Wednesday, April 22, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के सात दिवसीय विशेष एनएसएस कैंप का पांचवां दिन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at March 18, 2026 Tags: , , , , ,

लोभ, लालच और झांसा है साइबर क्राइम घटित होने के बड़े कारण, साइबर क्राइम होने पर 1930 नंबर पर तुरंत कॉल करें: रोशन लाल सचदेवा, पूर्व मैनेजर  

अवसाद मन की कमजोरी नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति में बदलाव है, जिसे सही सहयोग से ठीक किया जा सकता है: विनोद कुमार 

सोनिया फर्स्ट ऐड ट्रेनर जिला रेड क्रॉस पानीपत ने सिखाये फर्स्ट-ऐड के गुर 

BOL PANIPAT , 18 मार्च, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के सात दिवसीय विशेष एनएसएस कैंप के पांचवें दिन रोशन लाल सचदेवा पूर्व मेनेजर पंजाब नेशनल बैंक द्वारा ‘साइबर क्राइम जागरूकता’ और सुश्री सोनिया फर्स्ट ऐड ट्रेनर द्वारा ‘फर्स्ट-ऐड एवं सीपी आर कैसे दे’  विषयों पर व्यावहारिक ज्ञान स्वयंसेवकों को दिया गया । दोपहर के सत्र में विनोद कुमार और अतुल कुमार काउंसलर मानसिक रोग विभाग सिविल हॉस्पिटल पानीपत ने अपने व्याख्यान ‘उतेजना और अवसाद से कैसे बचे‘ विषय पर दिए । स्वयंसेवकों को साइबर क्राइम के प्रकारों, इन्हें करने के तरीकों और इनसे बचने के उपायों पर विस्तृत एवं व्यवहारिक ज्ञान और प्रशिक्षण दिया गया । असल में वर्तमान समय में साइबर क्राइम करने की वारदातों की संख्या लगातार बढ़ रही है । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, एनएसएस प्रोग्राम अधिकारी डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने पौधे-रोपित गमलें भेंट करके किया । दिन की शुरुआत ध्यान और योग शिविर से शुरू हुई । मंच संचालन डॉ संतोष कुमारी ने किया । 

     रोशन लाल सचदेवा ने कहा कि यदि ओटीपी की मदद से कोई हमारे पैसे निकाल ले तो हमें बिना वक्त गवाएं 1930 साइबर हेल्प लाइन नंबर पर कॉल करनी चाहिए । हम cybercrime.gov.in साईट पर जाकर भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है । जितनी जल्दी हम अपनी शिकायत दर्ज करवाएंगे उतना ही फायदा हमें होगा । हमें भूल कर भी अपना ओटीपी किसी को नहीं देना चाहिए और अनचाहे लिंक एवं इमेल पर हमें क्लिक नहीं करना चाहिए । हमें आसान संख्या वाले, अपना जन्मदिन, अपनी गाड़ी के नंबर आदि जैसे पासवर्ड नहीं बनाने चाहिए । साइबरफिशिंग के माध्यम से किसी के पास स्पैम ईमेल भेजी जाती है ताकि वह व्यक्ति अपनी निजी जानकारी दे और उस जानकारी से फिर उसका नुकसान कर दिया जाए । ऐसी इमेल ज्यादातर आकर्षक होती है । डेटा उल्लंघन एक सुरक्षा उल्लंघन है जिसमें संवेदनशील, संरक्षित या गोपनीय डेटा की प्रतिलिपि बनाई, प्रेषित, देखी या चुराई जाती है । ऐसी घटनाएं व्यक्तिगत लाभ या द्वेष (ब्लैक हैट्स), संगठित अपराध, राजनीतिक कार्यकर्ताओं या राष्ट्रीय सरकारों के लिए हैक करने वाले व्यक्तियों द्वारा की जाती है । फोटो मोर्फिंग तकनीक और फेक यूआरएल पर भी उन्होनें विस्तार से चर्चा की और इनसे बचने की सलाह दी ।

सुश्री सोनिया ने एनएसएस कार्यकर्ताओं को फर्स्ट-ऐड के गुर सिखाते हुए कहा कि प्राथमिक चिकित्सा दम घुटने, ह्रदय गति रूकने, खून बहने, शरीर में जहर के होने, जल जाने, हीट स्ट्रोक, बेहोश या कोमा की स्थिति में, मोच, हड्डी टूटने और जानवर के काटने पर दी जाती है । प्राथमिक चिकित्सा के उद्देश्य घायल व्यक्ति की जान बचाना, उसको बिगड़ी हालत से बाहर लाना और उसकी तबियत के सुधार में बढ़ावा देना होने चाहिए । प्राथमिक चिकित्सा के सिद्धांतो पर बोलते हुए सोनिया ने कहा की सबसे पहले हमें घायल व्यक्ति की सांस की जाँच करनी चाहिए, अगर चोट लगी है और रक्त बह रहा हो तो जल्द से जल्द रक्तस्राव को रोकना चाहिए, अगर घायल व्यक्ति को सदमा लगा हो तो उसे समझाना और सांत्वना देनी चाहिए, अगर व्यक्ति बेहोश हो तो उसे होश में लाने की कोशिश करनी चाहिए, अगर हड्डी टूट गयी हो तो व्यक्ति को सीधा करके उसका दर्द कम करना चाहिए और जितना जल्दी हो सके घायल व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल या चिकित्सालय पहुँचाना चाहिए ।

विनोद कुमार ने कहा कि मानसिक रोग और अवसाद से बचने के लिए नियमित योग, मेडिटेशन, और पौष्टिक आहार के साथ हमें अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखना चाहिए । सकारात्मक सोच रखकर, प्रियजनों से बात करके और प्रकृति के बीच समय बिताने से हम इन विकारों से बच सकते है । यदि समस्या फिर भी रहे तो हमें बिना संकोच मनोवैज्ञानिक या डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए । हमें प्रतिदिन एक ही समय पर उठने-सोने का नियम बनाना चाहिए और संतुलित भोजन लेना चाहिए । कम से कम प्रतिदिन 20-30 मिनट व्यायाम (जैसे योग या टहलना) करना चाहिए क्यूंकि इससे एंडोर्फिन (खुशी देने वाला हार्मोन) बढ़ता है । हमें अकेलेपण से बचना चाहिए और दोस्तों और परिवार से बात करनी चाहिए तथा सामाजिक गतिविधियों में शामिल होंना चाहिए । नकारात्मक विचारों को डायरी में लिखकर खुद में सकारात्मक भाव जगाने चाहिए । शराब और कैफीन का सेवन कम से कम करना चाहिए क्योंकि ये अवसाद को बढ़ाते हैं । यदि उदासी लंबे समय तक रहे, तो थेरेपी या डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए । अवसाद का मतलब मन की कमजोरी नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति में बदलाव है, जिसे सही सहयोग से ठीक किया जा सकता है ।

अतुल कुमार ने कहा कि मानसिक रोगों का इलाज पेशेवर चिकित्सा, जैसे मनोचिकित्सक से परामर्श, दवाओं और थेरेपी के संयोजन से सबसे प्रभावी ढंग से किया जाता है । इसमें कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी), योग, ध्यान, और जीवनशैली में बदलाव (पोषण, नींद) शामिल हैं । गंभीर मामलों में पुनर्वास और नियमित फॉलो-अप आवश्यक है । 

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने एनएसएस कार्यकर्ताओं का हौंसला बढ़ाते हुए कहा कि  एनएसएस के तहत छात्र-छात्राएं बहुत अच्छे और पुनीत कार्य कर रहे हैं । युवा अवस्था में अच्छे कार्य करने की क्षमता और भी ज्यादा होती है । कॉलेज के सभी एनएसएस स्वयंसेवी युवा भारतीय हैं और वे समाज के सबसे गतिशील वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं । उन्हें खुद पर नाज होना चाहिए । 

       डॉ राकेश गर्ग प्रोग्राम ऑफिसर ने कहा कि युवाओं में राष्ट्रीयता की भावना उत्पन्न करने के लिए ही एनएसएस की स्थापना की गई थी और आज इस योजना में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं स्कूलों के चालीस लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े हुए है । बिना किसी इच्छा के दूसरों की सहायता करना और समाज की सेवा करना बहुत बड़ी बात है । एनएसएस लोगों के साथ मिलकर कार्य करना और राष्ट्रीय आपदाओं के समय सेवा करना सिखाता है । उन्होंने स्वयंसेवकों को निरंतर देश और समाज की सेवा करने का आह्वान किया । 

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