Saturday, April 18, 2026
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महिला सशक्तिकरण के लिए जरुरी बात समानता का होना नहीं बल्कि बराबर की हिस्सेदारी का होना है: प्रोफेसर आशा वर्मा

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at March 9, 2024 Tags: , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्वविधालय स्तरीय सात दिवसीय आवासीय राष्ट्रीय सेवा योजना कैंप का पांचवां दिन

–   देश में सिर्फ दो जाति होनी चाहिए, एक कर्मठ लोगों की और दूसरी निक्कमे लोगों की, देश तभी बनेगा विकसित: प्रोफेसर आशा वर्मा   उप-कुलपति और निदेशक लॉ स्कूल आईआईएलएम यूनिवर्सिटी गुरुग्राम

  • राष्ट्रपति के सर्वश्रेष्ट स्वयंसेवक के राष्ट्रीय एनएसएस पुरस्कार से अलंकृत दीपक सिंह ने किया स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन
  • – मेगा डेंटल हेल्थ चेक-अप कैंप का हुआ आयोजन     

BOL PANIPAT , 09 मार्च, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में चल रहे विश्वविधालय स्तरीय सात दिवसीय आवासीय राष्ट्रीय सेवा योजना कैंप के पांचवें दिन बतौर मुख्य अतिथि और वक्ता प्रोफेसर (डॉ) आशा वर्मा उप-कुलपति और निदेशक लॉ स्कूल आईआईएलएम यूनिवर्सिटी गुरुग्राम ने ‘सशक्त भारत: 2047 तक आत्मनिर्भर युवाओं की ओर यात्रा’ विषय पर व्यावहारिक व्याख्यान दिया और स्वयंसेवकों को अपने ज्ञान का लाभ दिया । उनके साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सर्वश्रेष्ट स्वयंसेवक के राष्ट्रीय एनएसएस पुरस्कार से अलंकृत दीपक सिंह ने कैंप में पधारकर स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन किया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ एनएसएस स्वयंसेवक बनने के गुर सिखाये । दोपहर उपरान्त के कार्यक्रम में मेगा डेंटल चेक-अप कैंप का आयोजन किया गया जिसमे डॉ अंकुर सभरवाल ने स्वयंसेवकों और प्राध्यापकों के दांतों की नि:शुल्क जांच की और दवाईयां, पेस्ट, डेंटल फ्लॉस इत्यादि वितरित की । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कैंप सेक्रेटरी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, प्रो अन्नू आहूजा, डॉ संगीता गुप्ता, डॉ एसके वर्मा और डॉ मुकेश पुनिया ने पुष्प-रोपित गमला भेंट करके किया । मंच संचालन डॉ संतोष कुमारी ने किया ।

      कैंप के पांचवें दिन की शुरुआत प्रात: 5 बजे योग और ध्यान शिविर से हुई जिसके बाद विभिन्न खेलों के माध्यम से सभी स्वयंसेवकों ने स्वास्थ्य लाभ हासिल किया । नाश्ते के उपरान्त स्वयंसेवकों ने सभागार में कार्यशाला और डेंटल कैंप के लिए प्रस्थान किया । सांयकालीन सत्र में रंगोली, काव्य लेखन एवं पाठ और गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसके विजेताओं को कैंप के अंतिम दिन सम्मानित किया जाएगा । 

      प्रोफेसर (डॉ) आशा वर्मा उप-कुलपति ने ‘‘सशक्त भारत: 2047 तक आत्मनिर्भर युवाओं की ओर यात्रा’ विषय पर बोलते हुए कहा कि हम बचपन से ही बच्चों को समाज के चार वर्गों – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शुद्र के बारे में बताते है और जब वही बच्चे बड़े हो जाते है तो हम उन्हें जात-पात से ऊपर उठने का पाठ सिखाते है । देश में सिर्फ दो जातियों की बात होनी चाहिए । एक वह जो मेहनती और कर्मठ है और दूसरी वह जो निकम्मी है । विकसित भारत का स्वप्न तभी पूर्ण होगा । शैक्षणिक उत्कृष्टता के अलावा हमें समग्र विकास, रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और समस्या-समाधान क्षमताओं को बढ़ावा देने पर जोर देना होगा । यह युवाओं को आधुनिक दुनिया की जटिलताओं से निपटने में और समाज में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त बनाएगा । युवाओं को नौकरी चाहने वालों के बजाय नौकरी निर्माता बनने के लिए सशक्त बनाकर भारत अपनी उद्यमशीलता ऊर्जा को उजागर कर सकता है और आर्थिक विकास को तीव्र गति दे सकता है । महिला सशक्तिकरण के लिए जरुरी बात समानता नहीं बल्कि बराबर की हिस्सेदारी का होना है । शिक्षा में निवेश करके, उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देकर, सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देकर और प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करके, भारत अपने युवाओं को उनकी पूरी क्षमता का एहसास करने और राष्ट्र के लिए एक उज्जवल भविष्य के निर्माण में परिवर्तन करने के लिए एक सशक्त देश बना सकता है । महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों पर उन्होनें कहा कि घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम 2005 और कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 जैसे विधायी उपायों का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है । लैंगिक समानता के लिए संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद, राजनीतिक नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है और विकसित भारत का स्वप्न पूरा करने के लिए हमें इसे बढ़ाना होगा । 

      डॉ अंकुर सब्भरवाल वरिष्ठ दंत्य चिकित्सक पानीपत ने अपने व्याख्यान में कहा कि सच्ची मुस्कराहट दिल से ही आती है लेकिन एक स्वस्थ मुंह इसमें चार चांद लगाता है । परन्तु कई हानिकारक खाद्य पदार्थ खाने की आदतों जैसे मिठाई, जंक फूड और अम्लीय पेय दांतों की सडऩ का मुख्य कारण बनते हैं और जरा सी लापरवाही एवं असावधानी के फलस्वरूप दांत जल्द खराब हो सकते है । हमारे दांतों के खराब होने का कारण नियमित रूप से ब्रश न करना, बहुत अधिक चिपचिपा भोजन, कार्बोनेटेड पेय, चाकलेट, फास्ट फूड, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करना, दांतों की ठीक से सफाई न करना, भोजन के बाद अच्छे से कुल्ला और ब्रश न करना एवं धूमपान करना, तंबाकू खाना और नियमित रूप से शराब का सेवन करना आदि है । दांतों को आजीवन चलाने और बचाने के लिए उन्होनें कहा की हमें दांतों को ब्रश से अच्छी तरह साफ करना चाहिए । जीभ हानिकारक सूक्ष्मजीवों को पनपने का आश्रय देती है और ये सूक्ष्मजीव दुर्गंध का कारण भी बनते हैं । हमें जीभ को भी दिन में दो बार टंग क्लीनर से साफ करना चाहिए । हमें खाने के बाद सादे पानी से हमेशा कुल्ला करना चाहिए. दांतों की सडऩ, मसूढ़ों की संवेदनशीलता और मुंह की बदबू को रोकने के लिए माउथवाश सबसे बेहतरीन विकल्प है । अगर हम यह न कर सके तो हमें भोजन के बाद गुनगुने नमकीन पानी से गरारे करने चाहिए । यदि मसूढ़ों से खून आ रहा है या दांतों में कालापन हो रहा है या दांतों में दर्द हो रहा है या मुंह से बदबू आ रही है तो हमें जल्द से जल्द किसी दंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए । हमारा पूरा शरीर एक तरफ और हमारे दांत दूसरी तरफ है । दांतों का कोई भी विकल्प नहीं है ।

       डॉ अनुपम अरोड़ा ने प्रो. (डॉ.) आशा वर्मा का परिचय देते हुए कहा कि वे कानून विभाग कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा की पूर्व छात्रा हैं । वर्तमान में वह प्रो-वाइस चांसलर और निदेशक लॉ स्कूल आईआईएलएम विश्वविद्यालय गुरुग्राम (हरियाणा) के रूप में कार्यरत हैं । उनके पास बतौर शिक्षक और शोधकर्ता के रूप में 21 वर्षों का समृद्ध अनुभव है । उन्होंने प्रमुख पत्रिकाओं, पुस्तकों और समाचार पत्रों में कई लेख प्रकाशित किए हैं और 95 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं, सम्मेलनों और सेमिनारों में शोध पत्र प्रकाशित और प्रस्तुत किए हैं । उन्होंने प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों और राज्य सरकारों के साथ सहयोग करते हुए अनुसंधान परियोजनाओं पर काम किया है । वे इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल लॉ, ऑल-इंडिया लॉ टीचर्स कांग्रेस, द इंडियन सोसाइटी ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स, ऑस्ट्रेलियन लेबर लॉ एसोसिएशन मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया), एशियन एसोसिएशन ऑफ लॉ प्रोफेसर्स काठमांडू (नेपाल) आदि जैसे  निकायों की स्थायी सदस्य हैं । उनकी रुचि के क्षेत्र में श्रम कानून, मानवाधिकार, पर्यावरण कानून, अनुबंध का कानून, संवैधानिक कानून, कॉपीराइट और अनुसंधान पद्धति पर कानून शामिल हैं । वह दुनिया भर में एक मनोरम यात्रा पर रही हैं और ऑस्ट्रेलिया, लंदन, फ्रांस, हांगकांग, इंडोनेशिया, स्पेन, स्विटज़रलैंड, नेपाल, जर्मनी आदि में व्याख्यान दिए हैं और जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों के साथ जुड़े हुए अनुभवों और अंतर्दृष्टि के साथ खुद को समृद्ध किया है और ज्ञान का खजाना अपने जीवन में समाहित किया है ।

डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि दीपक सिंह ने प्रधानमन्त्री योजना, उज्जवला योजना, जन-धन योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढाओ जैसी स्कीमों में मेहनत से कार्य किया. रक्तदान शिविरों में 17 बार रक्तदान दिया । कोरोना काल में गरीब और वंचित विद्यार्थियों एवं बच्चों की मदद आर्थिक और शैक्षणिक की. 750 से अधिक वृक्ष लगाकर अपने पर्यावरण बोध का परिचय दिया । दीपक के इन्ही सर्वोत्तम कार्यों के कारण वे 2017 से 2020 तक कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के सर्वश्रेष्ट स्वयंसेवक रहे और उन्हें एनएसएस स्टेट अवार्ड (2018-20) से अलंकृत किया गया । कैंप में उपस्थित हर युवा स्वयंसेवक दीपक सिंह के बताये मार्ग का अनुसरण करके कामयाबी हासिल कर सकता है ।

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