धूमधाम से मनाया जायेगा पर्वाधिराज पर्यूषण दस लक्षण पर्व.
BOL PANIPAT : आज से भाद्रपद माह का शुभारंभ हो रहा है जैन धर्म में बात भाद्रपद माह की बहुत बड़ी विशेषता है
इस माह सभी अनुयायी व्रत, उपवास त्याग, तप एवं दान आदि विशेष रूप से करते हैं इसी भाद्रपद माह में पर्युषण पर्व (दसलक्षण धर्म) मनाए जाते हैं यह कार्यक्रम श्री दिगंबर जैन मंदिर जैन मोहल्ला में मनाए जाते हैं
इसके अलावा पानीपत में स्थित सभी सातों जैन मंदिर में इस महोत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है. पर्यूषण पर्व के अंतर्गत ही करीबन 250 वर्ष प्राचीन परंपराओं और उत्सवों का आयोजन होता है. जिसमें विशेष रूप से धूप दशमी के पावन अवसर पर जोत नगर भ्रमण दर्शन का आयोजन किया जाता है साथ ही आनंद चौदस के दिवस प्राचीन परंपरा के तहत जल यात्रा का भी आयोजन किया जाता है. जानकारी देते हुए मोटीवेटर एवं अधिवक्ता मेहुल जैन ने बताया कि जैन धर्म के दिगंबर अनुयायियों द्वारा आदर्श अवस्था में अपनाए जाने वाले गुणो को दसलक्षण धर्म कहा जाता है. इसके अनुसार जीवन में सुख शांति के लिए उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, अकिंचन और ब्रह्मचर्य आदि दसलक्षण धर्मो का पालन हर मनुष्य को करना चाहिए. दिगंबर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्यूषण दस लक्षण पर्व इस तरह मनाए जाते हैं.
पर्यूषण पर्व 8 सितंबर से 17 सितंबर (दसलक्षण धर्म)
जैन धर्म के अनुयायी प्रतिदिन व्रत, उपवास एवं विधान आदि का आयोजन करते हैं प्रतिदिन संध्या में आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन होता है
धूप दशमी 13 सितंबर (ज्योत नगर भ्रमण)
स्थानीय श्री दिगंबर जैन मंदिर जैन मोहल्ला से संध्या के समय पवन जोत का नगर भ्रमण कराया जाता है यह परंपरा ढाई सौ वर्ष से पानीपत में आयोजित निर्बाध रूप से आयोजित की जा रही है
अनंत चौदस 17 सितंबर (जल यात्रा)
स्थानीय श्री दिगंबर जैन मंदिर जैन मोहल्ला से दोपहर में जल यात्रा का आयोजन किया जाता है तत्पश्चात इंद्रो के द्वारा भगवान श्री पारसनाथ की बड़ी मूर्ति का महा मस्ताकाभिषेक किया जाता है
क्षमा वाणी पर्व 18 सितंबर
पर्यूषण पर्व के समापन पर सभी एक दूसरे से पूरे वर्ष में हुई या की गई गलती या त्रुटि के लिए क्षमा याचना करते हैं यह पर्व अपने आप में अनोखा पर्व है जैन धर्म में सभी लोग साल में एक बार एक दूसरे से क्षमा याचना करते हैं कि पूरे वर्ष में जो भी गलती हमसे किसी के प्रति हुई है उसके लिए क्षमा याचना
आपको बता दें कि श्वेतांबर जैन और दिगंबर जैन दोनों ही पर्यूषण पर्व मनाते हैं। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। श्वेतांबर जैन इसे 8 दिन के लिए मनाते हैं, वहीं दिंगबर जैन के लिए इसे 10 दिनों के लिए मनाते हैं। यह पर्व अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है । दिगंबर संप्रदाय के लोग 10 दिन तक पर्यूषण मनाते हैं जिसे दशलक्षण पर्व कहा जाता है। इन दस दिनों में जैन धर्म के अनुयायी दस लक्षण उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम अकिंचन्य, उत्तम ब्रहमचर्य का पालन करते हैं।

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