आदमी कितना ही जोड़ ले लेकिन उसने अंत में जाना तो लकड़ियों में ही है: स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज
BOL PANIPAT : श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2080 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में सप्ताह भर चलने वाले संत समागम कार्यक्रम के पांचवें दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि एक बार कुछ लुटेरों ने एक संत को पकड़ लिया, संत चुपचाप उनके साथ चल पड़े। एक किसान ने संत को देखकर लुटेरों से पूछा कि कहा जा रहे हो तो उन्होंने कहा कि हम संत को बेचने जा रहे हैं, तो किसान ने संत के बदले 500रू देने की पेशकश की लेकिन संत ने कहा कि मेरा यह सही मूल्य नहीं है। कुछ दूर आगे चलने पर एक और व्यक्ति मिला उसे संत के बदले 1000 रू में बेचने को कहा तो संत ने फिर कहा कि यह मेरा वास्तविक मूल्य नहीं है। एक संत को देखकर एक व्यापारी ने एक लाख रू में बेचने को कहा कि लेकिन संत ने कहा कि यह भी उनका सही मूल्य नहीं है। अंत में एक गरीब आदमी एक लकड़ी का गट्ठर सिर पर लाद कर ला रहा था उसने जब लकड़ी के गट्ठर के बदले संत को खरीदने का प्रस्ताव रखा तो संत फौरन मान गए कि यही है मेरा वास्तविक मूल्य, उन्होंने कहा कि आदमी कितना ही जोड़ ले लेकिन उसने अंत में जाना तो लकड़ियों में ही है। इससे पूर्व प्रसिद्ध समाजसेवी मुख्य अतिथि अनिल छाबड़ा ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि का स्वागत महाराज जी ने पगड़ी एवं माला पहनाकर किया।
इससे पूर्व प्रसिद्ध भजन गायक वेद कमल ने ‘‘गुरूजी तेरा प्यार जदों मिल जावे, मैं दुनियां तूं हौर की लैणा’’ भजन गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर प्रधान रमेश चुघ, हरनाम चुघ, अमरजीत सपड़ा, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, पवन चुघ, किशन चुघ, उत्तम आहूजा, कर्म सिंह रामदेव, जगदीश जुनेजा, शाम सपड़ा, गोल्डी बांगा, अमर वधवा, सुरेन्द्र जुनेजा, भव्य चुघ, ओमी चुघ, मोहन रामदेव, राघव चुघ, अमन रामदेव, शक्ति सिंह रेवड़ी, ईश्वर लाल रामदेव, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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