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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत एनएसएस ने राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह के माध्यम से छात्र-छात्राओं को किया जागरूक

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 3, 2023 Tags: , , , ,

पहले दिन पोस्टर मेकिंग और स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का हुआ भव्य आयोजन

जैव विविधता के साथ खिलवाड़ और प्रकृति के बेलगाम दोहन ने पैदा किया वन्य प्राणियों के अस्तित्व पर संकट: डॉ अनुपम अरोड़ा

BOL PANIPAT , 03 अक्टूबर.

   एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस यूनिट्स और जैव विज्ञान के संयुक्त तत्वाधान में 2 से 8 अक्टूबर तक मनाये जा रहे राष्ट्रीय वन्य जीव सप्ताह के माध्यम से छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया ताकि वे पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवो की सुरक्षा को लेकर गंभीर बने और इसके संरक्षण में मदद करे. प्रथम दिन वाइल्ड लाइफ थीम पर आयोजित पोस्टर और स्लोगन मेकिंग प्रतियोगिता का उदघाटन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने किया. उनके साथ एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग, डॉ राहुल जैन, प्रो राकेश सिंगला, प्रो ऋतु, प्रो नम्रता, प्रो रिया, डॉ एसके वर्मा और दीपक मित्तल ने पर्यावरण और वन्य जीवन पर आधारित पोस्टर्स एवं स्लोगन प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रतिभागियों का हौंसला बढाया. जूरी की भूमिका प्रो प्रवीन खेरडे, प्रो गीता प्रुथी और प्रो प्रवीण कुमारी ने निभाई. कार्यक्रम में बीएससी मेडिकल के साथ-साथ कॉलेज के लगभग 150 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. विदित रहे कि वनों का संरक्षण अब हर सरकार की पहली प्राथमिकता बन गया है. बेहतर तालमेल से हम कई लुप्त हो रहे पेड़-पौधों, सुक्ष्म जीवो, जंगली जानवरों और पक्षियों के संरक्षण को सुनिश्चित कर सकते है. इसी उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 2 से 8 अक्टूबर के दौरान वन्य जीव सप्ताह का आयोजन आयोजिन किया जाता है ताकि देश के आमजन भी अपनी जिम्मेदारी को समझे और वन्य प्राणियों को बचाने एवं संजोने के कार्य में तत्पर बने. इस बार के राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह का थीम “वन्यजीव संरक्षण के लिए साझेदारी” है.

डॉ अनुपम अरोड़ा प्राचार्य ने कहा कि भारत की वनस्पतियों और जीवों की रक्षा और संरक्षण के उद्देश्य से 2 से 8 अक्टूबर के दौरान प्रतिवर्ष राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है. इस वर्ष यह देश का 69वां वन्यजीव सप्ताह हैं. उन्होनें कहा कि भारतीय वन्यजीव बोर्ड का गठन भारत के वन्यजीवों की रक्षा के दीर्घकालिक लक्ष्यों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 1952 में किया गया था. अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का अंधाधुंध दोहन करने में डूबे इंसान को इस बात का अंदाजा ही नहीं है कि वह अपने साथ-साथ लाखों अन्य जीवों के लिए इस धरती पर रहना कितना दूभर करता जा रहा है. हमने अपनी सुख-सुविधाओं और तथाकथित विकास के नाम पर धरती पर मौजूद संसाधनों का प्रबंधन और दोहन इस तरह से किया है कि दूसरे जीवधारियों के जीवन के आधार ही समाप्त हो गए हैं. विकास का सबसे बुरा शिकार जंगल और वन्यप्राणी हुए हैं. कितने ही पशु-पक्षियों की प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं और कितनी ही विलुप्ति के कगार पर खड़ी हैं. वन्य जीवों के संरक्षण के लिए हम हजारों कार्यशालाएं, सेमिनार और सम्मेलन आयोजित करते आ रहे हैं लेकिन इससे वन्य जीवों की विलुप्ति दर में कमी नहीं आ रही है. वन्य जीव सप्ताह सिर्फ नारे लगाने से सफल नहीं होगा बल्कि इसको सफल बनाने के लिए हमें वन्य जीवों को स्वयं के अस्तित्व से जोड़कर देखना होगा. अब समय आ गया है कि हम सभी इंसान अपनी जिम्मेदारियां समझें. सिर्फ विचार-विमर्श या सम्मेलन ही नहीं धरती और वन्य जीवों को बचाने के संकल्प के साथ इस दिशा में ठोस कदम हमें उठाने होंगे.

प्रो प्रवीण कुमारी ने कहा कि जब से इंसान ने अपनी भौतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए जैव विविधता के साथ खिलवाड़ और बे-लगाम दोहन शुरू किया है तभी से वन्य प्राणियों के अस्तित्व के लिए संकट पैदा हो गया है. हम अपनी लालची प्रवृत्ति और विकास के नाम पर पृथ्वी को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. आज पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधन और वन्य जीव इंसान की करतूतों से पूरी तरह परेशान है.

डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि हमारी लालच भरी करतूतों का ही परिणाम है कि अब पृथ्वी पर उपस्थित तमाम वन्य प्राणियों के विलुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है. कई प्रजातियों का धरती से नामोनिशान ही मिट चुका है और एक बार विलुप्त हो जाने के बाद किसी प्रजाति को वापस लाने का कोई भी तरीका नहीं है. ऐसे में इंसान को समय रहते समझदारी का परिचय देना होगा.

पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का परिणाम-

 प्रथम        मोहित कुमार      बीए-प्रथम

            अन्नू            बीए-प्रथम   

द्वितीय मोहिनी बीए-द्वितीय (अंग्रेजी आनर्स)

तन्नु बीएससी-तृतीय

तृतीय साहिल बीए-द्वितीय

 सुमन       बीए-तृतीय (अंग्रेजी आनर्स)

 सांत्वना     तन्नु उपाध्याय     बीएससी- तृतीय

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