंपने उपरांत आयोग ने अपनी बैठक 591-599 में विचार कर भारत सरकार को संस्तुति दी कि संस्थाओं को दिया गया ऋण माफ किया जाए, मंत्रालय में यह विचाराधीन है।
    बिंदु 2 – पर संस्थाओं का विचार रहा कि कुछ संस्थाओं ने इस विषय में उच्च न्यायालय में वाद किया व न्यायालय ने निर्णय दिया है कि जिस संस्था ने पूर्ण ऋण राशि आयोग को चुकता कर दिया हो, उसे माॅरगैज किए गए संस्था के कागजात आयोग द्वारा वापस किए जाये। संस्थाओं का यह भी मत रहा कि संस्थाओं द्वारा भूमि एवं भवन अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बनाये हैं न कि बिक्री किए जाने के लिए। संस्थाओं को अपनी कार्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अब तक आयोग से फंडिंग मिलती रही लेकिन अब आयोग ने कार्यशील पूंजी देनी बंद कर दी है, बकाया राशि जो आयोग की तरफ थी वह भी नहीं दी जा रही है। संस्थाओं को पात्रता के अनुसार आयोग या भारत सरकार कार्यशील पूंजी उपलब्ध करवाए व बकाया राशि का भुगतान भी संस्थाओं को करे तथा ऋण की सीमा तक संस्था की भूमि माॅरगैज रख व शेष भूमि एवं भवन संबंधी दस्तावेज वापस कर दें जिससे संस्थाएं अन्य स्त्रोतों से वित्तीय सहयोग ले सके।
    बिंदु नं. 3 – पर विचार कर आयोग की ओर बकाया पुरानी रिबेट, एक मुश्त भुगतान, एम.डी.ए., एम.एम.डी.ए, ब्याज सहायता क्लेम व आयोग के भवनों में बकाया राशि का भुगतान शीघ्र किया जाए तथा बकाया भुगतान ब्याज सहित लौटाया जाए। सभा में मत रहा कि यह बकाया राशि 300-400 करोड़ है, यह संस्थाओं को न मिलने से उत्पादन में गिरावट आई है बल्कि संस्था की तरल पूंजी को भी क्षति हुई है।
    बैठक में विचार कर यह मत रहा कि आयोग व भारत सरकार को उक्त अनुसार पत्र भेजा जाए तथा उपरोक्त बिंदुओं का निस्तारण शीघ्र करने हेतु लिखा जावे। जिससे संस्थाओं को तरल पूंजी का अभाव न रहे तथा वे अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आगे कार्य कर सकें।

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