Monday, May 18, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय खेल दिवस पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at August 29, 2024 Tags: , , , ,

इस वर्ष का थीम है ‘शांतिपूर्ण और समावेशी समाजों के संवर्धन के लिए खेल’

खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बल्कि समाज में सौहार्द और एकजुटता को बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं: डॉ सुशीला बेनीवाल

BOL PANIPAT , 29 अगस्त, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया जिसमें बतौर मुख्य वक्ता डॉ सुशीला बेनीवाल विभागाध्यक्षा ने शिरकत की और युवा छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय खेल दिवस और खेलो के महत्व पर व्याख्यान दिया । सेमीनार का उदघाटन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने किया । वर्ष 2024 के राष्ट्रीय खेल दिवस का का थीम ‘शांतिपूर्ण और समावेशी समाजों के संवर्धन के लिए खेल’ है और यह थीम सभी नागरिकों को अपने जीवन में खेल भावना, टीम वर्क और निष्पक्ष खेल के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करती है जिससे एक शांतिपूर्ण और समावेशी समाज का निर्माण हो सके । इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को मोबाइल से हटकर कुछ समय खेलों को देने बारे शपथ भी दिलाई गई ।

     डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि आधुनिक समय में मोबाइल ने इंसान का बेडा गर्क भी किया है । छोटे-छोटे बच्चों को भी ह्रदय, कैंसर एवं अवसाद जैसी बीमारियाँ घेरने लगी है जो बड़ी चिंता का कारण है । इसके पीछे फ़ास्ट फ़ूड की आदत और शारीरिक क्रियाओं को न करना जैसे कारण है । घर में खाली बैठे रहना, व्यायाम न करना, किसी खेल-कूद में भाग न लेना जैसे कारणों से इंसान का शरीर खराब होने लगा है । सिर्फ हमारे व्यक्तिगत जीवन में ही नहीं बल्कि खेलों का समाज में एकता, समावेश और शांति को बढ़ावा देने में कितना महत्वपूर्ण योगदान है इसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते । खेल विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को एक साथ लाकर, आपसी सम्मान, समझ और सहयोग को प्रोत्साहित करते हैं । देश में 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है । और राष्ट्रीय खेल दिवस को 2012 में पहली बार भारत में उत्सव के दिनों की सूची में शामिल किया गया था । यह दिवस हॉकी के दिग्गज ध्यान चंद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है । हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों में जीवन में शारीरिक गतिविधियों और खेलों के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं और सेमिनार भी आयोजित किए जाते हैं । वर्षों से सरकार ने इस दिन का उपयोग विभिन्न खेल योजनाओं को शुरू करने के लिए एक मंच के रूप में भी किया है  जिसमें खेलो इंडिया मूवमेंट भी शामिल है । सिर्फ इतना ही नहीं, राष्ट्रीय खेल दिवस एक ऐसा अवसर है जब देश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खेल रत्न, अर्जुन पुरस्कार, ध्यान चंद पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसी मान्यताओं से सम्मानित किया जाता है ।

     डॉ सुशीला बेनीवाल ने कहा कि भारत एक ऐसा देश जिसने सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली और बलबीर सिंह सीनियर जैसे खेल के सुपरस्टार देखे हैं । इनके बावजूद हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यान चंद ने अपने लिए एक विशेष स्थान हासिल किया हुआ है । 29 अगस्त, 1905 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) में जन्मे ध्यान चंद सिंह ने स्वतंत्रता से पहले जो कुछ किया वह दांतों तले ऊँगली दबाने जैसा था । द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के वर्षों में खेल में हावी रहने वाले ध्यान चंद सिंह ने 1928, 1932 और 1936 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भारत को ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने और अपनी पहली हैट्रिक पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । रेजिमेंटल कर्तव्यों में दिन बिताने के साथ ध्यान सिंह चांदनी रात में अपनी हॉकी का अभ्यास करते थे जिसके कारण उन्हें ध्यान चंद नाम दिया गया । वो आने वाले वर्षों में तेजी से आगे बढ़े एवं विभिन्न इंटर-आर्मी मैचों के साथ अपनी टीमों की मदद करने लगे और जल्द ही 1928 के ओलपिक के लिए भारतीय हॉकी टीम में शामिल हो गए । उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा और हॉकी के कमाल से दुनिया पर राज किया जिसने उन्हें ‘हॉकी जादूगर’ और ‘द मैजिशियन’ बना दिया । हॉकी के इस दिग्गज का करियर 1926 से 1948 तक चला और भारत के लिए 185 मैचों का प्रतिनिधित्व करने के बाद सबसे महान हॉकी खिलाड़ियों में से एक बनकर उन्होंने अपने करियर को अंजाम दिया । जब वे 1956 में भारतीय सेना की पंजाब रेजिमेंट में एक मेजर के पद से रिटायर हुए तो भारत सरकार ने उसी वर्ष पद्म भूषण से सम्मानित किया जो कि देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है ।

     इया अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ मुकेश पुनिया, डॉ एसके वर्मा, डॉ अन्नू आहूजा, डॉ राकेश गर्ग, डॉ पवन कुमार आदि उपस्थित रहे ।

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