Tuesday, May 26, 2026
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जिस देश का युवा किताबें पढता है वही देश आगे बढ़ता है: पीके दास

By LALIT SHARMA , in Uncategorized , at August 19, 2024

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राज्य स्तरीय सात दिवसीय ‘पानीपत महोत्सव तृतीय पुस्तक मेला’ का तीसरा दिन 

चुनाव में पानीपत के नागरिक शत प्रतिशत मतदान करे: डॉ वीरेंद्र दहिया उपायुक्त पानीपत   

BOL PANIPAT , 19 अगस्त.     एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राज्य स्तरीय सात दिवसीय ‘पानीपत महोत्सव – तृतीय पुस्तक मेला’ जो हरियाणा पुलिस की पहल, जिला प्रशासन के सानिध्य और नगर निगम पानीपत, जिला परिवहन विभाग पानीपत, महिला बाल विकास पानीपत, पंचायत विभाग पानीपत, राजभाषा अनुभाग इंडियन आयल पानीपत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा और आयुष विभाग के सहयोग से आयोजित है के तीसरे दिन बतौर मुख्य अतिथि पीके दास अध्यक्ष राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण हरियाणा ने शिरकत की । कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ वीरेंद्र कुमार दहिया आई.ए.एस. उपायुक्त पानीपत ने की । उनके साथ इंडियन आयल के डीजीएमसी सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा और हरीओम तायल चेयरमैन पाईट समालखा ने कार्यक्रम की शोभा बढाई । माननीय मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल और प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने पौधे रोपित गमलें भेंट करके किया । तीसरे दिन का थीम ‘प्रदुषण मुक्त हो शहर हमारा’ और ‘प्राकृतिक सुन्दरता को सुरक्षित बनाएं, भविष्य को उज्जवल बनाएं’ रहा ।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई और इसके बाद पीएमसी स्कूल मॉडल टाउन पानीपत की छात्राओं ने हरियाणवी नृत्य और ‘आएगा-आएगा नया ज़माना जरुर’ गीत पेश कर सभी का मन मोह लिया । तीसरे दिन भी पुस्तक मेले किताबें देखने और खरीदने वालों की भीड़ बनी रही । पुस्तक मेले के प्रथम दिन ही लगभग 3 लाख रूपये की पुस्तकों की बिक्री हुई । यह पुस्तक मेला प्रतिदिन सुबह 10 बजे से सांय 7 बजे तक जारी रहेगा जिसमे पानीपत के प्रत्येक नागरिक का पधारने पर स्वागत है । मंच संचालन डॉ संगीता गुप्ता और जन सम्पर्क अधिकारी राजीव रंजन ने किया । कॉलेज एनएसएस ने मेहमानों के स्वागत और अनुशासन की व्यवस्था संभाली ।

पीके दास अध्यक्ष राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण हरियाणा ने सर्वप्रथम सभी को रक्षाबंधन की बधाई दी । उन्होनें कहा कि रक्षाबंधन पर हमें सुरक्षा का वचन लेने की बजाये विशेष सम्बन्ध बनाने पर जोर देना चाहिए । मानव जीवन का उद्देश्य पैसा कमाना नहीं होना चाहिए बल्कि इंसान को साहित्यिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक तौर पर खुद को समृद्ध करना होना चाहिए । हमें अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में सामंजस्य बनाना सीखना चाहिए । हरियाणा में संस्कृति और सभ्यता का निरंतर विकास होता आ रहा है जो एक अच्छी बात है और ऐसा करने में पुस्तकों को पढने की आदत का होना एक महत्वपूर्ण योगदान है । प्रबुद्ध व्यक्ति ही चीज़ों और घटनाओं पर आलोचनात्मक टिप्पणियाँ कर सकता है जो किसी भी सभ्यता के निर्माण और विकास का मूल मन्त्र है । प्रबुद्ध व्यक्ति ही गलत धारणाओं और कुरीतियों को तोड़ने में सक्षम होता है । पानीपत महोत्सव और पुस्तक मेला इसी उदेश्य की प्राप्ति का साधन बनेगा ऐसा उन्हें पूर्ण विश्वास है । हर पुस्तक अपने आप में गंभीर होती है और हमें अपने पाठ्यक्रम से हटकर भी पुस्तकें पढनी चाहिए । हम जन्मदिवस, फिल्म टिकेट पर फ़ालतू पैसे खर्च कर सकते है तो पुस्तकों पर क्यूँ नहीं? इस महोत्सव के माध्यम से पूरा शहर इस आन्दोलन से जुड़े और पुस्तकें पढने का शौक लोगों में फिर से पैदा हो ऐसी उनकी मंगल कामना है । 1990-91 में जैसे उन्होनें पानीपत में ‘साक्षरता अभियान’ की शुरुआत की थी अब समय आ गया है कि पानीपत में ‘सांस्कृतिक और साहित्यिक‘ विकास हो । वे खुद इस पाठक आन्दोलन का सदस्य बनकर इस मुहीम को हरियाणा के हर गाँव और शहर तक पहुँचाना चाहते है ।  

विशिष्ट अतिथि डॉ वीरेंद्र कुमार दहिया उपायुक्त पानीपत ने कहा कि ज्ञान से ही किसी मनुष्य के असल स्वभाव और चरित्र का पता चलता है । ज्ञान से ही हमारा स्तर बनता है । मुन्ही प्रेमचंद, विलियम शेक्सपियर आदि का उदाहरण देते हुए उन्होनें कहा कि अच्छे लेखकों को पढने से हमारा बौधिक और भावनात्मक विकास होता है । मनुष्य का विवेक ज्ञान अर्जित करने से ही बनता है । हमें संचित ज्ञान को खुद तक सिमित नहीं रखना चाहिए बल्कि इसे दूसरों को भी बांटना चाहिए । हमें अंधविश्वासों और गलत परम्पराओं से बचना चाहिए । कब, कैसे और क्यूँ जैसे सवाल हमें खुद से करते रहना चाहिए ताकि आलोचनात्मक गुण हम खुद में पैदा कर सकें । उन्होनें सभी से आह्वान किया कि इस पुस्तक मेले से कम से कम एक पुस्तक खरीद कर घर जाए । उन्होनें सभी दर्शकों से यह वचन भी लिया कि आने वाले विधान सभा चुनाव में वे अपना वोट जरुर डालेंगे ।   

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य छात्र-छात्राओं और समाज में प्रतिद्वन्दता के भावों को बढ़ाना नहीं बल्कि सभी के समग्र  विकास और भागीदारी को सुनिश्चित करना है । रक्षा बंधन के अवसर पर उन्होनें प्रकृति और पुस्तकों के साथ भी इस डोर को बाँधने का आह्वान किया । समय की मांग है कि अब इंसान अपने बौधिक विकास और पर्यावरण बोध के प्रति सचेत हो और इसमें पुस्तकें ही हमारी मदद कर सकती है । बढ़ते प्रदुषण ने देश के नागरिकों के जीवन से 5 वर्ष और 3 महीने छीन लिए है और यदि इसको अब भी रोका न गया तो आने वाला भविष्य और भी भयावह होगा ।    

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