पाइट में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस: एआइ पर पढ़े गए शोधपत्र.
-डीआरडीओ के विज्ञानी ने बताया भविष्य, स्वदेशी रक्षा उपकरण से विदेश पर निर्भरता घटी
BOL PANIPAT : समालखा – स्वदेशी रक्षा उपकरणों की वजह से भारत की विदेश पर निर्भरता घटी है। स्वदेशी तकनीक से भारत आत्मनिर्भर भी हो रहा है। एआइ की मदद से भारत की जीडीपी बढ़ेगी। आर्थिक रूप से विकास होगा। इसके साथ ही, एआइ से रोजगार घटेंगे नहीं, बल्कि बढ़ेंगे। यह बात पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलॉजी में कंप्यूटेशनल इंटेलीजेंस एंड कंप्यूटिंग एप्लीकेशंस पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में विशेषज्ञों ने कही। इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स दिल्ली सेक्शन का तकनीकी सहयोग रहा।
डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसके तोमर ने रक्षा अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी सेंसर विषय पर कहा कि देश की सुरक्षा में स्वदेशी तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि स्वदेशी सेंसर ऐसे उपकरण हैं जो रक्षा क्षेत्र में दुश्मन की गतिविधियों, हथियारों की पहचान, मिसाइल ट्रैकिंग, और निगरानी जैसे कार्यों के लिए देश में ही विकसित किए जा रहे हैं।
तोमर ने कहा कि ये सेंसर भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत और तकनीकी क्षमता का उदाहरण हैं। भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इनके माध्यम से अब रक्षा क्षेत्र में विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटेगी। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ का उद्देश्य आने वाले वर्षों में सभी रक्षा उपकरणों में स्वदेशी सेंसरों का उपयोग सुनिश्चित करना है।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से डीन डॉ.राकेश कुमार ने कहा कि रोबोटिक्स और ऑटोमेशन में करिअर की अपार संभावनाएं हैं। स्वदेशी तकनीक पर काम करें, जिससे भारत विकसित और आत्मनिर्भर होगा। इस दौरान चेयरमैन हरिओम तायल, सचिव सुरेश तायल, वाइस चेयरमैन राकेश तायल, बोर्ड सदस्य शुभम तायल, निदेशक डॉ.शक्ति कुमार, डीन डॉ.जेएस सैनी, डीन डॉ.बीबी शर्मा, रजिस्ट्रार डॉ.अरविंद सिंह, डॉ.एससी गुप्ता, डॉ.अंजू गांधी ने भी विचार रखे। कॉन्फ्रेंस में 18 राज्यों से 1826 शोधार्थियों ने भाग लिया। इसमें 40 सेशन चेयर्स, 21 रिपोर्टर्स और 145 पेपर प्रस्तुत किए गए।

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