Saturday, May 30, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में दो दिवसीय ‘बसंत आयो रे’ उत्सव का रंगारंग समापन  

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at February 1, 2025 Tags: , , , ,

महिला प्रकोष्ठ, आईक्यूएसी, सोशल साइंस एसोसिएशन, एनएसएस और पर्यावरण बचाओ सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में हुआ आयोजन

नयी चेतना और बेहतर जीवन का आश्वासन है बसंत पंचमी का त्यौहार: डॉ अनुपम अरोड़ा  

BOL PANIPAT , 01 फरवरी. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में दो दिवसीय ‘बसंत आयो रे’ उत्सव के दूसरे दिन विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें छात्र-छात्राओं ने भारी संख्या में भाग लिया और बसंत पंचमी के त्यौहार को रंगारंग तरीके से समापन किया । दूसरे दिन पतंग उड़ाना, पतंग बनाना एवं सजाना, पीली वेशभूषा में नृत्य, काव्य पाठ और गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया । इस पूरे आयोजन को महिला प्रकोष्ठ, आईक्यूएसी, सोशल साइंस एसोसिएशन, एनएसएस और पर्यावरण बचाओ सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया । प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा की अगुआई में छात्र-छात्राओं ने सबसे पहले सरस्वती वंदना के माध्यम से मां सरस्वती की पूजा की और गायत्री मन्त्र गाकर सभी की मंगल कामना के लिए प्रार्थना की । कार्यक्रमों में प्रो अन्नू आहूजा, डॉ संतोष कुमारी, डॉ मोनिका खुराना, प्रो तन्नु मेहता, प्रो निधि ने सक्रियता के साथ हिस्सा लिया । प्रथम आने वाले विजेताओं को पांच सौ रुपये, द्वितीय को तीन सौ रूपये, तृतीय को दो सौ रूपये इनाम में दिए गए । सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट्स से नवाजा गया । पतंग बनाने और उड़ाने में छात्र-छात्राओं के साथ-साथ प्राध्यापकों ने भी हिस्सा लिया ।

     डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है । मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं । हर दिन नयी उमंग से सूर्योदय होता है और नयी चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है । यों तो माघ का यह पूरा मास ही उत्साह देने वाला है परन्तु वसंत पंचमी का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है । प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है । जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं वे इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं । इस दिन पर कलाकारों का तो कहना ही क्या? जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बहीखातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है । चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं ।

     डॉ मोनिका खुराना ने कहा कि राजा भोज का जन्मदिवस भी वसंत पंचमी को ही आता हैं । राजा भोज इस दिन एक बड़ा उत्सव करवाते थे जिसमें पूरी प्रजा के लिए एक बड़ा प्रीतिभोज रखा जाता था जो चालीस दिन तक चलता था । वसन्त पंचमी हिन्दी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्मदिवस भी है । निराला जी के मन में निर्धनों के प्रति अपार प्रेम और पीड़ा थी । वे अपने पैसे और वस्त्र खुले मन से निर्धनों को दे डालते थे । इस कारण लोग उन्हें ‘महाप्राण’ कहते थे । ऐसा भी मानते है कि इस दिन जन्मे लोग कोशिश करे तो बहुत आगे जाते है ।

विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम इस प्रकार रहे –

पतंग बनाना और सजाना :प्रथम- सिम्पी, बीबीए- तृतीय, द्वितीय -मोहित, बीए- द्वितीय, तृतीय -मधु,बीए- प्रथम, पिंकी ,बीए-तृतीय

सर्वश्रेष्ठ पीली वेशभूषा : प्रथम: स्नेहा, एमए- इकोनॉमिक्स

गायन : प्रथम- राज  ,बीए- प्रथम  ,द्वितीय – श्रधा ,बीए- अंग्रेजी (ऑनर्स), तृतीय :मोनिया, बीए- तृतीय

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