परेशानियां कभी कम नहीं होती :स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज
BOL PANIPAT : श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2080 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में सप्ताह भर चलने वाले संत समागम कार्यक्रम के तीसरे दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि घर की परेशानियां और काम की परेशानियां कभी कम नहीं होती , एक व्यक्ति सन्यासी के पास गया और कहा कि मुझे नदी में नाव के माध्यम से यात्रा करनी है लेकिन मुझे तैरना नहीं आता यदि मार्ग में मौसम खराब हो गया तो क्या होगा कृपया उपाय बताएं। सन्यासी ने कहा कि तुम जब भी यात्रा पर जाओ तो नाव में 2 खाली पीपे रखना, जब भी तुम्हें लगे की नाव डूबने वाली है तो उन खाली पीपों को लेकर कूद जाना। वो व्यक्ति बड़ा खुश हुआ और वह 2 खाली पीपे घर ले आया। यात्रा में संयोगवश बड़ा तूफान आया और नाव डूबने लगी, जो लोग तैरना जानते थे वे तैर का दरिया पार कर गए। जब नौकर ने सेठ जी को कूदने को कहा तो सेठ ने कहा कि मुझे कोई दिक्कत नहीं है संत के दिए हुए 2 पीपे मेरे पास हैं। लेकिन सेठ ने उनमें सोने चांदी की अशरफियां भरी थी। सेठ जब पीपों को खाली करने लगा तो उसका मन सोने-चांदी को छोड़ने को न हुआ और सेठ उन दौलत से भरे पीपों के साथ ही कूद गया और पानी में डूब गया। इसका भावाार्थ यहीं है कि जब भी परमात्म मार्ग पर आगे बढ़ना हो तो पहले दिमाग में जो दुनिया का कचरा भरा है उसे निकालना जरूरी है। इससे पूर्व भजन सम्राट वेद कमल ने ‘‘आप जिनके करीब होते हैं, वो बड़े खुशनसीब होते हैं’’ और ‘‘राधे राधे राधे बोल, बरसाने की गली अनमोल’’ गाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि संजय जुनेजा ने दीप प्रज्जवलित कर कथा का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर प्रधान रमेश चुघ, हरनाम चुघ, अमरजीत सपड़ा, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, उत्तम आहूजा, कर्म सिंह रामदेव, शाम सपड़ा, गोल्डी बांगा, अमर वधवा, सुरेन्द्र जुनेजा, ओमी चुघ, मोहन रामदेव, राघव चुघ, अमन रामदेव, शक्ति सिंह रेवड़ी, ईश्वर लाल रामदेव, जगदीश जुनेजा, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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