एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विवेकानंद जयंती ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन.
–भारत की प्रचंड युवा शक्ति इस राष्ट्र के उज्जवल भविष्य का उदघोष है: प्रो संजीव अग्रवाल, डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र
–महाविद्यालय स्टाफ, विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने ली एकता और अखंडता को संजोने की शपथ
–राष्ट्रीय सेवा योजना के सानिध्य में हुआ कार्यक्रमों का आयोजन
BOL PANIPAT , 11 जनवरी,
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में स्वामी विवेकानंद जयंती ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें बतौर मुख्य अतिथि प्रो संजीव अग्रवाल डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र ने शिरकत की । मेहमान का स्वागत कॉलेज जनरल सेक्रेटरी महेंद्र अग्रवाल और प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने किया । उनके साथ एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग और स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे । कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर हुई । तत्पश्चात महाविद्यालय स्टाफ, विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने देश की एकता और अखंडता को संजोने की शपथ ली ।
प्रो संजीव अग्रवाल ने कहा कि भारतीय नवजागरण के अग्रदूत, भारतीय सभ्यता संस्कृति धर्म और अध्यात्म की अनमोल विरासत को विश्व पटल पर सम्मानित करने वाले महान चिंतक स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति के सर्वाधिक प्रेरक पुंज और अनुकरणीय आदर्श हैं । विवेकानंद ने इस विश्वास को सुदृढ़ बनाया कि आत्मोन्नति और कल्याण की दृष्टि से सनातन हिन्दु धर्म से बढ़कर धार्मिक सिद्धांत विश्व में कहीं भी अस्तित्व में नहीं है । स्वामी विवेकानंद की भारत की युवा पीढ़ी में गहन आस्था थी और उन्होंने ‘उठो जागो और तब तक न रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए’ के उदघोष से राष्ट्र की युवा पीढ़ी में नई चेतना, नई शक्ति, नई ऊर्जा और अद्भुत आत्मविश्वास का संचार किया । युवा शक्ति हमारे राष्ट्र की अमूल्य संपदा एवं प्राणतत्व है । युवा ही हमारी गति, स्फूर्ति, चेतना, प्रज्ञा और राष्ट्र का ओज है । युवा हमारे देश के भावी कर्णधार और देश की आशाओं एवं आकांक्षाओं के सुमन है । इन युवाओं का कर्म ही वास्तव में देश धर्म है । जिस व्यक्ति की ऊर्जा अक्षुण्ण है, जिसका यश अक्षय है, जिसका जीवन अंतहीन है, जिसका पराक्रम अपराजेय है, जिसकी आस्था अडिग है और संकल्प अटल है वही सच्चे मायनों में युवा है । जो अपनी शक्ति, सामर्थ्य और साहस से राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाने का दायित्व सहर्ष स्वीकारता है वही युवा है । स्वामी जी भली-भांति जानते थे कि हमारे शक्तिमान, बुद्धिमान, पवित्र और नि:स्वार्थ युवा ही भारत के गौरव को स्थापित और आगे बढ़ा सकते है । युवा ही भारत और संपूर्ण संसार का उत्थान कर सकते हैं परन्तु ऐसा करते समय युवाओं को कठिन परिश्रम करना होगा और अपना आलस्य त्यागना होगा । युवाओं द्वारा किये गए कार्यों पर ही भारत का भविष्य निर्भर है । स्वामी विवेकानंद ने धर्म की श्रेष्ठता को स्थापित करते हुए युवा पीढ़ी को वेदांत का उपदेश देकर धर्म की महत्ता से परिचित कराया । संसार के कल्याण के लिए ज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए स्वामी जी ने कहा कि युवकों को ज्ञान के प्रकाश का विस्तार करना चाहिए । यह रोशनी प्रत्येक व्यक्ति के द्वार तक ऊंच-नीच का भेदभाव किए बिना पहुँचनी चाहिए । स्वामी जी चाहते थे कि भारतीय युवा पश्चिम से तकनीक और प्रौद्योगिकी का ज्ञान तो प्राप्त करें परंतु बदले में उन्हें भारतीय धर्म और दर्शन के उदात्त मूल्यों से परिचित भी कराएं । वेदांत दर्शन के मर्म को गहराई से समझने वाले स्वामी जी ने युवकों को ‘आत्म दीपो भव’ की शिक्षा दी । वे चाहते थे कि हमारे युवा महत्वाकांक्षी बने और बड़े-बड़े सपने देखें और फिर बड़े आदर्शों को लेकर महान कार्य करें । वे युवाओं को भारतीय संस्कृति के इतिहास और आध्यात्मिक परंपराओं का उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे । स्वामीजी भारतीय समाज को स्वाभिमानी बनाने तथा एकजुट होने की उन्होंने प्रेरणा देते रहे और अब हर युवा का दायित्व है कि वह उनके दूरदर्शी दर्शन को अपने व्यवहार में साकार कर इस देश के साथ-साथ सम्पूर्ण दुनिया का मार्गदर्शन करे ।
महेंद्र अग्रवाल जनरल सेक्रेट्री ने कहा कि जिन समस्याओं से आज हम जूझ रहे है यदि हम थोड़ा सा भी स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं एवं उनके विचारों को अपना ले तो ये समस्याएँ खुद-ब-खुद छू-मंतर हो जाएंगी । आत्म-ज्ञान का बोध रखने वालों और हम में अंतर सिर्फ यही है कि हम अपने अंदर कभी नहीं झाँकते । विवेकानंद को जानने से यही गुण हम सब में पैदा होता है । आज की युवा शक्ति को सर्वाधिक आत्म-प्रबंधन की जरूरत है । दूसरों की मदद करना सबसे बड़ा कार्य है । हम अपनी सोच से महान बनते है ना की अपनी योग्यता से. बेशक आज सोच भौतिकतावादी हो गई है परंतु सोच और बुद्धि बदलते ही हमारा चरित्र बदल जाएगा और तभी हमारा भविष्य सुरक्षित होगा । यही स्वामीजी ने हमें सिखाया है ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि मानव असीमित ऊर्जा से भरपूर है परंतु इसे सही दिशा में लगाना सबसे बड़ी चुनौती है । स्वामीजी के विचारों से ही हम ऊर्जा नियंत्रण और इसके सकारात्मक इस्तेमाल को सीख सकते है । दान, सत्य और ईमानदारी के गुण हमें स्वामीजी से ही विरासत में मिले है और यही हमारे युवाओं का उद्धार कर सकते है ।
इस अवसर पर कॉलेज में स्वामी विवेकानंद के जीवन, दर्शन, शिक्षाओं एवं उनके अनुभवों पर आधारित सेमिनार का आयोजन किया गया । विदित रहे की कॉलेज में स्वामी विवेकानंद केंद्र की स्थापना की गई थी जिसके बाद से कॉलेज नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष स्वामी विवेकानंद के विचारों और मूल्यों पर अनेकों कार्यक्रमों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं एवं सेमिनारों का आयोजन करता आ रहा है ।
इस अवसर पर कॉलेज के स्टाफ सदस्य डॉ एसके वर्मा, प्रो अन्नू आहूजा, प्रो मयंक अरोड़ा, प्रो मनोज, दीपक मित्तल भी कार्यक्रम का हिस्सा बने ।

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