Friday, June 5, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में वर्ल्ड रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट डे को मानव सेवा के जज़्बे और पावन भाव के साथ मनाया गया.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at May 8, 2024 Tags: , , , , ,

कॉलेज वाईआरसी की अगुआई में कार्यकर्ताओं को दिलाई गई मानव सेवा की शपथ 

इंसान में इंसानियत, समुदायवाद और आपसी सदभाव के भाव पैदा करता है रेड क्रॉस: डॉ अनुपम अरोड़ा  

BOL PANIPAT , 08 मई. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में वर्ल्ड रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट डे को मानव सेवा के जज़्बे और पावन भाव के साथ मनाया गया । कॉलेज वाईआरसी की अगुआई में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 60 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और मानव सेवा की सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय संस्था में मन से कार्य करने की शपथ उठाई । उनके साथ एनएसएस स्वयंसेवक भी उपस्थित रहे । कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, वाईआरसी काउंसिलर डॉ पवन कुमार, एनएसएस अधिकारी डॉ राकेश गर्ग और प्रो मनोज ने की । आकर्षण का केंद्र प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा का वक्तव्य रहा जिसने एनएसएस और वाईआरसी कार्यकर्ताओं को खूब प्रेरित किया और उनमें नए जोश का संचार किया । इस अवसर पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका थीम ‘हम जो कुछ भी करते हैं वह दिल से होता है’ रहा जिसमे प्रतिभागियों ने रंग-बिरंगे पोस्टर्स बनाए । कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने सभी कार्यकर्ताओं को नि:स्वार्थ भाव से मानव सेवा करने की शपथ दिलाई । वर्ल्ड रेड क्रॉस डे के अवसर पर कॉलेज में वृक्षारोपण कर विभिन्न किस्मों के पौधे भी लगाए गए जिनमें फलदार पौधे भी शामिल थे ।

     पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे-

प्रथम                 सौरभ            बीकॉम-तृतीय

द्वितीय           भारती           बीए-तृतीय

तृतीय                 ख़ुशी            बीकॉम-तृतीय

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि किसी भी देश में कोई न कोई आपदा आती ही रहती है । जब भी किसी देश में कोई मुसीबत या परेशानी आती है तो उस देश की सरकार के द्वारा बचाव कार्य करके लोगों की जान बचाई जाती है । रेड क्रॉस भी ऐसे ही लोगों की सहायता करती है । रेड क्रॉस संस्था लोगों के खाने-पीने, चिकित्सा और उनके रहने की व्यवस्था करती है । किसी भी देश में मुसीबत के दौरान यह संस्था सामने आकर ज़्यादा से ज़्यादा मानव जीवन की रक्षा करती है । भारत में रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थापना 1920 में पार्लियामेंट्री एक्ट के दौरान की गई थी और आज भारत में रेड क्रॉस सोसाइटी की 700 से भी ज्यादा शाखाएं है । केवल मात्र सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए हमें रेड क्रॉस या वाईआरसी से नहीं जुड़ना चाहिए । दूसरों के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने का नाम ही रेड क्रॉस है ।

पवन कुमार ने कहा कि कॉलेज चाहता है कि आज के युवा जो कल का भविष्य है हर मायने में तंदुरस्त और सेहतमंद रहे और इसी प्रकार वाईआरसी और रेड क्रॉस से जुड़ कर सामाजिक हित के कार्य करते रहे ।  रेड क्रॉस सोसाइटी और इसके कार्यकर्ता हर जगह और हर समय दृढ़ता और मेहनत से अपना काम करते रहेंगे ऐसा उन्हें भरोसा है ।

डॉ राकेश गर्ग ने रेड क्रॉस के बारे में बताते हुए कहा कि मानवता को बचाने वाली सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय संस्था का नाम ही रेड क्रॉस है । रेड क्रॉस एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसे युद्ध में घायल होने वाले सैनिकों की सहायता के लिए बनाया गया था परन्तु आज इसका कार्य क्षेत्र और भी व्यापक हो गया है । इसका उद्देश्य मानव जीवन की रक्षा करना है चाहे वो युद्ध हो या अन्य आपदाएं । हेनरी ड्यूनेंट नामक व्यक्ति ने1867  में इस संगठन की शुरुआत की थी । रेड क्रॉस मानवता की सेवा करने वाली सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय संस्था है । उन्होनें सभी युवाओं से अपील की कि वे भी मानवता की सेवा करने का भाव खुद में पैदा करे । रेड क्रॉस से जुड़ा व्यक्ति सैदेव अच्छे कार्य करता है जिससे उसे आत्मिक शान्ति प्राप्त होती है । रेड क्रॉस मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, स्वैच्छिक सेवा, एकता और सार्वभौमिकता जैसे सिद्धांतो पर चलती है । रेड क्रॉस से जुड़ा हर व्यक्तित्व दैवीय है ।

डॉ एसके वर्मा ने कहा कि वाईआरसी कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे रेडक्रॉस के युवा क्लब से जुड़कर प्राथमिक उपचार एवं आपदा से निपटने का प्रशिक्षण समय रहते ले ताकि समय पड़ने पर वे आम जनमानस का सहयोग कर सके । कोई भी समाज या देश अकेले सरकार के प्रयासों से अपने लक्ष्यों को पूरी तरह प्राप्त नहीं कर सकता और ऐसे में सामाजिक संस्थाओं को समाज व देश के हित में पूरी शिद्दत से काम करने की जरूरत है । सामाजिक सेवा के प्रति समर्पण के लिए नई पीढ़ी के युवाओं को और प्रेरित करने की आवश्यकता है और आज का दिन इसी उद्देश्य का निर्वाह करेगा । आज के समय में रेडक्रॉस अपने सामाजिक दायित्वों को सबसे बेहतर ढंग से निभा रहा है ।

इस अवसर पर डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो इंदु पूनिया, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला उपस्थित रहे ।

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